फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Bronchitis is suffocating children, children are reaching the OPD daily.

Bareilly News: बच्चों का दम घोंट रहा ब्रोंकाइटिस, रोजाना ओपीडी में पहुंच रहे बच्चे

Tue, 05 May 2026 06:02 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 05 May 2026 06:02 AM IST
विज्ञापन
Bronchitis is suffocating children, children are reaching the OPD daily.
जेनेटिक एलर्जी, प्रदूषण, इलाज में बेपरवाही, धुआं समेत अन्य कारक बच्चों का दम घाेट रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना ब्रोंकाइटिस और अस्थमा के लक्षण वाले बच्चे पहुंच रहे हैं। हालिया अध्ययन में 7.22 फीसदी बच्चे ब्रोंकाइटिस की चपेट में पाए गए हैं।
विज्ञापन

वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप गुप्ता के मुताबिक, जन्म के दौरान ही कई बच्चों में सांस की दिक्कत होती है। वे मौसम में बदलाव या ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करें तो उनकी सांस नलिका में सूजन होने की आशंका रहती है। सर्दियों में ब्रोंकाइटिस और अस्थमा पीड़ित बच्चे पहुंचते हैं। उन्हें दवा के साथ बचाव का परामर्श दिया जाता है। पूर्व में जर्नल ऑफ इवोल्यूशन ऑफ मेडिकल एंड डेंटल साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार बरेली के 3,351 स्कूली बच्चों पर क्रॉस-सेक्शनल सर्वेक्षण में 2,250 बच्चे संदिग्ध पाए गए थे। 176 (7.82 फीसदी) में ब्रोंकाइटिस या अस्थमा के लक्षण मिले। 8.57 फीसदी को घरघराहट, 55.7 फीसदी एलर्जिक राइनाइटिस, 44.97 फीसदी में अस्थमा की फैमिली हिस्ट्री का पता चला था।
विज्ञापन

डॉ. गुप्ता के मुताबिक वर्तमान में भी अध्ययन की जरूरत है ताकि सटीक रिपोर्ट मिले। ओपीडी में जो बच्चे पहुंचते हैं, उनमें से ज्यादातर बेहद गंभीर हाेते हैं। स्पष्ट है कि परिजन समय पर इलाज के बजाय लक्षण के आधार पर खुद दवा लेकर खिलाते हैं। यह गंभीर हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


16.17 फीसदी बच्चों को बार-बार आती थी खांसी
सर्वेक्षण के अनुसार, 16.17 फीसदी बच्चों में बार-बार खांसी आने की शिकायत थी। 12.97 फीसदी बच्चों में सांस लेते समय घरघराहट या सीटी जैसी आवाज आती थी। साल भर में 13.33 फीसदी बच्चों को खेलते समय, व्यायाम के दौरान घरघराहट की समस्या हुई। भीड़भाड़, प्रदूषण और धूम्रपान जैसे कारक इसकी वजह माने गए। 24 घंटे से ज्यादा खांसी आए तो विशेषज्ञ को जरूर दिखाएं। लेटलतीफी से स्थिति गंभीर होती है।

अस्थमा के मुख्य कारक
- नमी वाले स्थान पर रहना, एंटीबायोटिक्स का सेवन।
- मां का गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामाॅल का सेवन।
- 12 माह तक के बच्चों को ऊनी कंबल पर लिटाना।
- पर्यावरण प्रदूषण और घर के सामने से ट्रकों का गुजरना।
- पालतू जानवरों के संपर्क में रहना, पारिवारिक इतिहास।
- कोयला, उपलों के धुएं युक्त माहौल में सांस लेना।
- बच्चों में निमोनिया का इतिहास, सिजेरियन प्रसव।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed