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गोमाता कहने वालों ने छोड़ा, बेसहारा गायों की पालनहार बनीं मुस्लिम महिलाएं
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अस्थायी गौशालाओं से कमजोर और बीमार गायों को लेकर कर रहीं भरण पोषण
बरेली। योगी सरकार की महत्वपूर्ण पहल गौ संरक्षण के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी बढ़चढ़कर हिस्सेदारी शुरू कर दी है। सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि पचास से ज्यादा मुस्लिम महिलाओं ने बेसहारा और सड़कों पर अवारा घूम रही गायों के भरण पोषण का जिम्मा लेकर अब उनकी पालनहार बन गई हैं। मुस्लिम महिलाओं की इस पहल ने धर्म के नाम पर गायों को बांटने वाले समाज को करारा जवाब मिला है। साथ ही, मुख्यमंत्री के मकसद को भी सफल बनाने में अहम योगदान देने के लिए मुस्लिम वर्ग की प्रेरणास्रोत बनीं हैं।
पिछले दिनों योगी आदित्यनाथ ने सड़कों पर बेसहारा घूम रही कमजोर और बीमार गायों को संरक्षण के लिए सूबे के सभी जिलों में अस्थायी गौशालाओं का निर्माण कराया है। सीएम के आदेश पर बरेली में भी 144 अस्थायी गौशालाएं 15 ब्लॉकों में खोली गईं। इसमें करीब एक हजार गायें भी पकड़कर रखी गईं। इस आदेश के बाद फिर मुख्यमंत्री ने गायों को सुपुर्दगी करने का अभियान चलाने का निर्देश दिया। इसके तहत गायों को लेने वाले को प्रति गाय के पालन के लिए 30 रुपये का आर्थिक सहयोग देने को कहा। शुरुआत में कमजोर और बीमार गायों को सुपुर्दगी में अफसरों को भी काफी मशक्कत करनी पड़ीं। माहौल में बदलाव तब आया जब मुस्लिम महिलाओं ने बड़ी तादाद में गायों को पालने के लिए मांगा। एकबारगी विभाग और मुस्लिम महिलाओं के मोहल्लों में भी यह चर्चा का विषय बना लेकिन उनके सेवाभाव ने गौ को माता मानने वालों को भी हौंसला दिया। नतीजा यह रहा कि करीब तीन माह में अस्थायी गौशाआों की संख्या घटकर 21 बची और गायों की तादाद ढाई सौ ही रह गई है। वहीं, बड़ी तादाद में सुपुर्दगी में दी गायों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए सीडीओ ने पशु चिकित्साधिकारी को नियमित तौर पर गायों के इलाज और अन्य व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए हैं।
मुस्लिम महिलाओं से बातचीत:
गौ माता हैं उन्हें धर्म में बांटना गलत है
बिसौली के कसमूरा गांव की निवासी 60 वर्षीय शरीफन ने अस्थायी गौशाला से गाय और एक बछिया पालने के लिए ली है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी एक गाय पाली थी लेकिन बीमारी के चलते उसकी मौत हो गई। हालांकि, उसके जाने के बाद वह गाय को पालना चाहती थीं लेकिन रुपये न होने से वह गाय नहीं खरीद सकीं। उनकी मुराद सीएम योगी ने पूरी की। कहा, जब योजना के बारे में पता चला तो पशुचिकित्सा केंद्र पर संपर्क किया। वहां गायें देंखी और एक गाय समेत बछिया को पालने के लिए लिया। उन्होंने कहा कि गाय उनके लिए माता समान है। वह जब तक जिंदा रहेंगी, गाय की सेवा करेंगी। मजहब में गाय को बांटने वाले लोग मुसलमान नहीं हो सकते क्योंकि गाय माता है और माता का कोई मजहब नहीं होता।
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शुद्ध दूध के साथ गौमाता की दुआ भी
रसूला चौकी की रहने वाली नसीम बानो गाय को पिछले काफी दिनों से गाय को पाल रहीं थीं। पिछले वर्षों में गाय को लेकर मचे हो-हल्ले की वजह से जो गाय उनके पास भी वह भी उन्होंने घबरा कर छोड़ दी थी, लेकिन एक गाय पालने की उनकी मंशा थी, जो तमाम खौफ के बाद भी उन्होंने पूरी की। उन्होंने बताया कि गाय उनके परिवार में हमेशा पलती रही है। यह भी नहीं कि जब वह दूध देना छोड़ दे तो उसे छोड़ दिया जाय। जब तक गाय जिंदा रहती थी उसकी सेवा परिजन करते थे और फिर मरने पर उसे गाड़ भी देते थे। बताया कि जो गाय उन्हें मिली है वह काफी कमजोर है। लेकिन वह उसका भरण पोषण करेंगी और उससे मिलने वाले शुद्ध दूध को खुद और परिजन को पिलाएंगी, साथ ही, गौमाता की दुआएं भी लेंगी।
