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Bareilly News: सब्जी में बड़ी ढूंढ रहे बच्चे, ताजे फल के नाम पर बांटे जा रहे खराब केले
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बरेली। शहरी क्षेत्र के 109 प्राथमिक विद्यालयों में रोजाना बच्चों को मिड-डे मील परोसा जाता है। सोमवार के मेन्यू के अनुसार बच्चों को दाल या सोयाबीन की बड़ी की सब्जी, रोटी दी जानी थी, लेकिन खराब गुणवत्ता की सब्जी परोस दी गई। मौसमी फल के नाम पर कहीं कच्चे तो कहीं सड़े केले परोसे गए। पड़ताल में सामने आया कि बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही का खामियाजा बच्चे भुगत रहे हैं। एक स्कूल में नगर निगम की टीम को भी खाने की गुणवत्ता खराब मिली।
कंपोजिट विद्यालय किशोर बाजार में दोपहर 11:20 बजे टीम ने पाया कि बच्चों को परोसी गई सब्जी में पानी की मात्रा इतनी अधिक थी कि बच्चे उसमें सोयाबीन की बड़ी तलाशते रहे। पन्नी में लिपटी रोटियां भी ठंडी हो चुकी थीं। बच्चों ने बताया कि रोजाना ऐसा ही खाना मिलता है।
कुछ ने बताया कि कभी-कभी तो इसमें नमक-मिर्च भी पता नहीं चलता। इसी दौरान नगर निगम के अधिकारी भी खाने की गुणवत्ता चेक करने पहुंचे। उन्होंने खाने की गुणवत्ता खराब मिलने की जानकारी अधिकारियों को देने की बात कही।
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कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय बिहारीपुर में दोपहर 12 बजे बच्चों के लिए आई सब्जी की बाल्टी आधी भरी थी, लेकिन उसमें केवल रस नजर आ रहा था। खाना परोसने वाली महिला ने जब बाल्टी में चमचा चलाया तो कुछ आलू और सोयाबीन की बड़ी नजर आई। सुबह नौ बजे से ही खाना स्कूलों में भेजना शुरू करने के कारण रोटियां ठंडी और बेस्वाद हो चुकी थीं। संवाद
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कंपोजिट विद्यालय किशोर बाजार में दोपहर 11:20 बजे टीम ने पाया कि बच्चों को परोसी गई सब्जी में पानी की मात्रा इतनी अधिक थी कि बच्चे उसमें सोयाबीन की बड़ी तलाशते रहे। पन्नी में लिपटी रोटियां भी ठंडी हो चुकी थीं। बच्चों ने बताया कि रोजाना ऐसा ही खाना मिलता है।
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कुछ ने बताया कि कभी-कभी तो इसमें नमक-मिर्च भी पता नहीं चलता। इसी दौरान नगर निगम के अधिकारी भी खाने की गुणवत्ता चेक करने पहुंचे। उन्होंने खाने की गुणवत्ता खराब मिलने की जानकारी अधिकारियों को देने की बात कही।
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कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय बिहारीपुर में दोपहर 12 बजे बच्चों के लिए आई सब्जी की बाल्टी आधी भरी थी, लेकिन उसमें केवल रस नजर आ रहा था। खाना परोसने वाली महिला ने जब बाल्टी में चमचा चलाया तो कुछ आलू और सोयाबीन की बड़ी नजर आई। सुबह नौ बजे से ही खाना स्कूलों में भेजना शुरू करने के कारण रोटियां ठंडी और बेस्वाद हो चुकी थीं। संवाद