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‘वित्तमंत्री हैं घर की महिलाएं, करें बचत-भविष्य रखें सुरक्षित’
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‘वित्तमंत्री हैं घर की महिलाएं, करें बचत-भविष्य रखें सुरक्षित’
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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पीतमलाल मेमोरियल डिग्री कॉलेज में हुआ अपराजिता कार्यक्रम
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कादरचौक (बदायूं)। अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स अभियान का कारवां सोमवार को कादरचौक के पीतमलाल मेमोरियल डिग्री कॉलेज पहुंचा, जहां ‘बचत करें भविष्य रखें सुरक्षित’ विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें पहुंचे मुख्य अतिथि भारतीय जीवन बीमा निगम के प्रबंधक इकराम हुसैन ने महिलाओं और छात्राओं को बचत करने के कई तरीके बताए। उन्होंने कहा कि महिलाएं गृहमंत्री के साथ-साथ घर की वित्तमंत्री भी हैं, इसलिए उन्हें बचत करके अपना और अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित रखने का तरीका आना चाहिए।
कार्यक्रम की शुरूआत सरस्वती पूजन से हुई। मुख्य अतिथि इकराम हुसैन ने दीप प्रज्जवलित करते हुए कहा कि अक्सर महिलाएं थोड़े-थोड़े रुपये करके घर में बचाती रहती हैं। उन रुपयों से उनका बहुत काम चलता है। या तो वह कुछ खरीद लेती हैं या फिर ऐसे समय उपयोग में आते हैं, जब उन्हें या उनके परिवार को रुपयों की सख्त जरूरत होती है। ऐसी महिलाएं हमेशा परिवार को भी सहेजकर रखती हैं। अपने बुढ़ापे के वक्त काम आएं, ऐसे कार्य भी करती हैं। महिलाएं लघु बचत और सीमांत बचत को भी जानें। स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च, बच्चों की पढ़ाई, उनकी शादी आदि के लिए भी बचत करने की आदत डालें। ऐसे कार्य करें, जिससे उन्हें मुनाफा भी होता रहे। दीर्घ कालिक योजनाएं अधिक फायदेमंद होती हैं। बचत करने से पहले यह भी जानना जरूरी हैं कि उन्होंने कहां पर फालतू खर्च किया है। उन्हें ऐसे खर्च भी रोकने होंगे, तभी उनमें बचत करने की आदत आएगी।
विशिष्ट अतिथि डॉ. अरविंद धवल ने कहा कि जीवन में छोटी बचत हमेशा भविष्य का सहारा बनती है। बचत के नाम पर ऐसा न करें कि किसी ऐसी-वैसी कंपनी में अपना रुपया निवेश कर दें, जिससे उनका रुपया भी मिलना मुश्किल हो जाए। उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या पर एक मार्मिक कविता भी सुनाई। वहीं प्राचार्य डॉ. लाखन सिंह ने छात्राओं को गुल्लक के माध्यम से रुपये बचाने की सलाह दी, जिससे उनकी आवश्यकता पर रुपये काम आ सकें। प्रबंधक राममूर्ति लाल ने भी बच्चों को संस्कार और बचत का पाठ पढ़ाया। इस मौके पर एसआई प्रमोद कुमार, प्रोफेसर मंजू यादव, राकेश कुमार, संजय कुमार, आरपी सिंह त्यागी, प्रधान प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
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क्या कहतीं हैं छात्राएं
पहली बैंक गुल्लक, डालें रुपये
-बच्चों में गुल्लक रखकर बचत करने की आदत डालनी चाहिए। बच्चों को प्रेरित करना चाहिए कि वह रिश्तेदारों से या परिवार वालों से मिलने वाले पैसों को बचाएं और अपनी गुल्लक में डालें, जिससे आगे चलकर वह रुपये उनके काम आ सकें।
अखिलेश कुमारी
हिसाब किताब करना सीखें बच्चे
-प्रत्येक परिवार को अपने बच्चों में हिसाब किताब करने की आदत भी डालनी चाहिए। अगर वह हिसाब करना नहीं सीखेंगे तो उनमें बचत की आदत कैसे पड़ेगी। वे कैसे जानेंगे कि क्या घाटा क्या मुनाफा हुआ।
मैनाज फात्मा
शिक्षित होंगे बच्चे तो काम होंगे अच्छे