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बरेली। योगी सरकार की महत्वपूर्ण पहल गौ संरक्षण के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी बढ़चढ़कर हिस्सेदारी शुरू कर दी है। सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि पचास से ज्यादा मुस्लिम महिलाओं ने बेसहारा और सड़कों पर अवारा घूम रही गायों के भरण पोषण का जिम्मा लेकर अब उनकी पालनहार बन गई हैं। मुस्लिम महिलाओं की इस पहल ने धर्म के नाम पर गायों को बांटने वाले समाज को करारा जवाब मिला है। साथ ही, मुख्यमंत्री के मकसद को भी सफल बनाने में अहम योगदान देने के लिए मुस्लिम वर्ग की प्रेरणास्रोत बनीं हैं।
पिछले दिनों योगी आदित्यनाथ ने सड़कों पर बेसहारा घूम रही कमजोर और बीमार गायों को संरक्षण के लिए सूबे के सभी जिलों में अस्थायी गौशालाओं का निर्माण कराया है। सीएम के आदेश पर बरेली में भी 144 अस्थायी गौशालाएं 15 ब्लॉकों में खोली गईं। इसमें करीब एक हजार गायें भी पकड़कर रखी गईं। इस आदेश के बाद फिर मुख्यमंत्री ने गायों को सुपुर्दगी करने का अभियान चलाने का निर्देश दिया। इसके तहत गायों को लेने वाले को प्रति गाय के पालन के लिए 30 रुपये का आर्थिक सहयोग देने को कहा। शुरुआत में कमजोर और बीमार गायों को सुपुर्दगी में अफसरों को भी काफी मशक्कत करनी पड़ीं। माहौल में बदलाव तब आया जब मुस्लिम महिलाओं ने बड़ी तादाद में गायों को पालने के लिए मांगा। एकबारगी विभाग और मुस्लिम महिलाओं के मोहल्लों में भी यह चर्चा का विषय बना लेकिन उनके सेवाभाव ने गौ को माता मानने वालों को भी हौंसला दिया। नतीजा यह रहा कि करीब तीन माह में अस्थायी गौशाआों की संख्या घटकर 21 बची और गायों की तादाद ढाई सौ ही रह गई है। वहीं, बड़ी तादाद में सुपुर्दगी में दी गायों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए सीडीओ ने पशु चिकित्साधिकारी को नियमित तौर पर गायों के इलाज और अन्य व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए हैं।
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मुस्लिम महिलाओं से बातचीत:
गौ माता हैं उन्हें धर्म में बांटना गलत है
बिसौली के कसमूरा गांव की निवासी 60 वर्षीय शरीफन ने अस्थायी गौशाला से गाय और एक बछिया पालने के लिए ली है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी एक गाय पाली थी लेकिन बीमारी के चलते उसकी मौत हो गई। हालांकि, उसके जाने के बाद वह गाय को पालना चाहती थीं लेकिन रुपये न होने से वह गाय नहीं खरीद सकीं। उनकी मुराद सीएम योगी ने पूरी की। कहा, जब योजना के बारे में पता चला तो पशुचिकित्सा केंद्र पर संपर्क किया। वहां गायें देंखी और एक गाय समेत बछिया को पालने के लिए लिया। उन्होंने कहा कि गाय उनके लिए माता समान है। वह जब तक जिंदा रहेंगी, गाय की सेवा करेंगी। मजहब में गाय को बांटने वाले लोग मुसलमान नहीं हो सकते क्योंकि गाय माता है और माता का कोई मजहब नहीं होता।
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शुद्ध दूध के साथ गौमाता की दुआ भी
रसूला चौकी की रहने वाली नसीम बानो गाय को पिछले काफी दिनों से गाय को पाल रहीं थीं। पिछले वर्षों में गाय को लेकर मचे हो-हल्ले की वजह से जो गाय उनके पास भी वह भी उन्होंने घबरा कर छोड़ दी थी, लेकिन एक गाय पालने की उनकी मंशा थी, जो तमाम खौफ के बाद भी उन्होंने पूरी की। उन्होंने बताया कि गाय उनके परिवार में हमेशा पलती रही है। यह भी नहीं कि जब वह दूध देना छोड़ दे तो उसे छोड़ दिया जाय। जब तक गाय जिंदा रहती थी उसकी सेवा परिजन करते थे और फिर मरने पर उसे गाड़ भी देते थे। बताया कि जो गाय उन्हें मिली है वह काफी कमजोर है। लेकिन वह उसका भरण पोषण करेंगी और उससे मिलने वाले शुद्ध दूध को खुद और परिजन को पिलाएंगी, साथ ही, गौमाता की दुआएं भी लेंगी।