{"_id":"59cc12444f1c1b9f538b4bbd","slug":"chingari-of-the-kisan-movement-erupting-in-villages","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांवों में भड़क रही किसान आंदोलन की चिनगारी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांवों में भड़क रही किसान आंदोलन की चिनगारी
बरेली।
Updated Thu, 28 Sep 2017 02:34 AM IST
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िककिसान
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जाते वक्त मानसून की बारिश से धान, गन्ना और अन्य फसलों के नुकसान पर प्रशासन से संज्ञान लिए जाने से किसानों का धैर्य जवाब देने लगा है। ट्वीटर के जरिए सीएम तक मामला पहुंचने के बाद भी कृषि और गन्ना विभाग के अफसर खामोश हैं। बीमा कंपनी ने फसल सुरक्षा बीमा में बहुत से किसानों को प्रीमियम ही नहीं काटा और न ही वह फसल नुकसान का सर्वे कराने की जरूरत समझ रही है। ऐसे लापरवाही भरे रवैये से गुस्साए किसान गांवों में समूह के रूप में इकट्ठे होकर आंदोलन छेड़ने के मूड में हैं।
21 से 24 सितंबर तक हुई मानसूनी बारिश में बरेली में करीब 35 हजार हेक्टेअर गन्ना और 65 हजार हेक्टेअर सरबती धान समेत तिलहन, दलहन और अन्य खरीफ फसलें खेत में बिछ गई थीं। इससे इनके उत्पादन में एक तिहाई से अधिक गिरावट की आशंका है। किसान इसे लेकर परेशान हैं। प्रगतिशील किसान अनिल साहनी समेत कई अन्य लोगों ने मुख्यमंत्री को ट्वीटर पर बारिश से फसल नुकसान की जानकारी दी थी। सीएम ऑफिस के हरकत में आते ही कृषि विभाग ने बीमा कंपनी बजाज आलियांज पर फसल नुकसान का सर्वे करने का दबाव बनाया था। बीमा कंपनी ने तहसीलवार अपने प्रतिनिधियों के मोबाइल नंबर जारी कर किसानों से शिकायत करने की अपील की थी। तमाम किसानों ने बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों से उनके मोबाइल नंबरों पर शिकायत करने की कोशिश की तो मोबाइल नंबरों पर फोन रिसीव नहीं हुए। कई किसानों ने लिखित शिकायत भी कराई। मगर, बीमा कंपनी फसल नुकसान का सर्वे कराने में टालमटोल कर रही है। इससे आक्रोशित तहसील सदर, फरीदपुर, बहेड़ी, भोजीपुरा और आंवला के किसानों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
बैंकों ने बीमा का प्रीमियम नहीं काटा
गांव मल्लपुर के किसान पूरनलाल, लेखराज, किशनपाल, भानु प्रताप, संतराम आदि किसानों ने बैंक ऑफ बड़ौदा पहुंचकर फसल बीमा के बारे में जानकारी करने की कोशिश की तो बैंक की ओर से किसानों को जवाब मिला कि फसल बीमा में इस बार उनके खाते से प्रीमियम ही नहीं काटा गया। इनके अलावा अन्य भी तमाम ऐसे किसान हैं जिनका बैंक या बीमा कंपनी की लापरवाही की वजह से प्रीमियम नहीं काटा गया। प्रगतिशील किसान अनिल साहनी का कहना है कि फसलों के नुकसान होने पर भी बीमा क्लेम से वंचित रह जाएंगे। इसलिए अब किसान इकट्ठे होकर सीएम योगी आदित्यनाथ से लखनऊ जाकर मिलने की रणनीति बना रहे हैं ताकि अफसरों और बीमा कंपनी की लापरवाही के बारे में उनको जानकारी दी जा सके।
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भाजपा किसान मोर्चा ने सौंपा ज्ञापन
भाजपा किसान मोर्चा ने बारिश और तेज हवाओं से धान और गन्ना की अगैती प्रजाति की फसलों के नुकसान से परेशान किसानों को राहत दिलाने की मांग को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें पीड़ित किसानों को सरकार से मुआवजा दिलाने की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में सुरेंद्र सिंह चौहान, सत्येंद्र सक्सेना, संगम सक्सेना, राम प्रसाद कश्यप, पूरनलाल मौर्य, उमाकांत गंगवार समेत कई किसान शामिल थे।
