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कोरोना के बहाने बाजार बंद कराने की मुहिम ठंडी
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श्यामगंज बाजार में लगी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
न सियासी मदद मिली न प्रशासनिक, बंदी का एलान वापस लेने के बाद बाजार में राहत का माहौल
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बरेली। चारों तरफ से घिरने और अपने ही लोगों के कदम खींच लेने के बाद संयुक्त व्यापार मंडल की ओर से सोमवार को 15 दिन के लिए बाजार बंद करने का अपना आह्वान वापस ले लिया। दरअसल बाजार में सघन संपर्क के बावजूद संयुक्त व्यापार मंडल को बंद की मुहिम पर खास समर्थन नहीं मिल पाया। सपा से जुड़ा संगठन होने का आरोप लगा तो सियासी मदद लेने की कोशिश भी नाकाम हो गई। प्रशासन ने पहले ही पल्ला झाड़ लिया था। आखिरकार मेयर की बाजार बंद न कराने की अपील के बहाने व्यापारी नेता पीछे हट गए। इसके बाद कई दिन से बाजार में बना उहापोह का माहौल भी सामान्य हो गया।
संयुक्त व्यापार मंडल के नेताओं ने करीब चार दिन पहले कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को मुद्दा बनाकर सात जुलाई से 15 दिन के लिए बाजार बंद कराने की मुहिम शुरू की थी। उद्योग व्यापार मंडल के नेता इसके विरोध में खड़े हुए तो यह मुद्दा जोर-आजमाइश का बहाना बन गया। इस बीच संयुक्त व्यापार मंडल के नेताओं ने बाजार में संपर्क अभियान भी शुरू कर दिया लेकिन ज्यादातर व्यापारियों ने उनकी मुहिम से इत्तफाक नहीं जताया। खुद संयुक्त व्यापार मंडल में शामिल घटक संगठनों ने भी किनारा करना शुरू दिया। भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष ऋतुराज बास ने ही सबसे पहले इस मुहिम से अपने संगठन के अलग होने की घोषणा कर दी। इसके बाद रुहेलखंड व्यापार मंडल ने भी असहमति जता दी।
इस बीच संयुक्त व्यापार मंडल के नेताओं पर सपा से जुड़े होने का आरोप भी लगा। उनके पैड को इसका प्रमाण बताया गया। हालांकि इसके बावजूद मदद मांगने के लिए संयुक्त व्यापार मंडल के नेता रविवार शाम केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार से मिलने पहुंचे। बंद का विरोध करने वाले भी केंद्रीय मंत्री से मिले। संतोष गंगवार ने यह कहने के बाद कि जबरदस्ती बाजार बंद नहीं कराया जा सकता। अगर कोई दुकानदार अपनी दुकान बंद करना चाहता है तो ठीक है लेकिन इसके लिए माहौल न बनाया जाए। संतोष ने डीएम को भी बाजार में दहशत का माहौल न बनने देने के निर्देश दिए। चूंकि आम व्यापारी पहले से इस मुहिम का विरोध कर रहे थे लिहाजा संयुक्त व्यापार मंडल ने सोमवार दोपहर मेयर उमेश गौतम की अपील के बहाने बाजार बंदी का आह्वान वापस लेने की घोषणा कर दी।
संयुक्त व्यापार मंडल के नेताओं ने करीब चार दिन पहले कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को मुद्दा बनाकर सात जुलाई से 15 दिन के लिए बाजार बंद कराने की मुहिम शुरू की थी। उद्योग व्यापार मंडल के नेता इसके विरोध में खड़े हुए तो यह मुद्दा जोर-आजमाइश का बहाना बन गया। इस बीच संयुक्त व्यापार मंडल के नेताओं ने बाजार में संपर्क अभियान भी शुरू कर दिया लेकिन ज्यादातर व्यापारियों ने उनकी मुहिम से इत्तफाक नहीं जताया। खुद संयुक्त व्यापार मंडल में शामिल घटक संगठनों ने भी किनारा करना शुरू दिया। भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष ऋतुराज बास ने ही सबसे पहले इस मुहिम से अपने संगठन के अलग होने की घोषणा कर दी। इसके बाद रुहेलखंड व्यापार मंडल ने भी असहमति जता दी।
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इस बीच संयुक्त व्यापार मंडल के नेताओं पर सपा से जुड़े होने का आरोप भी लगा। उनके पैड को इसका प्रमाण बताया गया। हालांकि इसके बावजूद मदद मांगने के लिए संयुक्त व्यापार मंडल के नेता रविवार शाम केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार से मिलने पहुंचे। बंद का विरोध करने वाले भी केंद्रीय मंत्री से मिले। संतोष गंगवार ने यह कहने के बाद कि जबरदस्ती बाजार बंद नहीं कराया जा सकता। अगर कोई दुकानदार अपनी दुकान बंद करना चाहता है तो ठीक है लेकिन इसके लिए माहौल न बनाया जाए। संतोष ने डीएम को भी बाजार में दहशत का माहौल न बनने देने के निर्देश दिए। चूंकि आम व्यापारी पहले से इस मुहिम का विरोध कर रहे थे लिहाजा संयुक्त व्यापार मंडल ने सोमवार दोपहर मेयर उमेश गौतम की अपील के बहाने बाजार बंदी का आह्वान वापस लेने की घोषणा कर दी।
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