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संघर्ष और हुनर से बने व्लॉगर्स, आज आसमान छू रहा कॅरिअर
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बरेली। सोशल मीडिया पर अब मनोरंजन और जानकारी का भंडार ही नहीं, बल्कि आमदनी का जरिया भी बन गया है। देश के युवा सोशल मीडिया से अच्छी खासी आय कर रहे हैं, इसमें शहर के युवा भी पीछे नहीं हैं। शहर के कई व्लॉगर्स हैं जो इस क्षेत्र में कॅरिअर बना रहे हैं। हालांकि शुरुआती दौर में उन्हें परिवार के विरोध का सामना भी करना पड़ा। बावजूद इसके उन्होंने अपना जज्बा कम नहीं होने दिया और संघर्ष करते रहे। आज उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिये ठीकठाक आमदनी कर रहे हैं। इन्हीं की कहानी जानने के लिए रविवार को अमर उजाला कार्यालय में संवाद आयोजित किया गया। उनका कहना है कि व्लॉगिंग आसान नहीं है, इसके लिए संघर्ष चाहिए। लोगों की नब्ज को टटोलना और उन्हीं के मुताबिक वीडियो बनाना कठिन काम है पर असंभव कुछ नहीं। इस क्षेत्र में अन्य युवा भी अपना कॅरिअर बना सकते हैं। बशर्ते वह कंटेंट पर काम करें।
एडिटिंग का शौक ले आया व्लॉगिंग तक
18 वर्षीय करन सिंह को बचपन से एडिटिंग का शौक था। वह अपने दोस्त के लिए वीडियो और फोटो एडिट करते रहते थे। फिल्मी सितारों से प्रेरित होकर वह फैशन में काफी रुचि रखने लगे। चार साल पहले उन्होंने सोचा कि क्यों न इन दोनों शौक को मिलाकर इंस्टाग्राम पर पेज बनाया जाए। इसके बाद काम शुरू किया लेकिन पेज को चलाना इतना आसान नहीं था। लोगों ने इसे सही नहीं बताया लेकिन वह इस काम में जुटे रहे। आज उनके 38 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और पूरा शहर उनको लाइफस्टाइल व्लॉगर के नाम से जानता है।
इंटीरियर डिजाइनिंग करते-करते बन गई फूड व्लॉगर
सिंधूनगर की रहने वाली हिमांशी देवनानी तो दिल्ली में इंटीरियर डिजाइनर की पढ़ाई कर रहीं थीं मगर कोेरोना ने उनको वापस बरेली आने पर मजबूर कर दिया। घूमने का शौक रखने वाली हिमांशी जब घर में रहकर परेशान हो गईं तो उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना एक पेज शुरू किया। वह अपने दोस्तों की मदद से जगह-जगह गईं और वहां के खाने के रिव्यू अपने पेज पर डालना शुरू किए। देखते ही देखते उनको लोग जानने और पसंद करने लगे। अब वह इसे कॅरिअर के रूप में देख रही हैं। साथ ही पढ़ाई भी कर रही हैं।
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डांसर महिमा ने भाई के साथ शुरू की व्लॉगिंग
22 वर्षीय महिमा शर्मा को डांस करने का शौक था। वह हमेशा से अपने डांस की वीडियो यूट्यूब पर डालती थीं। एक दिन अचानक से उनकी सभी वीडियो चैनल से गायब हो गईं। इसके बाद उनका मनोबल टूट गया। उन्होंने सोशल मीडिया भी बंद कर दिया। इसके बाद उनके भाई ने इंस्टाग्राम पर फूड पेज शुरू किया। दोनों ने साथ मिलकर जगह-जगह के खाने के जायका लोगों तक पहुंचाया। लोगों का फीडबैक आना शुरू हुआ। आज उनके पेज को आठ हजार लोग पसंद कर रहे हैं।
19 वर्षीय स्वाती देवनानी ने कक्षा 9वीं में फूड व्लॉगिंग की शुरूआत की। 10वीं की पढ़ाई के कारण वह अपने सोशल मीडिया पेज को ज्यादा नहीं चला सकीं। कोरोना में घर से बाहर न जा पाने के कारण फॉलोअर्स घटने लगे, फिर उन्होंने ऑनलाइन वीडियो बनाना सीखा। लोगों की मदद ली। अपनी जेब से पैसे खर्च करके दोबारा से पेज को शुरू किया। उनके रिश्तेदार उनके काम को पैसे की बर्बादी समझते हैं। साथ ही उन्हें कई बार आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ता है। वह अपनी कामयाबी का श्रेय अपने भाई को देती हैं।