-आज समाज में शिक्षित व्यक्ति कहीं फेल नहीं हो सकता। वह तमाम सरकारी योजनाओं के बारे में जान सकता है। क्या काम करने से नुकसान हो सकता है या किससे फायदा होगा। बच्चे पढ़ेंगे तो कम से कम उन्हें किसी के सहारे की जरूरत तो नहीं पड़ेगी।
रोली
पापा की जेब और अपनी गुल्लक का ध्यान रखें
-बच्चों में पैसे बचाने की आदत डालें तो वहीं बच्चों को भी यह सोचना चाहिए कि वे अपने पापा या परिवार वालों के फालतू खर्च तो नहीं करा रहे हैं। उनके पापा मेहनत कर रहे हैं। बच्चे कभी किसी बहाने से तो कभी किसी बहाने रुपये लेकर फालतू खर्च कर रहे हैं। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।
पिंकी
कार्यक्रम की शुरूआत सरस्वती पूजन से हुई। मुख्य अतिथि इकराम हुसैन ने दीप प्रज्जवलित करते हुए कहा कि अक्सर महिलाएं थोड़े-थोड़े रुपये करके घर में बचाती रहती हैं। उन रुपयों से उनका बहुत काम चलता है। या तो वह कुछ खरीद लेती हैं या फिर ऐसे समय उपयोग में आते हैं, जब उन्हें या उनके परिवार को रुपयों की सख्त जरूरत होती है। ऐसी महिलाएं हमेशा परिवार को भी सहेजकर रखती हैं। अपने बुढ़ापे के वक्त काम आएं, ऐसे कार्य भी करती हैं। महिलाएं लघु बचत और सीमांत बचत को भी जानें। स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च, बच्चों की पढ़ाई, उनकी शादी आदि के लिए भी बचत करने की आदत डालें। ऐसे कार्य करें, जिससे उन्हें मुनाफा भी होता रहे। दीर्घ कालिक योजनाएं अधिक फायदेमंद होती हैं। बचत करने से पहले यह भी जानना जरूरी हैं कि उन्होंने कहां पर फालतू खर्च किया है। उन्हें ऐसे खर्च भी रोकने होंगे, तभी उनमें बचत करने की आदत आएगी।
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विशिष्ट अतिथि डॉ. अरविंद धवल ने कहा कि जीवन में छोटी बचत हमेशा भविष्य का सहारा बनती है। बचत के नाम पर ऐसा न करें कि किसी ऐसी-वैसी कंपनी में अपना रुपया निवेश कर दें, जिससे उनका रुपया भी मिलना मुश्किल हो जाए। उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या पर एक मार्मिक कविता भी सुनाई। वहीं प्राचार्य डॉ. लाखन सिंह ने छात्राओं को गुल्लक के माध्यम से रुपये बचाने की सलाह दी, जिससे उनकी आवश्यकता पर रुपये काम आ सकें। प्रबंधक राममूर्ति लाल ने भी बच्चों को संस्कार और बचत का पाठ पढ़ाया। इस मौके पर एसआई प्रमोद कुमार, प्रोफेसर मंजू यादव, राकेश कुमार, संजय कुमार, आरपी सिंह त्यागी, प्रधान प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
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क्या कहतीं हैं छात्राएं
पहली बैंक गुल्लक, डालें रुपये
-बच्चों में गुल्लक रखकर बचत करने की आदत डालनी चाहिए। बच्चों को प्रेरित करना चाहिए कि वह रिश्तेदारों से या परिवार वालों से मिलने वाले पैसों को बचाएं और अपनी गुल्लक में डालें, जिससे आगे चलकर वह रुपये उनके काम आ सकें।
अखिलेश कुमारी
हिसाब किताब करना सीखें बच्चे
-प्रत्येक परिवार को अपने बच्चों में हिसाब किताब करने की आदत भी डालनी चाहिए। अगर वह हिसाब करना नहीं सीखेंगे तो उनमें बचत की आदत कैसे पड़ेगी। वे कैसे जानेंगे कि क्या घाटा क्या मुनाफा हुआ।
मैनाज फात्मा
शिक्षित होंगे बच्चे तो काम होंगे अच्छे
-आज समाज में शिक्षित व्यक्ति कहीं फेल नहीं हो सकता। वह तमाम सरकारी योजनाओं के बारे में जान सकता है। क्या काम करने से नुकसान हो सकता है या किससे फायदा होगा। बच्चे पढ़ेंगे तो कम से कम उन्हें किसी के सहारे की जरूरत तो नहीं पड़ेगी।
रोली
पापा की जेब और अपनी गुल्लक का ध्यान रखें
-बच्चों में पैसे बचाने की आदत डालें तो वहीं बच्चों को भी यह सोचना चाहिए कि वे अपने पापा या परिवार वालों के फालतू खर्च तो नहीं करा रहे हैं। उनके पापा मेहनत कर रहे हैं। बच्चे कभी किसी बहाने से तो कभी किसी बहाने रुपये लेकर फालतू खर्च कर रहे हैं। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।
पिंकी