Bareilly News: बर्ड फ्लू को लेकर केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान में सतर्कता, ढकवाए जा रहे जलस्रोत
बर्ड फ्लू को लेकर केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) बरेली में बचाव के प्रयास शुरू हो गए हैं। जलस्रोतों को ढकवाया जा रहा है।
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गोरखपुर में मृत बाघिन के शव में एवियन इन्फ्लूएंजा एच-5 वायरस (बर्ड फ्लू) की पुष्टि होने के बाद केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) बरेली में बचाव के प्रयास शुरू हो गए हैं। जलस्रोतों को ढकवाया जा रहा है। संस्थान निदेशक डॉ. अशोक कुमार तिवारी के मुताबिक, परिसर में पहले से ही बचाव के इंतजाम हैं, फिर भी अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं। बर्ड फ्लू से बचाव के लिए वर्ष 2021 में जारी एडवाइजरी का पालन किया जा रहा है।
प्रक्षेत्र फार्म में पहले से ही लोगों का प्रवेश वर्जित है। अब संस्थान में पशु-पक्षियों के लिए बने सभी जलस्रोतों व ऐसी जगहों को ढकवाया जा रहा है, जहां पानी भर सकता है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि आसमान में उड़ने वाले पक्षी पानी पीने के लिए परिसर में न उतरें। बर्ड फ्लू के प्रभावित पक्षी की बीट से वायरस के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। संस्थान में फार्म हाउस व प्रयोगात्मक बॉयलर प्रक्षेत्र के ऊपर रिफ्लेक्टर भी लगवाए हैं।
पैदल ही जाएंगे वैज्ञानिक और कर्मचारी
संस्थान के निदेशक ने सभी वाहनों को अनुसंधान परिसर से बाहर रखने के निर्देश दिए हैं। बेहद जरूरी होने पर वैज्ञानिक और कर्मचारी ही कुक्कुट प्रजातियों के लिए बने फार्म हाउस तक पैदल जा सकेंगे। सबसे अहम प्रयोगात्मक बॉयलर प्रक्षेत्र के प्रवेश द्वार पर पैदल जाने वालों के जूते भी रोगाणुमुक्त करने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए एक इंच गहरा वाटर सोर्स बना है, जिसमें केमिकल डाला गया है। अंदर जाने वाले वैज्ञानिक या कर्मचारी यहां से गुजरेंगे तो उनके जूतों से वायरस प्रवेश नहीं करेगा।
बर्ड फ्लू को लेकर डॉक्टरों को सतर्क रहने के निर्देश
गोरखपुर में बर्ड फ्लू से बाघिन की मौत के बाद पशुपालन विभाग ने अलर्ट जारी किया है। सभी पशु चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया है कि अगर कहीं से कोई सूचना मिले, तो तुरंत उसकी जानकारी दी जाए। फिलहाल, जिले में कोई पॉजिटिव केस सामने नहीं आया है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी मनमोहन पांडेय ने सभी क्षेत्रीय पशु चिकित्साधिकारियों से सतर्क रहने के लिए कहा है। क्षेत्र के किसी भी पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों के मरने की सूचना मिले, तो तुरंत उसकी सैंपलिंग और अन्य जरूरी औपचारिकताएं कराएं। उच्चाधिकारियों से भी इसकी जानकारी साझा करें।
हर माह लिए जाते हैं 20 सैंपल
पशुपालन विभाग की ओर हर माह अलग-अलग क्षेत्रों से 20 सैंपल लेकर जांच के लिए आईवीआरआई भेजे जाते हैं। अप्रैल में लिए गए सभी नमूनों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। इस माह भी सैंपल लिए जा रहे हैं। 30 जनवरी 2025 को हुई बैठक में ही इससे संबंधित कार्ययोजना बनाकर सिंचाई, स्वास्थ्य पर्यावरण, वन, पंचायती राज सहित विभिन्न विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।