नौकरी के साथ-साथ व्लॉगिंग का शौक
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से गोल्ड मेडल प्राप्त कर चुकीं शिवानी वैश्य दिल्ली में नौकरी कर रही थीं। कोरोना में वह बरेली पहुंच गईं और वर्क फ्रॉम होम कर रही थीं। एक दोस्त ने सलाह दी की मनोरंजन के लिए वह व्लॉगिंग शुरू कर दें। उन्होंने शौक में अप्रैल 2020 को अपना पहला पोस्ट डाला। पहले ही पोस्ट को एक दिन में हजारों लोगों ने देखा और पसंद किया। उसके बाद शिवानी सप्ताह में पांच दिन नौकरी कर रही हैं और दो दिन व्लॉगिंग को दे रही हैं। वह फूड व्लॉगिंग करती हैं। वह अपनी रेसिपी भी लोगों को परोस रह हैं।
जॉब छोड़कर बनी फुल टाइम व्लॉगर
आशापुरम की रहने वाली तान्या जौैहरी ने दो साल पहले अपना पेज सोशल मीडिया पर शुरू किया था। उस समय उनके 500 फॉलोअर्स थे। वह दिल्ली में एक सामान्य कंपनी में नौकरी करती थीं और उसी के साथ लाइफस्टाइल से जुड़ीं। कुछ वीडियो भी बनाती थीं। कोरोना के बाद बरेली आने पर अचानक से उन्हें एक कंपनी की ओर से विज्ञापन में जगह दी गई, इसके बाद तान्या को लोग जानने लगे। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और इसी पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया। आज उनके 25 हजार से अधिक फालोअर्स हैं।
मध्यम परिवार की लड़की भी देख सकती है सपने
एक मध्यम परिवार की रहने वाली रोली आर्या को बचपन से ही दादी-नानी के नुस्खे पसंद थे। वह हमेशा त्वचा को निखारने के लिए घर में उपलब्ध सामग्री से उबटन बनाती थीं। इसी शौक को सोशल मीडिया के जरिये लोगों तक पहुंचाने की योजना बनाई लेकिन करीबी लोग योजना को पसंद नहीं कर रहे थे, फिर उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू कर दी और नौकरी भी की। इसी के साथ सोशल मीडिया पर पेज बनाया। कंटेंट पर काम किया। ब्यूटी प्रोडक्ट को आगे बढ़ाया। 10 हजार से अधिक फालोअर्स हुए तो यह शौक उनका रोजगार में बदल गया।
दूसरों के अकाउंट संभालते हुए बनाया खुद का पेज
नोएडा के रहने वाले मोहित चौधरी को छोटी उम्र में ही बरेली आना पड़ा। उन्हें शरारत के कारण स्कूल से निकाल दिया गया। एक दिन उन्हें किसी व्लॉगर ने अपने अकाउंट के लाइक और कॉमेंट चेक करने का काम दिया, जिसके बाद मोहित लोगों के इंस्टाग्राम पेज संभालने लगे। चार साल पहले उन्होंने अपना खुद का पेज बनाया। कुछ दिन में ही उनके पास कंपनियों के साथ काम करने के ऑफर आने शुरू कर दिए। आज मोहित को साढ़े 16 हजार से भी अधिक लोग फॉलो करते हैं।
समाज की एक दिन बदलेगी सोच
पढ़ाई खत्म होते ही गोल्डी खनूजा की शादी हो गई थी। 18 साल पहले उन्होंने डांस का सपना देखा था। वर्ष 2018 में अपनी बेटी के कहने पर टिकटॉक पर वीडियो डालनी शुरू की। देखते ही देखते उन्हें लाखों लोग देखने लगे। फिर टिकटॉक बंद हो गया। इसके बाद इंस्टाग्राम पर आ गईं। आज उन्हें 10 हजार से भी ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। उनका कहना है कि समाज इस कार्य को पसंद नहीं कर रहा है लेकिन एक दिन समाज की सोच बदलेगी।
2.50 लाख फालोअर्स हैं रुचि साहनी के
