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पाकिस्तानी कनेक्शन के शक में रिश्तेदार-परिचित भी रडार पर
सार
फर्जी दस्तावेज और बदले नाम के साथ अग्निवीर भर्ती में शामिल होने आए आगरा के अरुन खां का पाकिस्तान कनेक्शन होने की अभी पुष्टि तो नहीं हुई है लेकिन आर्मी इंटेलिजेंस गंभीरता से इसकी जांच कर रही है।अरुन खां और दूसरा आरोपी फाल सिंह दोनों एक ही गांव के पड़ोसी और गहरे दोस्त हैं।
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विस्तार
बरेली। फर्जी दस्तावेज और बदले नाम के साथ अग्निवीर भर्ती में शामिल होने आए आगरा के अरुन खां का पाकिस्तान कनेक्शन होने की अभी पुष्टि तो नहीं हुई है लेकिन आर्मी इंटेलिजेंस गंभीरता से इसकी जांच कर रही है। उसके अकाउंट के साथ कॉल डिटेल रिकॉर्ड की भी बेहद गंभीरता से जांच की जा रही है। उसके रिश्तेदारों और परिचितों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
अरुन खां और दूसरा आरोपी फाल सिंह दोनों एक ही गांव के पड़ोसी और गहरे दोस्त हैं। अरुन के पास से आर्मी इंटेलिजेंस ने अलग-अलग नाम के कई ऐसे प्रपत्र बरामद किए हैं जो उसका पाकिस्तान से कनेक्शन होने के शक की वजह हैं। दोनों आरोपियों के साथ आर्मी इंटेलिजेंस ने उनके रिश्तेदारों का भी कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकलवाया है। अरुन खां के रिश्तेदारों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए अलग से एक टीम भी लगाई गई है।
शक की एक वजह यह भी है कि आरोपी अरुन खां मुस्लिम समुदाय का है और उसे यह भी पता है कि जाट रेजिमेंट में मुस्लिम समुदाय के लोगों की भर्ती नहीं होती। इसके बावजूद उसने एक बार नहीं बल्कि दो बार बदले नामों से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर सेना में भर्ती होने की कोशिश की।
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एडमिट कार्ड पर आमिर खां, मार्कशीट पर अरुन
अरुन खां के पास से उसके हाईस्कूल के प्रपत्रों के साथ एडमिट कार्ड भी बरामद हुआ है। एडमिट कार्ड में उसके फोटो के साथ आमिर खां नाम लिखा हुआ है। स्कूल और परीक्षा केंद्र हाथरस का है। अंकपत्र अरुन के नाम से ही है लेकिन एडमिट कार्ड और अंक पत्र पर रोल नंबर भी अलग-अलग हैं।
बायोमेट्रिक में खुली पोल, पिछले साल भी फर्जी नाम से दी थी भर्ती परीक्षा
अरुन खां और फाल सिंह ने 2021 में भी भर्ती परीक्षा दी थी। तब भी उन्होंने फर्जी प्रमाण पत्र जमा किए थे और बायोमेट्रिक भी कराया था। इस बार 12 सितंबर को शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया में आर्मी इंटेलिजेंस के अधिकारियों को शुरू से ही अरुन और फाल सिंह पर शक था। दोनों की बायोमेट्रिक जांच के दौरान उनकी पिछली साल दी भर्ती प्रक्रिया के प्रपत्र सामने आ गए तो इसकी पुष्टि हो गई। इसके बाद आर्मी इंटेलिजेंस ने दोनों से सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने सच उगल दिया।
आगरा में ही बनवाए थे फर्जी प्रमाण पत्र
आरोपियों ने पुलिस और इंटेलिजेंस को बताया है कि उन्होंने पैसे देकर आगरा से ही फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए थे। हालांकि पुलिस और इंटेलिजेंस ने फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले मास्टरमाइंड का नाम नहीं खोला है। आर्मी इंटेलिजेंस ने आगरा यूनिट को इसकी जानकारी दे दी है। जल्द उसकी भी गिरफ्तारी हो सकती है।
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अरुन खां और दूसरा आरोपी फाल सिंह दोनों एक ही गांव के पड़ोसी और गहरे दोस्त हैं। अरुन के पास से आर्मी इंटेलिजेंस ने अलग-अलग नाम के कई ऐसे प्रपत्र बरामद किए हैं जो उसका पाकिस्तान से कनेक्शन होने के शक की वजह हैं। दोनों आरोपियों के साथ आर्मी इंटेलिजेंस ने उनके रिश्तेदारों का भी कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकलवाया है। अरुन खां के रिश्तेदारों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए अलग से एक टीम भी लगाई गई है।
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शक की एक वजह यह भी है कि आरोपी अरुन खां मुस्लिम समुदाय का है और उसे यह भी पता है कि जाट रेजिमेंट में मुस्लिम समुदाय के लोगों की भर्ती नहीं होती। इसके बावजूद उसने एक बार नहीं बल्कि दो बार बदले नामों से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर सेना में भर्ती होने की कोशिश की।
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एडमिट कार्ड पर आमिर खां, मार्कशीट पर अरुन
अरुन खां के पास से उसके हाईस्कूल के प्रपत्रों के साथ एडमिट कार्ड भी बरामद हुआ है। एडमिट कार्ड में उसके फोटो के साथ आमिर खां नाम लिखा हुआ है। स्कूल और परीक्षा केंद्र हाथरस का है। अंकपत्र अरुन के नाम से ही है लेकिन एडमिट कार्ड और अंक पत्र पर रोल नंबर भी अलग-अलग हैं।
बायोमेट्रिक में खुली पोल, पिछले साल भी फर्जी नाम से दी थी भर्ती परीक्षा
अरुन खां और फाल सिंह ने 2021 में भी भर्ती परीक्षा दी थी। तब भी उन्होंने फर्जी प्रमाण पत्र जमा किए थे और बायोमेट्रिक भी कराया था। इस बार 12 सितंबर को शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया में आर्मी इंटेलिजेंस के अधिकारियों को शुरू से ही अरुन और फाल सिंह पर शक था। दोनों की बायोमेट्रिक जांच के दौरान उनकी पिछली साल दी भर्ती प्रक्रिया के प्रपत्र सामने आ गए तो इसकी पुष्टि हो गई। इसके बाद आर्मी इंटेलिजेंस ने दोनों से सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने सच उगल दिया।
आगरा में ही बनवाए थे फर्जी प्रमाण पत्र
आरोपियों ने पुलिस और इंटेलिजेंस को बताया है कि उन्होंने पैसे देकर आगरा से ही फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए थे। हालांकि पुलिस और इंटेलिजेंस ने फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले मास्टरमाइंड का नाम नहीं खोला है। आर्मी इंटेलिजेंस ने आगरा यूनिट को इसकी जानकारी दे दी है। जल्द उसकी भी गिरफ्तारी हो सकती है।