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Bareilly News: हादसे में थम रहीं सांसें, भारी पड़ रहा ट्रॉमा सेंटर का इंतजार

Mon, 02 Dec 2024 02:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 02 Dec 2024 02:48 AM IST
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Breathing stopped due to the accident, waiting for trauma center is becoming heavy.
बरेली। लखनऊ-दिल्ली के बीच स्थित शहर को मेडिकल हब माना जाता है, पर यहां न सरकारी ट्राॅमा सेंटर है, न ही आईसीयू। दुर्घटनाग्रस्त लोगों को सरकारी एंबुलेंस जिला अस्पताल पहुंचा देती है। यहां संसाधनों के अभाव में उन्हें लखनऊ, अलीगढ़ रेफर करना पड़ता है। वहां तक पहुंचने से पहले ही कई लोग रास्ते में दम तोड़ देते हैं।
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आंकड़ों पर गौर करें तो अक्तूबर में हुए सड़क हादसों में सर्वाधिक 66 मौतें हुईं। इस वर्ष अक्तूबर तक 974 गंभीर हादसों में 406 लोगों ने जान गंवा दी। वहीं, 928 लोग घायल हुए। बताते हैं कि मृतकों में कई ऐसे लोग शामिल रहे, जिनको ट्रॉमा सेंटर और आईसीयू की व्यवस्था न होने की वजह से जिला अस्पताल से लखनऊ या अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ा। इस कवायद में उनकी जान चली गई।
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हादसे के बाद सक्षम लोग मरीज को निजी अस्पताल ले जाते हैं, पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग इलाज के लिए सरकारी व्यवस्थाओं पर ही निर्भर होते हैं। ऐसे में रेफर का सफर उन पर भारी पड़ता है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सेवाएं देने वाले चिकित्सकों के मुताबिक रोज छह से आठ दुर्घटनाग्रस्त मरीज इलाज के लिए आते हैं। यहां उपलब्ध संसाधनों से जिनका इलाज संभव है, उनको भर्ती कर लिया जाता है। गंभीर मरीजों को आईसीयू के अभाव में रेफर कर दिया जाता है। यहां से लखनऊ पहुंचने में पांच से छह घंटे लगते हैं, जो घायल व्यक्ति की जान पर भारी पड़ते हैं।
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गंभीर घायलों के लिए शुरुआती एक घंटा अहम
ट्राॅमा यानी अचानक ऐसी घटना जिसका शरीर, दिमाग पर गहरा असर पड़े। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में मौत और दिव्यांगता की बड़ी वजह ट्राॅमा है। इसकी वजह अक्सर सड़क दुर्घटना होती है। डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी के मुताबिक दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अगर एक घंटे के भीतर बेहतर इलाज मिल जाए ताे मौत और दिव्यांगता की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है। इसीलिए ज्यादातर ट्रॉमा सेंटर हाईवे पर ही संचालित होते हैं, ताकि जरूरतमंदों को जल्द से जल्द इलाज मिल सके। शुरुआती एक घंटे में इलाज नहीं मिलने पर उनके बचने की संभावना क्षीण हो जाती है।

मंडल समेत उत्तराखंड से भी आते हैं मरीज
मंडलीय चिकित्सालय होने की वजह से जिला अस्पताल में बरेली समेत बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत से भी गंभीर दुर्घटनाग्रस्त मरीज रेफर होकर आते हैं। उत्तराखंड की सीमा से सटा होने की वजह से वहां से भी दुर्घटनाग्रस्त मरीज यहां आते हैं।

वर्जन
जो भी घायल अस्पताल पहुंचते हैं, उपलब्ध संसाधनों से उनका बेहतर इलाज किया जाता है। जिन्हें आईसीयू की जरूरत होती है, उनके परिजन को स्थिति बताकर रेफर करते हैं। लखनऊ पहुंचने में समय लगता है। रास्ते में हालत बिगड़ने की आशंका रहती है। - डॉ. अलका शर्मा, एडी एसआईसी जिला अस्पताल
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इस वर्ष हुए हादसेमाह हादसे मौत

जनवरी 44 22
फरवरी 89 38

मार्च 94 27
अप्रैल 96 37

मई 133 49
जून 103 48

जुलाई 87 33
अगस्त 110 43

सितंबर 100 43
अक्तूबर 118 66

नोट : आंकड़े पुलिस विभाग से प्राप्त।
अमर उजाला ब्यूरो
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