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सीबीएसई के नए फरमान से कॉलेजों में खलबली
बरेली।
Updated Sun, 26 Feb 2017 01:01 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्कूली बसों की सुरक्षा को लेकर फिर फरमान जारी किया है जिसने स्कूल संचालकों को कशमकश में डाल दिया है, क्योंकि अब स्कूली बसों में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) के साथ सीसीटीवी भी अनिवार्य रूप से लगाने होंगे। इस बाबत इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन ने अगले सप्ताह सभी स्कूलों की बैठक बुलाई, जिसमें सीबीएसई के नए आदेश को लेकर मंथन होगा।
स्कूल संचालकों की चिंताएं इसलिए और बढ़ गई हैं कि अगर स्कूली बसों से बच्चों को हानि पहुंचती है तो उसका जिम्मेदार स्कूल प्रबंधन होगा और स्कूल की संबद्धता भी समाप्त हो सकती है। हालांकि शहर के कुछ कांवेंट स्कूलों की बसों में जीपीएस की व्यवस्था पर अधिकतर स्कूल खटारा बसों पर ही निर्भर हैं।
इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष पारुष अरोड़ा का कहना है कि नए आदेश के अनुसार कई चीजों को बसों में जोड़ना होगा, जिससे खर्चे भी बढ़ेंगे। हालांकि इसको किस तरह से लागू कर सकते हैं इसलिए स्कूलों की बैठक बुलाई है। सीबीएसई के सिटी कोआर्डिनेटर रमेश धस्माना ने बताया कि अब नए आदेश के अनुसार बसों में जीपीएस के साथ सीसीटीवी लगाना अनिवार्य होगा और सुपरवाइजर के साथ एक महिला अटेंडेंट भी रखनी होगी। स्कूलों बसों को लेकर नए मानक जोड़े गए हैं जिनको लागू करना होगा।
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कुछ खास निर्देश
-बस में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम और सीसीटीवी प्रत्येक बस में लगाने होंगे।
- बस चालीस किमी प्रति घंटे से ज्यादा नहीं दौड़ा सकेंगे।
- बस में एक महिला अटेंडेंट भी होगी।
- बस का रंग पीला होगा और दोनों साइड में स्कूल का नाम लिखा होगा। बस स्कूल ड्यूटी पर है यह भी लि खना होगा।
- बस में आपातकालीन विंडो होगी और अग्निश्मन यंत्र लगाना अनिवार्य होगा।
- ड्राइवर की पूरी डिटेल लाइसेंस नंबर देना होगा। परिवहन विभाग का हेल्पलाइन नंबर पंजीकरण संख्या बस पर कंट्रास्ट कलर में लिखनी होगी।
- ड्राइवर को कम से कम पांच वर्ष का अनुभव अनिवार्य होगा। पुलिस से उसका सत्यापन भी कराना होगा।
- पैरमेंट्स मीटिंग में बसों की सुरक्षा का मुद्दा अनिवार्य रूप से रखा जाएगा।
- कुछ भी खामी हुई तो स्कूल प्रबंधक जिम्मेदार होगा। स्कूल की संबद्धता भी समाप्त हो सकती है।
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स्कूल संचालकों की चिंताएं इसलिए और बढ़ गई हैं कि अगर स्कूली बसों से बच्चों को हानि पहुंचती है तो उसका जिम्मेदार स्कूल प्रबंधन होगा और स्कूल की संबद्धता भी समाप्त हो सकती है। हालांकि शहर के कुछ कांवेंट स्कूलों की बसों में जीपीएस की व्यवस्था पर अधिकतर स्कूल खटारा बसों पर ही निर्भर हैं।
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इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष पारुष अरोड़ा का कहना है कि नए आदेश के अनुसार कई चीजों को बसों में जोड़ना होगा, जिससे खर्चे भी बढ़ेंगे। हालांकि इसको किस तरह से लागू कर सकते हैं इसलिए स्कूलों की बैठक बुलाई है। सीबीएसई के सिटी कोआर्डिनेटर रमेश धस्माना ने बताया कि अब नए आदेश के अनुसार बसों में जीपीएस के साथ सीसीटीवी लगाना अनिवार्य होगा और सुपरवाइजर के साथ एक महिला अटेंडेंट भी रखनी होगी। स्कूलों बसों को लेकर नए मानक जोड़े गए हैं जिनको लागू करना होगा।
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कुछ खास निर्देश
-बस में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम और सीसीटीवी प्रत्येक बस में लगाने होंगे।
- बस चालीस किमी प्रति घंटे से ज्यादा नहीं दौड़ा सकेंगे।
- बस में एक महिला अटेंडेंट भी होगी।
- बस का रंग पीला होगा और दोनों साइड में स्कूल का नाम लिखा होगा। बस स्कूल ड्यूटी पर है यह भी लि खना होगा।
- बस में आपातकालीन विंडो होगी और अग्निश्मन यंत्र लगाना अनिवार्य होगा।
- ड्राइवर की पूरी डिटेल लाइसेंस नंबर देना होगा। परिवहन विभाग का हेल्पलाइन नंबर पंजीकरण संख्या बस पर कंट्रास्ट कलर में लिखनी होगी।
- ड्राइवर को कम से कम पांच वर्ष का अनुभव अनिवार्य होगा। पुलिस से उसका सत्यापन भी कराना होगा।
- पैरमेंट्स मीटिंग में बसों की सुरक्षा का मुद्दा अनिवार्य रूप से रखा जाएगा।
- कुछ भी खामी हुई तो स्कूल प्रबंधक जिम्मेदार होगा। स्कूल की संबद्धता भी समाप्त हो सकती है।