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Sawan 2025: सावन में मनोकामनाओं की सिद्धि के द्वार खोलता है चालीसा, एक हजार वर्षों से चली आ रही परंपरा

Mon, 14 Jul 2025 03:39 PM IST
मुकेश कुमार अश्विनी शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अश्विनी शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 14 Jul 2025 03:39 PM IST
सार

बरेली में सावन माह में चालीसा धार्मिक अनुष्ठान होता है। कैंट स्थित धोपेश्वरनाथ मंदिर में हजारों वर्षों से यह अनुष्ठान होता आ रहा है। जनप्रतिनिधि, व्यापारी समेत विभिन्न वर्गों के लोग इसमें शामिल होते हैं।

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Chalisa opens the doors to fulfillment of wishes in Sawan
गोपाल सिद्ध बाबा मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चालीसा ऐसा अनुष्ठान है जो शिव के सहकार से मनोकामनाओं की सिद्धि के द्वार खोलता है। एक हजार वर्षों से श्रद्धालु इस अनुष्ठान को पूरी श्रद्धा के साथ कर रहे हैं। मान्यताओं के मुताबिक, श्री धोपेश्वरनाथ मंदिर से इस अनुष्ठान की शुरुआत हुई थी। बरेली में आज भी सावन से 10 दिन पहले शुरू होने वाला यह विशेष अनुष्ठान पूर्णिमा को संपन्न होता है। इसके बाद श्रद्धालु बुखारा-फरीदपुर रोड पर सिद्ध गोपाल बाबा मंदिर में दर्शन करते हैं। तभी अनुष्ठान पूर्ण माना जाता है।

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कैंट स्थित धोपेश्वरनाथ मंदिर में हजारों वर्षों से यह अनुष्ठान होता आ रहा है। जनप्रतिनिधि, व्यापारी समेत विभिन्न वर्गों के लोग इसमें शामिल होते हैं। अब सभी नाथ मंदिरों में यह अनुष्ठान किया जाने लगा है। धोपेश्वर नाथ मंदिर परिसर स्थित ठाकुरद्वारा के पुजारी घनश्याम जोशी ने बताया कि चार से पांच हजार लोग आज भी चालीसा कर रहे हैं। अलखनाथ, त्रिवटीनाथ, वनखंडीनाथ, तपेश्वर नाथ समेत अन्य मंदिरों में श्रद्धालु इस अनुष्ठान को कर रहे हैं।
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चालीसा की विधि 
सावन के पहले दिन व इससे 10 दिन पहले या फिर सोमवार से इसका संकल्प लेकर पूजन किया जाता है। यह भादो तक भी चलता है। इसमें मुख्यत: भक्तों को जलाभिषेक और बेलपत्र चढ़ाना अनिवार्य होता है। अंतिम सोमवार को दर्शन कर प्रसाद चढ़ाकर उसका वितरण करना होता है।

Chalisa opens the doors to fulfillment of wishes in Sawan
शिवानंद गिरि - फोटो : अमर उजाला

बाढ़ के बीच गुजरे थे गोपाल बाबा
चालीसा पूर्ण कर शिवभक्त गोपाल सिद्ध बाबा मंदिर जाते हैं। धोपेश्वरनाथ मंदिर के महंत शिवानंद गिरि ने बताया कि जहां आज गोपाल सिद्ध बाबा का मंदिर है, वहां से कभी रामगंगा नदी गुजरती थी। वह प्रतिदिन धोपेश्वर नाथ मंदिर में रामगंगा के जल से अभिषेक करने के लिए आते थे। एक दिन जब वह रामगंगा में डुबकी लगाने के बाद बाहर आए तो बाढ़ आ गई थी। वह सावन का ही महीना था। 

वह बाढ़ के बीच ही मंदिर के लिए निकल पड़े। जब उन्होंने धोपेश्वर नाथ मंदिर में जलाभिषेक किया तो उनका शिव से साक्षात्कार हुआ। तब भोलेनाथ ने आशीर्वाद दिया कि जब भी सावन में भक्त मेरी पूजा करेंगे, तब उनकी मनोकामनाएं तुम्हारे द्वार पर आकर ही पूरी होंगी। आज भी सावन का अंतिम सोमवार गोपाल सिद्ध बाबा को समर्पित माना जाता है।

27 साल से सेवा कर रही व्यापार मंडल चालीसा कमेटी
धोपेश्वर नाथ मंदिर में सेवा करने के लिए व्यापार मंडल चालीसा कमेटी बनाई गई है। संयोजक राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि कमेटी 27 वर्षों से चालीसा करती आ रही है। इस बार इसमें 12 सदस्य हैं। अंतिम सोमवार को गोपाल सिद्ध बाबा मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद ही अनुष्ठान संपन्न होता है।

गोपाल सिद्ध बाबा मंदिर के महंत नारायण गिरि ने बताया कि गुरुजनों से हमने यहां की अद्भुत कथा का श्रवण किया है। बाबा श्री धोपेश्वर नाथ की कृपा से ही बाबा गोपाल सिद्ध हुए। सावन का अंतिम सोमवार यहां के लिए समर्पित है। बाबा के भक्त दूर-दूर से आकर यहां अपना चालीसा पूर्ण करते हैं।

राम वाटिका के रमेश चंद्र जायसवाल ने कहा कि 79 वर्षों से चालीसा करता आ रहा हूं। बचपन में जब हमारे बुजुर्ग चालीसा करने जाते थे तो मैं साथ हो लेता था। बाबा की कृपा हमारे परिवार पर बनी हुई है। 

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