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इस दिवाली पर माल तो चीन का ही बिकेगा
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Wed, 05 Oct 2016 01:43 AM IST
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पाकिस्तान में सर्जीकल स्ट्राइक किए जाने के बाद लोग पाकिस्तान के साथ ही चीन का भी विरोध कर रहे हैं। भाजपा से जुड़े कई नेताओं समेत कुछ लोग इसीलिए चीनी सामान के बहिष्कार की बात कर रहे हैं। साशल साइट्स पर अपीलों की भरमार है और इस बहाने पर देश भक्ति पर बहस हो रही है। बाजार की हकीकत इन अपीलों से अलग है। शीर्ष नेता चाइनीज सामान की भारत में बिक्री पर रोक लगाने की बात भले कर रहे हों। मगर इस दिवाली पर बिजली की झालरें तो चीन की ही बिकेंगी। एक तो सरकार ने चीन से आने वाले माल पर रोक नहीं लगाई है। यानी चीन से माल तो यहां आ चुका और थोक से फुटकर व्यापारियों तक भी पहुंच चुका है। दूसरे दिवाली पर बेचने के लिए व्यापारियों ने पहले से स्टाक कर रखा है। यहां के इलेक्ट्रिकल व्यापारियों का कहना है कि चाइनीज झालरों के आगे इंडिया में अभी कोई विकल्प नहीं है। दिल्ली में कुछ फैंसी आइटम जरूर बनने लगे हैं, जो चाइनीज सामान की अपेक्षा काफी महंगे हैं। रही बात झालरों की तो इसमें तो चीन ही चीन है। इतनी सस्ती झालरें न यहां बन रही हैं और न बिक रही हैं। जो माल ग्राहक मांगेगा वही बिकेगा। बरेली में इलेक्ट्रिक के सामान का मार्केट रोडवेज के पास है। यहां के दो दर्जन थोक व्यापारी चाइनीज झालरें बेचते हैं। व्यापारियों की माने तो दिवाली पर बरेली में छह-सात करोड़ का इलेक्ट्रिक सामान का कारोबार होता है। बरेली से माल बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर के अलावा लखीमपुर में सप्लाई होता है और अब तक काफी मात्रा में जा भी चुका है। पहले तो उत्तराखंड के व्यापारी भी बरेली ही आते थे।
दिल्ली से आता है चाइनीज माल
चाइनीज सामान पहले मुंबई पहुंचता है। वहां से कंटेनर दिल्ली आते हैं। फिर देश के विभिन्न शहरों में सप्लाई होता है। दिल्ली में सदर बाजार और भगीरथ पैलेस इलेक्ट्रिक सामान की प्रमुख मंडियां हैं। थोक व्यापारी 80 प्रतिशत माल दशहरा से पहले मंगा लेते हैं। बाकी 20 प्रतिशत माल दशहरा के बाद दिवाली तक लाया जाता है।
हमें तो व्यापार करना है। अभी तक इंडिया में चाइनीज झालरों का कोई विकल्प नहीं है। न ही माल आने पर कोई रोक टोक है। सारा माल एक नंबर में आता है। पूरे मार्केट में चाइनीज झालरें बिक रही हैं। व्यापारियों ने पहले से स्टाक करके रखा है। ग्राहक को सस्ता माल चाहिए। इंडिया के माल की जगह चाइनीज काफी सस्ता है।
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व्यापारी सोनू गुप्ता
इंडिया मेड कुछ फैंसी आइटम मसलन मटकी कलश, दिया लाइट, गोल्डन दिया लाइट आदि आए हैं, लेकिन ये चाइनीज से कई गुना महंगे हैं। ग्राहक सस्ता सामान चाहता है। माल कहां का बना है इससे उसे कोई मतलब नहीं? मसलन मटकी कलश वाली पांच मीटर वाली लड़ी का थोक रेट 70 रुपये, दिया लाइट 45 रुपये और गोल्डन दिया 80 रुपये है। जबकि चाइनीज 10 मीटर झालर का थोक रेट 25-26 रुपये और एलईडी 30-35 रुपये है। इंडिया मेड फैंसी चीजों का रॉ मैटेरियल भी चाइनीज होता है।
व्यापारी मुदित अग्रवाल
चाइनीज सामान ने बंद कर दीं कई फैक्ट्रियां
बरेली इलेक्ट्रिक कांट्रेक्टर एंड मर्चेंट एसोसिएशन संरक्षक अरुण भसीन ले बताया कि झालर बनाने को मूंछ वाले बल्ब कानपुर और कोलकाता की फैक्ट्रियों में बनते थे। चाइनीज झालरें आने के बाद दोनों जगह की फैक्ट्रियां बंद हो गईं। इंडिया मेक झालर की अपेक्षा चाइनीज काफी सस्ती है।
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दिल्ली से आता है चाइनीज माल
चाइनीज सामान पहले मुंबई पहुंचता है। वहां से कंटेनर दिल्ली आते हैं। फिर देश के विभिन्न शहरों में सप्लाई होता है। दिल्ली में सदर बाजार और भगीरथ पैलेस इलेक्ट्रिक सामान की प्रमुख मंडियां हैं। थोक व्यापारी 80 प्रतिशत माल दशहरा से पहले मंगा लेते हैं। बाकी 20 प्रतिशत माल दशहरा के बाद दिवाली तक लाया जाता है।
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हमें तो व्यापार करना है। अभी तक इंडिया में चाइनीज झालरों का कोई विकल्प नहीं है। न ही माल आने पर कोई रोक टोक है। सारा माल एक नंबर में आता है। पूरे मार्केट में चाइनीज झालरें बिक रही हैं। व्यापारियों ने पहले से स्टाक करके रखा है। ग्राहक को सस्ता माल चाहिए। इंडिया के माल की जगह चाइनीज काफी सस्ता है।
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व्यापारी सोनू गुप्ता
इंडिया मेड कुछ फैंसी आइटम मसलन मटकी कलश, दिया लाइट, गोल्डन दिया लाइट आदि आए हैं, लेकिन ये चाइनीज से कई गुना महंगे हैं। ग्राहक सस्ता सामान चाहता है। माल कहां का बना है इससे उसे कोई मतलब नहीं? मसलन मटकी कलश वाली पांच मीटर वाली लड़ी का थोक रेट 70 रुपये, दिया लाइट 45 रुपये और गोल्डन दिया 80 रुपये है। जबकि चाइनीज 10 मीटर झालर का थोक रेट 25-26 रुपये और एलईडी 30-35 रुपये है। इंडिया मेड फैंसी चीजों का रॉ मैटेरियल भी चाइनीज होता है।
व्यापारी मुदित अग्रवाल
चाइनीज सामान ने बंद कर दीं कई फैक्ट्रियां
बरेली इलेक्ट्रिक कांट्रेक्टर एंड मर्चेंट एसोसिएशन संरक्षक अरुण भसीन ले बताया कि झालर बनाने को मूंछ वाले बल्ब कानपुर और कोलकाता की फैक्ट्रियों में बनते थे। चाइनीज झालरें आने के बाद दोनों जगह की फैक्ट्रियां बंद हो गईं। इंडिया मेक झालर की अपेक्षा चाइनीज काफी सस्ती है।