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कारोबारियों को तो मिल गई राहत.. किसानों के हाथ आई मायूसी

Sun, 01 Nov 2020 02:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 01 Nov 2020 02:00 AM IST
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Businessmen got relief .. Disappointment of farmers
demo photo - फोटो : demo photo

मोरेटोरियम अवधि में ऋण पर ब्याज पर ब्याज माफी योजना
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जिले में करीब 2.75 लाख किसानों ने केसीसी से लिया है कर्ज

बरेली। कोरोना महामारी में मार्च से अगस्त के बीच मोरेटोरियम अवधि में ब्याज पर ब्याज माफ करने की योजना तैयारी हो गई है। इसमें कारोबारियों के साथ गृह और वाहन कर्ज लेने वालों को तो छूट मिलेगी, लेकिन किसान क्रेडिट कार्ड यानी केसीसी से लोन लेने वाले किसानों को बाहर रखा गया है। इससे जिले के करीब पौने तीन लाख किसानों के हाथ मायूसी लगी है।
मोरेटोरियम अवधि में आर्थिक संकट को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मार्च से अगस्त के बीच लोन की बकाया किस्तों पर ब्याज पर ब्याज की छूट देने की तैयारी हो गई है। ब्याज माफी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रम (एमएसएमई) के साथ ही गृह और वाहन ऋण आदि पर लागू होगी। किसान क्रेडिट कार्ड को इस योजना से बाहर रखा गया है। सबसे ज्यादा फायदा एमएसएमई के तहत लोन लेने वाले उद्यमियों को मिलेगा। आर्थिक संकट से उबारने के लिए बैंकों ने कारोबारियों के लिए कई और भी योजनाएं संचालित की हैं। एमएसएमई के तहत लोन लेने वाले बड़े उद्यमियों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर कारोबार शुरू कर दिया था लेकिन मंदी के चलते उन्होंने ब्याज पर ब्याज देने में असमर्थता जाहिर की थी।
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सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद सरकार ने मार्च से अगस्त के बीच कर्ज की बकाया किस्तों पर ब्याज पर ब्याज देने की छूट देकर बड़ी राहत दी है। सरकार ने केसीसी पर लोन लेने वाले किसानों को मोरेटोरियम अवधि में ब्याज पर ब्याज माफी योजना का लाभ न देेकर मायूस किया है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि कृषि और उससे संबंधित कार्यों को लिए गए ऋण पर ब्याज माफी का लाभ नहीं दिया जा सकता है। कृषि विभाग की मानें तो यहां करीब साढ़े तीन लाख किसानों को केसीसी पर ऋण का लाभ दिया जा रहा है। किसानों का कहना है कि मोरेटोरियम अवधि में उन्हें भी काफी दिक्कत हुई है। फसल बुवाई के लिए महंगाई के साथ उन्हें फसल का भी पूरा भाव नहीं मिला है। साथ ही ढुलाई की लागत भी ज्यादा रही है। इसलिए उन्हें भी ब्याज माफी योजना का लाभ मिलना चाहिए। सरकार के इस फैसले से करीब पौने तीन लाख किसानों के हाथ मायूसी लगी है।
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