घर जाने को बिलख रहे बच्चेेे.. फिर भी पसीजता नहीं सिस्टम
काउंसलिंग करके बच्चों को घर पहुंचाने में चाइल्ड लाइन कर रही टालमटोल
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बाल कल्याण समिति, अनाथालय प्रबंधन के पत्रों पर भी नहीं की कोई कार्रवाई
बरेली। अपने मां-बाप से बिछड़े बच्चों के लिए सरकारी छत्रछाया अभिशाप बनकर रह गई है। आर्यसमाज अनाथालय में रह रहे कई बच्चे ऐसे हैं जो अपने माता-पिता के बारे में पूरी जानकारी देने के साथ घर का पता भी बता रहे हैं लेकिन चाइल्ड लाइन उन्हें उनके घर पहुंचाने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रही है। घर जाने के लिए रोते-बिलखते इन बच्चों को संभावना अनाथालय प्रबंधन के लिए मुश्किल हो रहा है। कुछ दिन पहले दो बच्चे अनाथालय से भाग चुके हैं। बाल कल्याण समिति की ओर से नोटिस भेजे जाने के बावजूद चाइल्ड लाइन की ओर से बच्चों की कोई खैरखबर नहीं ली जा रही है।
बेघर या लावारिस मिलने वाले बच्चों को बाल कल्याण समिति के आदेश पर अनाथालय भेजा जाता है। जो बच्चे अपने माता-पिता या घर का पता बता देते हैं, उन्हें काउंसलिंग कर घर भेजने की जिम्मेदारी चाइल्ड लाइन की है, लेकिन अनाथालय प्रबंधन का कहना है कि बच्चों और उनके माता-पिता की काउंसलिंग में देरी होने की वजह से कई बच्चे घर जाने के लिए रोते रहते हैं। उन्हें संभालना मुश्किल हो रहा है। अनाथालय प्रबंधन ने पिछले महीने बाल कल्याण समिति को भी इस स्थिति से अवगत कराया था।
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प्रबंधन का कहना था कि महाराष्ट्र का एक बच्चा मार्च से अनाथालय में रह रहा है, जबकि उसे अल्प अवधि के लिए अनाथालय में रखने के आदेश मिला था। उसे घर नहीं भेजा जा रहा है। प्रबंधन ने कासगंज के भी एक बच्चे को उसके घर भेजने के लिए पत्र भेजा था। यह बच्चा दिसंबर, 2019 से रह रहा है। अनाथालय प्रबंधन की इस दिक्कत को देखते हुए बाल कल्याण समिति ने पिछले महीने चाइल्ड लाइन के प्रभारी को नोटिस भेजा था। इसमें नाराजगी जताई गई थी कि चाइल्ड लाइन बच्चों को उनके घर भेजने के लिए काउंसलिंग करने में लापरवाही कर रही है। इसमें चार बच्चों के नाम भी दिए गए थे, लेकिन उन्हें घर भेजने के अब तक प्रयास नहीं हुए हैं।
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प्लीज.. मुुझे मम्मी-पापा के पास पहुंचा दो
अनाथालय में गाजियाबाद का एक बच्चा काफी समय से रह रहा है। वह अपने मां-बाप का नाम और घर का पता भी बता रहा है। कई दिनों से उसका रो-रोकर बुरा हाल है। अनाथालय के स्टाफ का कहना है कि कई बार अधिकारियों को बताया जा चुका है लेकिन उधर से कोई जवाब तक नहीं आ रहा है।
चाइल्ड लाइन को काउंसलिंग करके उन बच्चों को उनके घर भेजना चाहिए, जो लंबे समय से रह रहे हैं। कुछ बच्चों को रोकना मुश्किल हो रहा है। बाल कल्याण समिति को भी अवगत कराया गया है। - हर्षवर्धन, प्रधान, आर्य समाज अनाथालय
मैंने चाइल्ड लाइन को निर्देशित किया है कि अनाथालय में रह रहे बच्चे और उनके माता-पिता की काउंसलिंग कराकर उन्हें उनके घर भिजवाया जाए। इसमें लापरवाही नहीं होनी चाहिए। - डॉ. डीएन शर्मा, सदस्य, सीडब्ल्यूसी
बाल कल्याण समिति, अनाथालय प्रबंधन के पत्रों पर भी नहीं की कोई कार्रवाई बरेली। अपने मां-बाप से बिछड़े बच्चों के लिए सरकारी छत्रछाया अभिशाप बनकर रह गई है। आर्यसमाज अनाथालय में रह रहे कई बच्चे ऐसे हैं जो अपने माता-पिता के बारे में पूरी जानकारी देने के साथ घर का पता भी बता रहे हैं लेकिन चाइल्ड लाइन उन्हें उनके घर पहुंचाने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रही है। घर जाने के लिए रोते-बिलखते इन बच्चों को संभावना अनाथालय प्रबंधन के लिए मुश्किल हो रहा है। कुछ दिन पहले दो बच्चे अनाथालय से भाग चुके हैं। बाल कल्याण समिति की ओर से नोटिस भेजे जाने के बावजूद चाइल्ड लाइन की ओर से बच्चों की कोई खैरखबर नहीं ली जा रही है।
बेघर या लावारिस मिलने वाले बच्चों को बाल कल्याण समिति के आदेश पर अनाथालय भेजा जाता है। जो बच्चे अपने माता-पिता या घर का पता बता देते हैं, उन्हें काउंसलिंग कर घर भेजने की जिम्मेदारी चाइल्ड लाइन की है, लेकिन अनाथालय प्रबंधन का कहना है कि बच्चों और उनके माता-पिता की काउंसलिंग में देरी होने की वजह से कई बच्चे घर जाने के लिए रोते रहते हैं। उन्हें संभालना मुश्किल हो रहा है। अनाथालय प्रबंधन ने पिछले महीने बाल कल्याण समिति को भी इस स्थिति से अवगत कराया था।
प्रबंधन का कहना था कि महाराष्ट्र का एक बच्चा मार्च से अनाथालय में रह रहा है, जबकि उसे अल्प अवधि के लिए अनाथालय में रखने के आदेश मिला था। उसे घर नहीं भेजा जा रहा है। प्रबंधन ने कासगंज के भी एक बच्चे को उसके घर भेजने के लिए पत्र भेजा था। यह बच्चा दिसंबर, 2019 से रह रहा है। अनाथालय प्रबंधन की इस दिक्कत को देखते हुए बाल कल्याण समिति ने पिछले महीने चाइल्ड लाइन के प्रभारी को नोटिस भेजा था। इसमें नाराजगी जताई गई थी कि चाइल्ड लाइन बच्चों को उनके घर भेजने के लिए काउंसलिंग करने में लापरवाही कर रही है। इसमें चार बच्चों के नाम भी दिए गए थे, लेकिन उन्हें घर भेजने के अब तक प्रयास नहीं हुए हैं।
प्लीज.. मुुझे मम्मी-पापा के पास पहुंचा दो
अनाथालय में गाजियाबाद का एक बच्चा काफी समय से रह रहा है। वह अपने मां-बाप का नाम और घर का पता भी बता रहा है। कई दिनों से उसका रो-रोकर बुरा हाल है। अनाथालय के स्टाफ का कहना है कि कई बार अधिकारियों को बताया जा चुका है लेकिन उधर से कोई जवाब तक नहीं आ रहा है।चाइल्ड लाइन को काउंसलिंग करके उन बच्चों को उनके घर भेजना चाहिए, जो लंबे समय से रह रहे हैं। कुछ बच्चों को रोकना मुश्किल हो रहा है। बाल कल्याण समिति को भी अवगत कराया गया है। - हर्षवर्धन, प्रधान, आर्य समाज अनाथालय
मैंने चाइल्ड लाइन को निर्देशित किया है कि अनाथालय में रह रहे बच्चे और उनके माता-पिता की काउंसलिंग कराकर उन्हें उनके घर भिजवाया जाए। इसमें लापरवाही नहीं होनी चाहिए। - डॉ. डीएन शर्मा, सदस्य, सीडब्ल्यूसी