दिल्ली की रहने वाली रुचि साहनी शादी के बाद बरेली आ गईं। छोटे शहर के माहौल में ढलना उनके लिए काफी मुश्किल था। दो साल पहले जब लॉकडाउन लगा तो रुचि की बेटी ने चुपके से उनका अकाउंट बना दिया। उनकी पहली वीडियो को ही ढेर सारे लोगों ने सराहा। वह अपने बेटे के साथ टिकटॉक पर अम्मू और उसकी मम्मा के नाम से प्रसिद्ध हो गईं। टिक टॉक के बैन होने के बाद इंस्टाग्राम पर शुरूआत की। शुरू में पांच हजार फॉलोअर्स थे लेकिन आज 2.50 लाख से अधिक फालोअर्स हैं। - रुचि साहनी
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एडिटिंग का शौक ले आया व्लॉगिंग तक
18 वर्षीय करन सिंह को बचपन से एडिटिंग का शौक था। वह अपने दोस्त के लिए वीडियो और फोटो एडिट करते रहते थे। फिल्मी सितारों से प्रेरित होकर वह फैशन में काफी रुचि रखने लगे। चार साल पहले उन्होंने सोचा कि क्यों न इन दोनों शौक को मिलाकर इंस्टाग्राम पर पेज बनाया जाए। इसके बाद काम शुरू किया लेकिन पेज को चलाना इतना आसान नहीं था। लोगों ने इसे सही नहीं बताया लेकिन वह इस काम में जुटे रहे। आज उनके 38 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और पूरा शहर उनको लाइफस्टाइल व्लॉगर के नाम से जानता है।
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इंटीरियर डिजाइनिंग करते-करते बन गई फूड व्लॉगर
सिंधूनगर की रहने वाली हिमांशी देवनानी तो दिल्ली में इंटीरियर डिजाइनर की पढ़ाई कर रहीं थीं मगर कोेरोना ने उनको वापस बरेली आने पर मजबूर कर दिया। घूमने का शौक रखने वाली हिमांशी जब घर में रहकर परेशान हो गईं तो उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना एक पेज शुरू किया। वह अपने दोस्तों की मदद से जगह-जगह गईं और वहां के खाने के रिव्यू अपने पेज पर डालना शुरू किए। देखते ही देखते उनको लोग जानने और पसंद करने लगे। अब वह इसे कॅरिअर के रूप में देख रही हैं। साथ ही पढ़ाई भी कर रही हैं।
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डांसर महिमा ने भाई के साथ शुरू की व्लॉगिंग
22 वर्षीय महिमा शर्मा को डांस करने का शौक था। वह हमेशा से अपने डांस की वीडियो यूट्यूब पर डालती थीं। एक दिन अचानक से उनकी सभी वीडियो चैनल से गायब हो गईं। इसके बाद उनका मनोबल टूट गया। उन्होंने सोशल मीडिया भी बंद कर दिया। इसके बाद उनके भाई ने इंस्टाग्राम पर फूड पेज शुरू किया। दोनों ने साथ मिलकर जगह-जगह के खाने के जायका लोगों तक पहुंचाया। लोगों का फीडबैक आना शुरू हुआ। आज उनके पेज को आठ हजार लोग पसंद कर रहे हैं।
19 वर्षीय स्वाती देवनानी ने कक्षा 9वीं में फूड व्लॉगिंग की शुरूआत की। 10वीं की पढ़ाई के कारण वह अपने सोशल मीडिया पेज को ज्यादा नहीं चला सकीं। कोरोना में घर से बाहर न जा पाने के कारण फॉलोअर्स घटने लगे, फिर उन्होंने ऑनलाइन वीडियो बनाना सीखा। लोगों की मदद ली। अपनी जेब से पैसे खर्च करके दोबारा से पेज को शुरू किया। उनके रिश्तेदार उनके काम को पैसे की बर्बादी समझते हैं। साथ ही उन्हें कई बार आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ता है। वह अपनी कामयाबी का श्रेय अपने भाई को देती हैं।
नौकरी के साथ-साथ व्लॉगिंग का शौक
