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मनोज जायसवाल व प्रणय अनेजा समेत 25 लोगों पर चार्जशीट
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बरेली। सहारनपुर की टपरी डिस्टिलरी में पश्चिमी यूपी के सबसे बड़े शराब घोटाले में एसआईटी ने विवेचना पूरी कर चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी है। इसमें डिस्टिलरी मालिक प्रणय अनेजा, शराब कारोबारी मनोज जायसवाल और अजय जायसवाल समेत 25 लोगों को दोषी करार दिया गया है। चार्जशीट के मुताबिक साल भर में ही शराब माफिया ने आबकारी अफसरों की सांठगांठ से सरकार को 35 करोड़ से ज्यादा के राजस्व का नुकसान पहुंचाया है।
पिछले साल शासन को सहारनपुर की टपरी डिस्टिलरी में टैक्स चोरी कर शराब बाहर निकाले जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद शासन के निर्देश पर तीन मार्च को एसटीएफ ने टपरी डिस्टिलरी पर छापा मारा था। इस दौरान डिस्टिलरी से एक गेटपास पर दो ट्रकों बाहर निकाले जाने के बड़े खेल का खुलासा हुआ। अनुमान के तौर पर इस घोटाले में सौ करोड़ से ज्यादा टैक्स चोरी का दावा किया गया था। छापे के बाद डिस्टलरी को सीज कर दिया गया था।
एसआईटी ने इस घोटाले की जांच शुरू की तो पता चला कि कानपुर और उन्नाव के शराब कारोबारी अजय जायसवाल के डिपो पर डिस्टिलरी से शराब भेजी गई है। एसटीएफ ने अजय जायसवाल के डिपो को भी सीज कर दिया था मगर इसके बाद भी 24 मार्च 2021 को बरेली में हरुनगला के पास शराब से भरा एक ट्रक पकड़ा गया। जांच में पता चला कि यह शराब टपरी डिस्टलरी से निकली थी जिसे एसटीएफ पहले ही सीज कर चुकी थी। शराब को बरेली में मनोज जायसवाल के गोदाम में उतारा जाना था।
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इसके बाद यह छानबीन शुरू हुई कि सीज होने के बावजूद टपरी डिस्टलरी से शराब कैसे निकली। बरेली में अजय के भाई मनोज जायसवाल का गोदाम भी सीज कर दिया गया। एसआईटी ने इस मामले की जांच के दौरान डिस्टिलरी के मालिक प्रणय अनेजा, शराब कारोबारी मनोज जायसवाल, उसके भाई अजय जायसवाल और उनके मैनेजर अशोक दीक्षित को गिरफ्तार किया। शराब माफिया से सांठगांठ कर सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने के आरोप में डिस्टिलरी में तैनात कई आबकारी अधिकारियों को भी जेल जाना पड़ा।
एसआईटी ने अब एक साल बाद इस मामले में विवेचना पूरी कर ली है। विवेचक मनोज तिवारी ने अजय, मनोज, प्रणय, अशोक समेत 25 लोगों को दोषी पाते हुए उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है।
बरेली में फिर छापे मार सकती है एसआईटी
टपरी डिस्टिलरी के अलावा एसआईटी ने बरेली में हरुनगला के पास पकड़े गए शराब के ट्रक की विवेचना भी अपने हाथ में ले ली थी। एसआईटी टपरी डिस्टिलरी की विवेचना तो पूरी कर चुकी है, अब बरेली में शराब का ट्रक पकड़े जाने की विवेचना कर रही है। इसकी जांच पड़ताल के लिए एसआईटी की टीम दो-चार दिन में बरेली में छापेमारी कर सकती है।
एसआईटी को साल भर का ही डाटा मिल पाया, पुराना कर दिया डिलीट
जांच के दौरान एसआईटी को डिस्टिलरी से बरामद कंप्यूटर से एक साल का ही डाटा मिल सका। बताया जा रहा है कि पुराना डाटा आबकारी अफसरों की मदद से शराब माफिया ने डिलीट कर दिया। जो डाटा मिला उसके मुताबिक एक साल में टपरी डिस्टिलरी से 99 ट्रकों को बगैर गेटपास बाहर निकाला गया। डिस्टिलरी से एक गेटपास पर दो ट्रकों को बाहर निकालने का खेल चल रहा था। एक ट्रक में 15 सौ पेटी होती थीं। एक पेटी में 45 पौव्वे होते थे। इस तरह से साल में 66 लाख 82 हजार 500 पौव्वो को बगैर टैक्स दिए बेच दिया गया। इस तरह सरकार के 35 करोड़ से ज्यादा के टैक्स की चोरी की। चोरी किए गए टैक्स की रकम बरामद करने के लिए आरोपियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
