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Bareilly News: रामगंगा के बाढ़ क्षेत्र में एनओसी के बिना पास नहीं होगा नक्शा
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बरेली। रामगंगा नदी के बाढ़ क्षेत्र में अब सिंचाई विभाग के अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के बिना भवनों के नक्शे पास नहीं होंगे। पहले मास्टर प्लान में हाई फ्लड जोन का स्पष्ट सीमांकन उपलब्ध नहीं होने के कारण स्थिति अस्पष्ट थी। अब बीडीए ने मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया में सिंचाई विभाग की ओर से किए गए हाई फ्लड जोन के नए सीमांकन को शामिल कर लिया है। नए प्रावधान से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में मानक के विपरीत निर्माण पर अंकुश लगाने की उम्मीद है।
मास्टर प्लान-2031 में नकटिया नदी के किनारे 30 मीटर चौड़े ग्रीन बेल्ट का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद नदी के पास वाले क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृत करने से पहले सिंचाई विभाग की एनओसी ली जाती है। मानचित्र स्वीकृत करने की प्रक्रिया में ग्रीन बेल्ट के प्रावधान के साथ संबंधित विभाग की आपत्ति और बाढ़ क्षेत्र से जुड़े मानकों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
33 फीसदी हरित आवरण का लक्ष्य
मास्टर प्लान-2031 के तहत बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) के 579 वर्ग किलोमीटर के अधिसूचित क्षेत्र में से न्यूनतम 33 प्रतिशत हिस्से को हरित आवरण के रूप में संरक्षित करने का लक्ष्य है। हाल में प्राधिकरण क्षेत्र में शामिल किए गए 35 गांवों और ग्रेटर बरेली योजना में कुल नियोजित भू-उपयोग का 12 फीसदी हिस्सा सार्वजनिक पार्कों और खुले मैदानों के लिए आरक्षित है। परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र, बाइपास व हाईवे के किनारे प्रदूषण नियंत्रण के लिए मियावाकी वन विकसित किए जाएंगे।
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चेन्नई-बंगलूरू जैसे हालात से बचने की कवायद
बीडीए के अधिकारियों का कहना है कि अक्सर मास्टर प्लान में सिर्फ जमीनों के सौदों और दुकानों-मकानों की बात होती है, लेकिन बरेली की महायोजना-2031 में नदियों के प्राकृतिक बहाव को सुरक्षित रखकर 33 फीसदी ग्रीन बेल्ट विकसित करना दूरदर्शी कदम है। यह योजना भविष्य में बरेली को चेन्नई व बंगलूरू जैसी खतरनाक शहरी बाढ़ के संकट से सुरक्षित रखेगी।
वर्जन
रामगंगा व नकटिया नदियों के आसपास मानचित्र स्वीकृति में विभागीय दिशा-निर्देशों व सुरक्षा मानकों का अनुपालन किया जा रहा है। बीडीए का जोर नदी के बाढ़ क्षेत्र में बगैर प्लानिंग के निर्माण को रोकने व निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप ही विकास गतिविधियों को मंजूरी देने पर है। - सौम्या पांडेय, उपाध्यक्ष, बीडीए
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मास्टर प्लान-2031 में नकटिया नदी के किनारे 30 मीटर चौड़े ग्रीन बेल्ट का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद नदी के पास वाले क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृत करने से पहले सिंचाई विभाग की एनओसी ली जाती है। मानचित्र स्वीकृत करने की प्रक्रिया में ग्रीन बेल्ट के प्रावधान के साथ संबंधित विभाग की आपत्ति और बाढ़ क्षेत्र से जुड़े मानकों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
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33 फीसदी हरित आवरण का लक्ष्य
मास्टर प्लान-2031 के तहत बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) के 579 वर्ग किलोमीटर के अधिसूचित क्षेत्र में से न्यूनतम 33 प्रतिशत हिस्से को हरित आवरण के रूप में संरक्षित करने का लक्ष्य है। हाल में प्राधिकरण क्षेत्र में शामिल किए गए 35 गांवों और ग्रेटर बरेली योजना में कुल नियोजित भू-उपयोग का 12 फीसदी हिस्सा सार्वजनिक पार्कों और खुले मैदानों के लिए आरक्षित है। परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र, बाइपास व हाईवे के किनारे प्रदूषण नियंत्रण के लिए मियावाकी वन विकसित किए जाएंगे।
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चेन्नई-बंगलूरू जैसे हालात से बचने की कवायद
बीडीए के अधिकारियों का कहना है कि अक्सर मास्टर प्लान में सिर्फ जमीनों के सौदों और दुकानों-मकानों की बात होती है, लेकिन बरेली की महायोजना-2031 में नदियों के प्राकृतिक बहाव को सुरक्षित रखकर 33 फीसदी ग्रीन बेल्ट विकसित करना दूरदर्शी कदम है। यह योजना भविष्य में बरेली को चेन्नई व बंगलूरू जैसी खतरनाक शहरी बाढ़ के संकट से सुरक्षित रखेगी।
वर्जन
रामगंगा व नकटिया नदियों के आसपास मानचित्र स्वीकृति में विभागीय दिशा-निर्देशों व सुरक्षा मानकों का अनुपालन किया जा रहा है। बीडीए का जोर नदी के बाढ़ क्षेत्र में बगैर प्लानिंग के निर्माण को रोकने व निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप ही विकास गतिविधियों को मंजूरी देने पर है। - सौम्या पांडेय, उपाध्यक्ष, बीडीए