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से गोल्ड मेडल प्राप्त कर चुकीं शिवानी वैश्य दिल्ली में नौकरी कर रही थीं। कोरोना में वह बरेली पहुंच गईं और वर्क फ्रॉम होम कर रही थीं। एक दोस्त ने सलाह दी की मनोरंजन के लिए वह व्लॉगिंग शुरू कर दें। उन्होंने शौक में अप्रैल 2020 को अपना पहला पोस्ट डाला। पहले ही पोस्ट को एक दिन में हजारों लोगों ने देखा और पसंद किया। उसके बाद शिवानी सप्ताह में पांच दिन नौकरी कर रही हैं और दो दिन व्लॉगिंग को दे रही हैं। वह फूड व्लॉगिंग करती हैं। वह अपनी रेसिपी भी लोगों को परोस रह हैं।
जॉब छोड़कर बनी फुल टाइम व्लॉगर
आशापुरम की रहने वाली तान्या जौैहरी ने दो साल पहले अपना पेज सोशल मीडिया पर शुरू किया था। उस समय उनके 500 फॉलोअर्स थे। वह दिल्ली में एक सामान्य कंपनी में नौकरी करती थीं और उसी के साथ लाइफस्टाइल से जुड़ीं। कुछ वीडियो भी बनाती थीं। कोरोना के बाद बरेली आने पर अचानक से उन्हें एक कंपनी की ओर से विज्ञापन में जगह दी गई, इसके बाद तान्या को लोग जानने लगे। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और इसी पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया। आज उनके 25 हजार से अधिक फालोअर्स हैं।
मध्यम परिवार की लड़की भी देख सकती है सपने
एक मध्यम परिवार की रहने वाली रोली आर्या को बचपन से ही दादी-नानी के नुस्खे पसंद थे। वह हमेशा त्वचा को निखारने के लिए घर में उपलब्ध सामग्री से उबटन बनाती थीं। इसी शौक को सोशल मीडिया के जरिये लोगों तक पहुंचाने की योजना बनाई लेकिन करीबी लोग योजना को पसंद नहीं कर रहे थे, फिर उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू कर दी और नौकरी भी की। इसी के साथ सोशल मीडिया पर पेज बनाया। कंटेंट पर काम किया। ब्यूटी प्रोडक्ट को आगे बढ़ाया। 10 हजार से अधिक फालोअर्स हुए तो यह शौक उनका रोजगार में बदल गया।
दूसरों के अकाउंट संभालते हुए बनाया खुद का पेज
नोएडा के रहने वाले मोहित चौधरी को छोटी उम्र में ही बरेली आना पड़ा। उन्हें शरारत के कारण स्कूल से निकाल दिया गया। एक दिन उन्हें किसी व्लॉगर ने अपने अकाउंट के लाइक और कॉमेंट चेक करने का काम दिया, जिसके बाद मोहित लोगों के इंस्टाग्राम पेज संभालने लगे। चार साल पहले उन्होंने अपना खुद का पेज बनाया। कुछ दिन में ही उनके पास कंपनियों के साथ काम करने के ऑफर आने शुरू कर दिए। आज मोहित को साढ़े 16 हजार से भी अधिक लोग फॉलो करते हैं।
समाज की एक दिन बदलेगी सोच
पढ़ाई खत्म होते ही गोल्डी खनूजा की शादी हो गई थी। 18 साल पहले उन्होंने डांस का सपना देखा था। वर्ष 2018 में अपनी बेटी के कहने पर टिकटॉक पर वीडियो डालनी शुरू की। देखते ही देखते उन्हें लाखों लोग देखने लगे। फिर टिकटॉक बंद हो गया। इसके बाद इंस्टाग्राम पर आ गईं। आज उन्हें 10 हजार से भी ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। उनका कहना है कि समाज इस कार्य को पसंद नहीं कर रहा है लेकिन एक दिन समाज की सोच बदलेगी।
2.50 लाख फालोअर्स हैं रुचि साहनी के
दिल्ली की रहने वाली रुचि साहनी शादी के बाद बरेली आ गईं। छोटे शहर के माहौल में ढलना उनके लिए काफी मुश्किल था। दो साल पहले जब लॉकडाउन लगा तो रुचि की बेटी ने चुपके से उनका अकाउंट बना दिया। उनकी पहली वीडियो को ही ढेर सारे लोगों ने सराहा। वह अपने बेटे के साथ टिकटॉक पर अम्मू और उसकी मम्मा के नाम से प्रसिद्ध हो गईं। टिक टॉक के बैन होने के बाद इंस्टाग्राम पर शुरूआत की। शुरू में पांच हजार फॉलोअर्स थे लेकिन आज 2.50 लाख से अधिक फालोअर्स हैं। - रुचि साहनी