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पिछले साल शासन को सहारनपुर की टपरी डिस्टिलरी में टैक्स चोरी कर शराब बाहर निकाले जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद शासन के निर्देश पर तीन मार्च को एसटीएफ ने टपरी डिस्टिलरी पर छापा मारा था। इस दौरान डिस्टिलरी से एक गेटपास पर दो ट्रकों बाहर निकाले जाने के बड़े खेल का खुलासा हुआ। अनुमान के तौर पर इस घोटाले में सौ करोड़ से ज्यादा टैक्स चोरी का दावा किया गया था। छापे के बाद डिस्टलरी को सीज कर दिया गया था।
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एसआईटी ने इस घोटाले की जांच शुरू की तो पता चला कि कानपुर और उन्नाव के शराब कारोबारी अजय जायसवाल के डिपो पर डिस्टिलरी से शराब भेजी गई है। एसटीएफ ने अजय जायसवाल के डिपो को भी सीज कर दिया था मगर इसके बाद भी 24 मार्च 2021 को बरेली में हरुनगला के पास शराब से भरा एक ट्रक पकड़ा गया। जांच में पता चला कि यह शराब टपरी डिस्टलरी से निकली थी जिसे एसटीएफ पहले ही सीज कर चुकी थी। शराब को बरेली में मनोज जायसवाल के गोदाम में उतारा जाना था।
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इसके बाद यह छानबीन शुरू हुई कि सीज होने के बावजूद टपरी डिस्टलरी से शराब कैसे निकली। बरेली में अजय के भाई मनोज जायसवाल का गोदाम भी सीज कर दिया गया। एसआईटी ने इस मामले की जांच के दौरान डिस्टिलरी के मालिक प्रणय अनेजा, शराब कारोबारी मनोज जायसवाल, उसके भाई अजय जायसवाल और उनके मैनेजर अशोक दीक्षित को गिरफ्तार किया। शराब माफिया से सांठगांठ कर सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने के आरोप में डिस्टिलरी में तैनात कई आबकारी अधिकारियों को भी जेल जाना पड़ा।
एसआईटी ने अब एक साल बाद इस मामले में विवेचना पूरी कर ली है। विवेचक मनोज तिवारी ने अजय, मनोज, प्रणय, अशोक समेत 25 लोगों को दोषी पाते हुए उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है।
बरेली में फिर छापे मार सकती है एसआईटी
टपरी डिस्टिलरी के अलावा एसआईटी ने बरेली में हरुनगला के पास पकड़े गए शराब के ट्रक की विवेचना भी अपने हाथ में ले ली थी। एसआईटी टपरी डिस्टिलरी की विवेचना तो पूरी कर चुकी है, अब बरेली में शराब का ट्रक पकड़े जाने की विवेचना कर रही है। इसकी जांच पड़ताल के लिए एसआईटी की टीम दो-चार दिन में बरेली में छापेमारी कर सकती है।
एसआईटी को साल भर का ही डाटा मिल पाया, पुराना कर दिया डिलीट
जांच के दौरान एसआईटी को डिस्टिलरी से बरामद कंप्यूटर से एक साल का ही डाटा मिल सका। बताया जा रहा है कि पुराना डाटा आबकारी अफसरों की मदद से शराब माफिया ने डिलीट कर दिया। जो डाटा मिला उसके मुताबिक एक साल में टपरी डिस्टिलरी से 99 ट्रकों को बगैर गेटपास बाहर निकाला गया। डिस्टिलरी से एक गेटपास पर दो ट्रकों को बाहर निकालने का खेल चल रहा था। एक ट्रक में 15 सौ पेटी होती थीं। एक पेटी में 45 पौव्वे होते थे। इस तरह से साल में 66 लाख 82 हजार 500 पौव्वो को बगैर टैक्स दिए बेच दिया गया। इस तरह सरकार के 35 करोड़ से ज्यादा के टैक्स की चोरी की। चोरी किए गए टैक्स की रकम बरामद करने के लिए आरोपियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं।