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‘छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइ के...’
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सूफियाना महफिल में कव्वाली और सितार की जुगलबंदी करते कलाकार।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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सूफियाना कव्वाली और सितार की जुगलबंदी से मंत्रमुग्ध हुए श्रोता
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दानिश हुसैन ने सूफी कलाम, डॉ. दीपेंद्र उपाध्याय ने दी सितार पर प्रस्तुति
बरेली। रिद्धिमा में बुधवार शाम सजी सूफियाना महफिल में कव्वाली और सितार की जुगलबंदी ने लोगों का मन मोह लिया। रामपुर, सहसवान घराने के कव्वाल दानिश हुसैन बदायूंनी ने सुफियाना कलाम पेश किए। डॉ. दीपेंद्र उपाध्याय ने सितार वादन से सभी को मंत्रमुग्ध किया।
देर शाम तक मॉडल टाउन पुलिस चौकी के सामने स्थित एसआरएमएस ट्रस्ट के रिद्धिमा मंच एवं कला केंद्र में संगीत की महफिल सजी। इसका आगाज रामपुर, सहसवान घराने के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पद्म विभूषण से सम्मानित उस्ताद निसार हुसैन खां के पौत्र दानिश हुसैन बदायूंनी ने किया। उन्होंने कई प्रख्यात सूफी कलाम पेश किए। शकील बदायूंनी के कलाम, ‘जो लगा के आग गए हो तुम, वो लगी हुई है बुझी नहीं’ के अलावा अमीर खुसरो के कलाम, ‘छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइ के’ को अपनी आवाज देकर श्रोताओं की तालियां बटोरीं। सूफी संत बुल्ले शाह के कलाम, दमादम मस्त कलंदर.. ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। सहसवान घराने से ही ताल्लुक रखने वाले आजम अली खां ने तबले पर संगत दी। बरेली निवासी सितार वादक डॉ. दीपेंद्र उपाध्याय ने राग झिंझोटी को सितार पर साधा और तबले पर इनकी संगत तीन ताल और एक ताल पर प्रशांत उपाध्याय ने दी। इस मौके पर ट्रस्ट के सचिव आदित्य मूर्ति, डॉ. अनुज सक्सेना, सेंटर हेड डॉ. कविता अरोड़ा, रजत खंडेलवाल, अश्वनी ओबेराय आदि शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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दानिश हुसैन ने सूफी कलाम, डॉ. दीपेंद्र उपाध्याय ने दी सितार पर प्रस्तुति बरेली। रिद्धिमा में बुधवार शाम सजी सूफियाना महफिल में कव्वाली और सितार की जुगलबंदी ने लोगों का मन मोह लिया। रामपुर, सहसवान घराने के कव्वाल दानिश हुसैन बदायूंनी ने सुफियाना कलाम पेश किए। डॉ. दीपेंद्र उपाध्याय ने सितार वादन से सभी को मंत्रमुग्ध किया।
देर शाम तक मॉडल टाउन पुलिस चौकी के सामने स्थित एसआरएमएस ट्रस्ट के रिद्धिमा मंच एवं कला केंद्र में संगीत की महफिल सजी। इसका आगाज रामपुर, सहसवान घराने के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पद्म विभूषण से सम्मानित उस्ताद निसार हुसैन खां के पौत्र दानिश हुसैन बदायूंनी ने किया। उन्होंने कई प्रख्यात सूफी कलाम पेश किए। शकील बदायूंनी के कलाम, ‘जो लगा के आग गए हो तुम, वो लगी हुई है बुझी नहीं’ के अलावा अमीर खुसरो के कलाम, ‘छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइ के’ को अपनी आवाज देकर श्रोताओं की तालियां बटोरीं। सूफी संत बुल्ले शाह के कलाम, दमादम मस्त कलंदर.. ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। सहसवान घराने से ही ताल्लुक रखने वाले आजम अली खां ने तबले पर संगत दी। बरेली निवासी सितार वादक डॉ. दीपेंद्र उपाध्याय ने राग झिंझोटी को सितार पर साधा और तबले पर इनकी संगत तीन ताल और एक ताल पर प्रशांत उपाध्याय ने दी। इस मौके पर ट्रस्ट के सचिव आदित्य मूर्ति, डॉ. अनुज सक्सेना, सेंटर हेड डॉ. कविता अरोड़ा, रजत खंडेलवाल, अश्वनी ओबेराय आदि शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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