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चुनावी चकल्लस: 'नेताजी पांच साल तो दिखाई नहीं देते, अब चुनाव के वक्त कर रहे जनता की परिक्रमा'

Tue, 02 May 2023 10:45 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 02 May 2023 10:45 AM IST
सार

मतदाता कहते हैं कि नेताजी पांच साल तो दिखाई नहीं देते हैं। जब हमें जरूरत होती है तो ये मिलते नहीं हैं। इनके कार्यालय से लेकर घर तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। अब सुबह आंख नहीं खुल पाती है, उससे पहले ही घर आ धमकते हैं।

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Candidates are making many promises to the voters for votes in Bareilly
चाय पर चुनावी चर्चा करते लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली में मतदाताओं के दरवाजे पर आजकल सुबह सात बजे से नेताजी समर्थकों के साथ पहुंच रहे हैं। अबकी वोर्ट सिर्फ हमें ही देना, शहर का भला हम ही कर सकते हैं। तुम्हारी हर परेशानी, सुख-दुख में खड़े हुए और आगे भी खड़े होंगे, बस हमारा ध्यान रखना। ये बोल मेयर, पार्षदी का चुनाव लड़ने वाले नेताओं के हैं। मतदाता भी आजकल शहर के चौराहों, चाय की दुकानों पर यही सब चर्चा करते हैं।

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मतदाता कहते हैं कि नेताजी पांच साल तो दिखाई नहीं देते हैं। जब हमें जरूरत होती है तो ये मिलते नहीं हैं। इनके कार्यालय से लेकर घर तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। अब सुबह आंख नहीं खुल पाती है, उससे पहले ही घर आ धमकते हैं। सिविल लाइंस स्थित चाय की दुकान पर अनूप सक्सेना कहते हैं कि अब तो शहर के लोग ही नेताओं के लिए मसीहा है। जब तक मतदान नहीं हो जाएगा, तब तक इनकी गणेश परिक्रमा जारी रहेगी। 

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प्रत्याशी कर रहे मोहल्लों को निरीक्षण 

अजय मोहन शर्मा व अरुण थामस कहते हैं कि सुबह होते ही प्रत्याशी मोहल्ले का निरीक्षण करने लगते हैं। यहीं चाय पी रहे अनुज मिश्रा व अनिल कुमार गुप्ता कहते हैं कि इस समय कहीं नाली टूट जाए तो प्रत्याशियों में बनवाने की होड़ मच जाती है। प्रत्याशी तत्काल खुद के पैसों से काम करा दे रहे हैं। 

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अन्नू वाल्मीकि और विनीत गोस्वामी बताते हैं कि इस समय लोगों की दिक्कतें जल्दी सुलझ रही हैं। मोहल्ले में कोई बीमार हो जाए और प्रत्याशी को पता चल जाए तो सुबह सबसे पहले वहीं पहुंचते हैं। उन्हें डॉक्टरों के नाम सुझाएंगे, खुद बात कराएंगे और अपनी गाड़ी से अस्पताल तक पहुंचाएंगे। हर तरह की मदद को तैयार है।

कुछ वोटर भविष्यवक्ता भी

चुनावी चकल्लस में कई ऐसे लोग भी शामिल होते हैं कि जो चुनाव की भविष्यवाणी भी करते हैं और रणनीति भी बताते हैं। कौन प्रत्याशी जीतेगा और कौन हारेगाए हारेगा तो क्यों हारेगा और जीत क्यों रहा है। इन सभी के तर्क भी बिंदुवार दिए जाते हैं। राकेश कुमार कहते हैं कि आजकल जो भी आता है शहर के चुनाव पर बात करता है। हालांकिए सब बातें हंसी9मजाक में ही होती हैं। अंत में सब यही कहते हैं कि कोई जीते हमें क्या, हमें तो अपनी यही नौकरी, दिहाड़ी मजदूरी करनी है।

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