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Bareilly News: भवनों पर उगीं झाड़ियां, छतों में दरार, पत्राचार में रखरखाव
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बरेली। बरेली कॉलेज में विद्यार्थी सिर्फ कक्षाओं में बैठकर ही पढ़ाई नहीं करते हैं, बल्कि यहां की इमारतें भी उन्हें बहुत कुछ सिखाती हैं, लेकिन यहां की लाल रंग की ऐतिहासिक इमारत धीरे-धीरे अपनी रंगत खो रही है। इसकी दीवारों पर उगे पौधे पेड़ बनते जा रहे हैं। छतों में दरार पड़ चुकी हैं। दरवाजों में दीमक लग रही है। जिम्मेदारों के बीच समन्वय का अभाव है और मरम्मत को लेकर एक-दूसरे पर कागजी वार किए जा रहे हैं।
कॉलेज में अधिकतर भवनों की छतें खराब हो चुकी हैं। दूर से ही झाड़ियां नजर आती हैं। बारिश के दिनों में इनसे पानी टपकता है। रखरखाव के अभाव में ऑडिटोरियम भी काफी समय से बंद पड़ा है। छात्रावास की हालत भी दयनीय है। दरअसल कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव देवमूर्ति ने 12 अगस्त को पत्र जारी कर पर्यावरण विभाग के प्रभारी डॉ. एपी सिंह को रखरखाव के लिए भवन प्रभारी नामित किया था। इसमें डॉ. एपी सिंह को दायित्व संभालते हुए जल्द कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए थे।
इसके बाद क्रीड़ा सचिव विवेक डागर ने पत्र लिखकर जिमनेजियम के पांच कमरों के खराब हो चुके दरवाजों को बदलवाकर लोहे के दरवाजे लगाने के लिए कहा गया था। इसको लेकर डॉ. एपी सिंंह ने लोहे के दरवाजे लगवाने के लिए एस्टीमेट बनवा लिया। इसे प्राचार्य के माध्यम से प्रबंध समिति को अग्रसारित करना था। आरोप है कि प्राचार्य ने कहा कि आपको प्रबंध समिति ने तैनात किया है। आप खुद ही समिति को एस्टीमेट भेजें।
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साथ ही 10 अक्तूबर को कॉलेज के भवनों की साफ-सफाई को लेकर प्राचार्य से अनुमति मांगी गई थी। डॉ. एपी सिंह का कहना है कि प्राचार्य ही कॉलेज के कस्टोडियन हैं। उन्हें ही एस्टीमेट प्रबंधन समिति को भेजना चाहिए। प्राचार्य प्रो. ओपी राय ने बताया कि सामान्य तौर पर प्राचार्य किसी जिम्मेदारी का आवंटन करते हैं। कॉलेज के रखरखाव को लेकर प्रबंध समिति ने डॉ. एपी सिंह को पत्र जारी किया है। ऐसे में प्रबंध समिति से ही उन्हें संवाद करना चाहिए।
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कॉलेज में अधिकतर भवनों की छतें खराब हो चुकी हैं। दूर से ही झाड़ियां नजर आती हैं। बारिश के दिनों में इनसे पानी टपकता है। रखरखाव के अभाव में ऑडिटोरियम भी काफी समय से बंद पड़ा है। छात्रावास की हालत भी दयनीय है। दरअसल कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव देवमूर्ति ने 12 अगस्त को पत्र जारी कर पर्यावरण विभाग के प्रभारी डॉ. एपी सिंह को रखरखाव के लिए भवन प्रभारी नामित किया था। इसमें डॉ. एपी सिंह को दायित्व संभालते हुए जल्द कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए थे।
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इसके बाद क्रीड़ा सचिव विवेक डागर ने पत्र लिखकर जिमनेजियम के पांच कमरों के खराब हो चुके दरवाजों को बदलवाकर लोहे के दरवाजे लगाने के लिए कहा गया था। इसको लेकर डॉ. एपी सिंंह ने लोहे के दरवाजे लगवाने के लिए एस्टीमेट बनवा लिया। इसे प्राचार्य के माध्यम से प्रबंध समिति को अग्रसारित करना था। आरोप है कि प्राचार्य ने कहा कि आपको प्रबंध समिति ने तैनात किया है। आप खुद ही समिति को एस्टीमेट भेजें।
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साथ ही 10 अक्तूबर को कॉलेज के भवनों की साफ-सफाई को लेकर प्राचार्य से अनुमति मांगी गई थी। डॉ. एपी सिंह का कहना है कि प्राचार्य ही कॉलेज के कस्टोडियन हैं। उन्हें ही एस्टीमेट प्रबंधन समिति को भेजना चाहिए। प्राचार्य प्रो. ओपी राय ने बताया कि सामान्य तौर पर प्राचार्य किसी जिम्मेदारी का आवंटन करते हैं। कॉलेज के रखरखाव को लेकर प्रबंध समिति ने डॉ. एपी सिंह को पत्र जारी किया है। ऐसे में प्रबंध समिति से ही उन्हें संवाद करना चाहिए।