हरियाली के बीच कभी पेड़ों तो कभी नहरों को पार करते बाघों के अद्भुत नजारों ने पीलीभीत जिले को पर्यटन के क्षेत्र में देश ही नहीं विदेशों में भी अलग पहचान दिलाई है। इससे न सिर्फ पीटीआर (पीलीभीत टाइगर रिजर्व) के पर्यटन सत्र को पंख लगे बल्कि रोजगार की दिशा में भी सुखद परिणाम सामने आए हैं।
World Tourism Day: पीलीभीत में चूका बीच कराता है गोवा जैसा एहसास, जंगल में दिखते हैं रोमांचकारी नजारे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पर्यटन सत्र के दौरान जंगल में विचरण करने वाले कुछ बाघ खास बने रहते हैं। जिनका सैलानियों ने नामकरण भी किया है। इसमें सुल्तान बाघ का परिवार और त्रिशूल बाघ शामिल हैं।
पीटीआर के पर्यटन को बढ़ावा मिलने से जंगल से बाहर भी व्यापार को लाभ हुआ है। जहां पहले दो होम स्टे थे। वह यह संख्या बढ़कर छह पहुंच गए है। दो होम स्टे निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा भी कई लोगों ने होम स्टे बनाने के लिए जमीनों की खरीद-फरोख्त बढ़ा दी है।
रोजगार के बढ़ाए अवसर
पीटीआर के पर्यटन की बुलंदियों ने रोजगार के अवसर भी प्रदान किए। सत्र के दौरान निजी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहता है। निजी जिप्सी वाहनों से सैलानियों को जंगल घुमाया जाता है। सैलानियों को जानकारी देने के लिए जंगल से सटे इलाकों के युवाओं को गाइडों की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। ऐसे में जिले के कई लोगों ने जिप्सी वाहनों को खरीदकर पर्यटन में लगाया है। जिससे वे लोग रोजगार से जुड़ गए हैं। बीते सत्र में जहां 50 जिप्सी वाहन थे, इस सत्र में संख्या 80 तक पहुंचने की उम्मीद है।