किसानों की खबर में वर्जन
कोट--
बीमा कंपनी को गन्ना और धान समेत अगैती प्रजाति की फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे कराना चाहिए था। मैं इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी और बीमा कंपनी से बात करूंगा। किसानों को उनके नुकसान का क्लेम मिलना चाहिए। विनोद कुमार, उप कृषि निदेशक
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21 से 24 सितंबर तक हुई मानसूनी बारिश में बरेली में करीब 35 हजार हेक्टेअर गन्ना और 65 हजार हेक्टेअर सरबती धान समेत तिलहन, दलहन और अन्य खरीफ फसलें खेत में बिछ गई थीं। इससे इनके उत्पादन में एक तिहाई से अधिक गिरावट की आशंका है। किसान इसे लेकर परेशान हैं। प्रगतिशील किसान अनिल साहनी समेत कई अन्य लोगों ने मुख्यमंत्री को ट्वीटर पर बारिश से फसल नुकसान की जानकारी दी थी। सीएम ऑफिस के हरकत में आते ही कृषि विभाग ने बीमा कंपनी बजाज आलियांज पर फसल नुकसान का सर्वे करने का दबाव बनाया था। बीमा कंपनी ने तहसीलवार अपने प्रतिनिधियों के मोबाइल नंबर जारी कर किसानों से शिकायत करने की अपील की थी। तमाम किसानों ने बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों से उनके मोबाइल नंबरों पर शिकायत करने की कोशिश की तो मोबाइल नंबरों पर फोन रिसीव नहीं हुए। कई किसानों ने लिखित शिकायत भी कराई। मगर, बीमा कंपनी फसल नुकसान का सर्वे कराने में टालमटोल कर रही है। इससे आक्रोशित तहसील सदर, फरीदपुर, बहेड़ी, भोजीपुरा और आंवला के किसानों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
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बैंकों ने बीमा का प्रीमियम नहीं काटा
गांव मल्लपुर के किसान पूरनलाल, लेखराज, किशनपाल, भानु प्रताप, संतराम आदि किसानों ने बैंक ऑफ बड़ौदा पहुंचकर फसल बीमा के बारे में जानकारी करने की कोशिश की तो बैंक की ओर से किसानों को जवाब मिला कि फसल बीमा में इस बार उनके खाते से प्रीमियम ही नहीं काटा गया। इनके अलावा अन्य भी तमाम ऐसे किसान हैं जिनका बैंक या बीमा कंपनी की लापरवाही की वजह से प्रीमियम नहीं काटा गया। प्रगतिशील किसान अनिल साहनी का कहना है कि फसलों के नुकसान होने पर भी बीमा क्लेम से वंचित रह जाएंगे। इसलिए अब किसान इकट्ठे होकर सीएम योगी आदित्यनाथ से लखनऊ जाकर मिलने की रणनीति बना रहे हैं ताकि अफसरों और बीमा कंपनी की लापरवाही के बारे में उनको जानकारी दी जा सके।
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भाजपा किसान मोर्चा ने सौंपा ज्ञापन
भाजपा किसान मोर्चा ने बारिश और तेज हवाओं से धान और गन्ना की अगैती प्रजाति की फसलों के नुकसान से परेशान किसानों को राहत दिलाने की मांग को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें पीड़ित किसानों को सरकार से मुआवजा दिलाने की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में सुरेंद्र सिंह चौहान, सत्येंद्र सक्सेना, संगम सक्सेना, राम प्रसाद कश्यप, पूरनलाल मौर्य, उमाकांत गंगवार समेत कई किसान शामिल थे।
किसानों की खबर में वर्जन
कोट--
बीमा कंपनी को गन्ना और धान समेत अगैती प्रजाति की फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे कराना चाहिए था। मैं इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी और बीमा कंपनी से बात करूंगा। किसानों को उनके नुकसान का क्लेम मिलना चाहिए। विनोद कुमार, उप कृषि निदेशक