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Bareilly News: छह सौ करोड़ का हुआ व्यापार... खूब चमका बाजार
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बरेली। होली पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाने के लिए शहरवासियों ने कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी। रंग, गुलाल, पिचकारी, किराना, कपड़ा आदि का करीब छह सौ करोड़ से ज्यादा का कारोबार होने की उम्मीद कारोबारियों ने जताई है। उनके मुताबिक सर्वाधिक खरीदारी पकवान बनाने के लिए आटा, मैदा, घी, शक्कर, किराना और विभिन्न मसालों की रही। पिछले साल की अपेक्षा 20 फीसदी कारोबार ज्यादा रहा।
इस साल होली की तैयारियां करीब 20 दिन पहले से ही शुरू हो गई थीं। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र गुप्ता के मुताबिक शुरुआत में कारोबार थोड़ा कम रहा। दिन में तेज धूप होने से ग्राहकों की आवाजाही कम रही। बाजार सुबह और शाम का ही था। हालांकि, जैसे-जैसे दिन नजदीक आते गए सबसे पहले कपड़ों के कारोबार में तेजी आई। फिर किराना का बाजार चढ़ने लगा। एक मार्च से कारोबार में जमकर उछाल दर्ज हुआ। बाजार में महंगाई भी नियंत्रित होेने का सकारात्मक प्रभाव रहा। शहरवासियों ने त्योहार को रंगीन बनाने के लिए जेब की फिक्र नहीं की। जो बाजार पर धनवर्षा की वजह बनी।
फल और सब्जियों के दाम भी बजट में होने से इनकी भी खरीदारी अच्छी रही। मेवा कारोबारी संजय आनंद के मुताबिक कुतुबखाना पुल निर्माण के चलते सुस्त चल रहा कारोबार को होली की ‘संजीवनी’ मिली। अबकी बार लोग सेहत के प्रति सचेत रहे। काजू, किशमिश, नारियल गिरी, चिरौंजी, मेवे की माला, अखरोट, बादाम आदि ड्राईफ्रूट्स के लिए कतार लगी रही। इनके दाम न बढ़ने से खरीदारों की कतार लगी रही।
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होलसेल दुकानदारों के पास खत्म हो गए खिलौने
खिलौने के प्रमुख होलसेल विक्रेताओं की दुकानों पर अबकी बार पिचकारी खरीदने पहुंचने वालों को निराश होना पड़ा। वजह फुटकर विक्रेताओं की ओर से बड़ी मात्रा में पिचकारियों की खरीदारी पहले ही कर ली गई। नतीजा, जो पिचकारी होलेसल में 25 रुपये में थे, वे फुटकार में दोगुने दाम में बेचे गए। बच्चों के लिए विभिन्न पिचकारियां टैंक के लिहाज और ब्रांड के अनुसार दो सौ से दो हजार रुपये में अबकी बिके। वहीं, रंगों का कारोबार होलिका दहन के दिन यानी मंगलवार को भी जोरों पर रहा।
कहां कितने कारोबार का अनुमान
- 240 करोड़ का आटा, मैदा, घी, शक्कर, सूजी आदि
- 60 करोड़ में विभिन्न प्रकार का मसाला अन्य किराना
- 20 करोड़ रुपये का रंग, गुलाल, पिचकारी कारोबार
- 125 करोड़ का मेवा, कचरी, पापड़, मिठाई आदि
- 150 करोड़ का गारमेंट और ब्रांडेड, रेडिमेड कपड़ा
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इस साल होली की तैयारियां करीब 20 दिन पहले से ही शुरू हो गई थीं। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र गुप्ता के मुताबिक शुरुआत में कारोबार थोड़ा कम रहा। दिन में तेज धूप होने से ग्राहकों की आवाजाही कम रही। बाजार सुबह और शाम का ही था। हालांकि, जैसे-जैसे दिन नजदीक आते गए सबसे पहले कपड़ों के कारोबार में तेजी आई। फिर किराना का बाजार चढ़ने लगा। एक मार्च से कारोबार में जमकर उछाल दर्ज हुआ। बाजार में महंगाई भी नियंत्रित होेने का सकारात्मक प्रभाव रहा। शहरवासियों ने त्योहार को रंगीन बनाने के लिए जेब की फिक्र नहीं की। जो बाजार पर धनवर्षा की वजह बनी।
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फल और सब्जियों के दाम भी बजट में होने से इनकी भी खरीदारी अच्छी रही। मेवा कारोबारी संजय आनंद के मुताबिक कुतुबखाना पुल निर्माण के चलते सुस्त चल रहा कारोबार को होली की ‘संजीवनी’ मिली। अबकी बार लोग सेहत के प्रति सचेत रहे। काजू, किशमिश, नारियल गिरी, चिरौंजी, मेवे की माला, अखरोट, बादाम आदि ड्राईफ्रूट्स के लिए कतार लगी रही। इनके दाम न बढ़ने से खरीदारों की कतार लगी रही।
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होलसेल दुकानदारों के पास खत्म हो गए खिलौने
खिलौने के प्रमुख होलसेल विक्रेताओं की दुकानों पर अबकी बार पिचकारी खरीदने पहुंचने वालों को निराश होना पड़ा। वजह फुटकर विक्रेताओं की ओर से बड़ी मात्रा में पिचकारियों की खरीदारी पहले ही कर ली गई। नतीजा, जो पिचकारी होलेसल में 25 रुपये में थे, वे फुटकार में दोगुने दाम में बेचे गए। बच्चों के लिए विभिन्न पिचकारियां टैंक के लिहाज और ब्रांड के अनुसार दो सौ से दो हजार रुपये में अबकी बिके। वहीं, रंगों का कारोबार होलिका दहन के दिन यानी मंगलवार को भी जोरों पर रहा।
कहां कितने कारोबार का अनुमान
- 240 करोड़ का आटा, मैदा, घी, शक्कर, सूजी आदि
- 60 करोड़ में विभिन्न प्रकार का मसाला अन्य किराना
- 20 करोड़ रुपये का रंग, गुलाल, पिचकारी कारोबार
- 125 करोड़ का मेवा, कचरी, पापड़, मिठाई आदि
- 150 करोड़ का गारमेंट और ब्रांडेड, रेडिमेड कपड़ा