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शासनादेेश में उलझा किसान की मौत पर मुआवजे का मामला

Tue, 17 Dec 2019 02:31 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 17 Dec 2019 02:31 AM IST
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बरेली। करीब छह माह पहले नेपाल से आए हाथियों ने बरेली, रामपुर में जमकर उत्पात मचाया था। हाथियों ने एक वनकर्मी समेत चार किसानोें को मार डाला था। वन विभाग ने अपने कर्मचारी के परिजन को तो मुआवजा दे दिया है, लेकिन किसान के परिजन को नए शासनादेश का हवाला देकर टहलाया जा रहा है। नेपाली हाथियों ने 28 जून को बहेड़ी के गांव गौंटिया में खेत पर काम कर रहे किसानों पर हमला कर दिया था। इस हमले में लाखन सिंह की मौत हो गई थी। कई किसान घायल भी हुए थे। हाथियों को काबू करने की कोशिश में एक वन कर्मी को भी जान गंवानी पड़ी थी। वन विभाग ने वनकर्मी समेत घायल किसानों को तो राहत मुहैया करा दी लेकिन मृतक किसान के परिजन मुआवजा के लिए अब तक वन विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
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जंगली जानवरों का हमला भी ‘दैवी आपदा’
डीएफओ भरत लाल ने बताया कि करीब तीन माह पहले वन्यजीवों के हमले को भी दैवी आपदा में शामिल कर लिया गया है। बाघ, तेंदुआ, हाथी आदि वन्यजीवों के हमले में घायल या मृतक के आश्रितों को दैवी आपदा मानते हुए शासन ने पांच लाख रुपये की मुआवजा राशि जारी करने का आदेश जारी किया है। लिहाजा हाथियों के हमले में मृतक किसान को दैवी आपदा राहत के तहत मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए शासन बजट जारी करेगा। अगर जंगल के अंदर वन्यजीवों के हमले में मौत होती है या कोई घायल होता है तो कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
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