ब्रांडेड कंपनी और शोरूम संचालकों ने किराया देने से इंकार
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बिल्डिंग मालिक परेशानए बोले. हम पर लाखों का बैंक कर्जा कहां से देंगे
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दस करोड़ रुपये हर माह होता है किराया लेनदेनए पिछले माह नहीं किया भुगतान
बरेली। लॉकडाउन में कारोबार के पहिये क्या थमे, व्यापारी तबके में व्यावसायिक हितों का भारी टकराव शुरू हो गया है। हाल ही में शहर के महंगे और प्रमुख बाजारों की आलीशान इमारतों में अपने शोरूम चला रही कंपनियों और बतौर फ्रेंचाइजी शोरूम चला रहे कारोबारियों के उनका किराया देने से इनकार कर देने के बाद नया विवाद शहर के व्यापारिक हल्कों को अंदर ही अंदर गरम करने लगा है। बताया जा रहा है कि इन फ्रेंचाइजी और इमारतों के मालिकों के बीच हर महीने दस करोड़ रुपये से ज्यादा रकम का किराये के तौर पर लेनदेन होता है। अब इस मामले को अदालत में ले जाने की भी तैयारी की जा रही है।
पिछले पांच सालों में रेडिमेड गारमेंट, फुटवियर, ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और फास्ट फूड के बड़े ब्रांड के तौर पर जाने जानी वाली कंपनियों के शोरूम की तादाद शहर में लगातार बढ़ रही है और अब इनकी हर भरमार हो चुकी है। पटेल चौक, पीलीभीत रोड पर मॉल, राजेंद्रनगर और डीडीपुरम जैसे शहर के सबसे महंगे इलाकों में राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सैकड़ों शोरूम किराये की इमारतों में चल रहे हैं। करीब 50 दिन पहले लॉकडाउन होने के बाद से तमाम दूसरे कारोबार की तरह इन शोरूम में पड़ा ताला भी अब तक नहीं खुला है। इस बीच कंपनियों और बतौर फ्रेंचाइजी ये शोरूम चलाने वाले कारोबारियों के उसका किराया देने से इनकार कर दिए जाने के बाद विवाद शुरू हो गए हैं। जिन लोगों की इमारतें हैं, वे लगातार उन पर किराया अदा करने का दबाव बना रहे हैं और उनका सीधा सा जवाब है कि जब शोरूम खुल ही नहीं रहा तो वे किराया कहां से दें।
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20 लाख तक के किराये की इमारत में चल रहे हैं शोरूम
ब्रांड के नाम पर आम लोग जमकर पैसा लुटाते हैं लिहाजा शहर में बड़ी कंपनियों के शोरूम भी एक लाख से 20 लाख रुपये तक के मासिक किराये वाली महंगी इमारतों में चल रहे हैं। बताया जाता है कि लॉकडाउन लागू होने से पहले इन शोरूम का महीने भर का ही कारोबार करोड़ों में था लेकिन अब लॉकडाउन में उनमें ताला पड़ने के बाद ज्यादातर फ्रेंचाइजी के आगे शोरूम में लगाई गई अपनी रकम बचाना तक मुश्किल हो गया है। आम तौर पर मोटा मुनाफा कमाने वाले इन कारोबारियों ने इमारतों का किराया देने से इनकार करने के साथ अपने स्टाफ को अप्रैल का वेतन तक नहीं दिया है।
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सरकार ने कहा है.. तीन महीने का किराया नहीं देंगे
लॉकडाउन लागू होने के बाद सरकार की ओर से मकान मालिकों से अपील की थी कि अगर उनके किरायेदार किराया न दे पाएं तो वे उन्हें घर से न निकालें। करोड़ों का कारोबार करने वाले फ्रेंचाइजी ने इसे अपने शोरूम का किराया न देने के लिए बहाना बना लिया है। उनका कहना है कि वे लॉकडाउन लागू होने के बाद से तीन महीने का किराया दे पाने की स्थिति में नहीं हैं।
आमना-सामना नहीं, फोन और मेल
लॉकडाउन में फ्रेंचाइजी को शोरूम का किराया मांगने वालों से बचने का भी एक बहाना मिल गया है। इमारतों के मालिक को वे आमने-सामने बात करने का मौका तक नहीं दे रहे हैं। ज्यादातर कंपनियों के प्रतिनिधि और इमारतों के मालिक उनसे सिर्फ फोन पर बात कर पा रहे हैं या ईमेल भेजकर किराया न अदा करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दे रहे हैं। चूंकि अदालतें भी बंद हैं लिहाजा फ्रेंचाइजी उनकी इस चेतावनी पर भी निश्चिंत हैं। इमारतों के मालिकों का यह जरूर कहना है कि उन्होंने अपनी इमारत का किरायानामा रजिस्टर्ड करा रखा है। अगर उन्हें किराया नहीं मिला तो वे कानूनी मदद लेने से हिचकेंगे नहीं।
किराया नहीं मिलेगा तो बैंक को क्या देंगे
इमारतों के मालिकों का कहना है कि उन पर बैंकों का कर्ज है। शोरूम चलाने वाले फ्रेंचाइजी अगर उन्हें किराया नहीं देंगे तो वे बैंक का कर्ज कैसे चुकाएंगे। उनका कहना है कि उन्होंने किरायानामे के आधार पर ही बैंकों से लोन लिया है। लॉकडाउन में बैंक की किस्त जमा नहीं हो पा रही हैं लेकिन उन पर कर्ज तो है ही। किराया नहीं मिलेगा तो बैंक की देनदारी भी अटकी रहेगी।
हमें मार्च और अप्रैल का किराया अब तक नहीं मिला है। कई बार कंपनी और फ्रेंचाइजी किरायेदारों से आग्रह कर चुके हैं। इस किराये से हम अपने बैंक से लोन लेकर दूसरी जगह निवेश किया है। किराया न मिलने से बैंक की किस्तें नहीं दे पा रहे हैं और हम पर देनदारियां बढ़ने लगी हैं। -विवेक भारती, पटेल चौक बाजार में एक व्यावसायिक इमारत के मालिक
इमारत को किराए पर लेने वाली नामी कंपनियां लॉकडाउन में किराये का भुगतान नहीं कर रही हैं। इससे समस्या आ रही है क्योंकि हमने भी संपत्ति से मिलने वाले किराये के आधार पर बैंकों से लोन लिया है। इसलिए किराया नहीं मिलने से बैंक की किस्त जमा नहीं कर पा रहे। दूसरी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। - हरीश विग, डीडीपुरम में व्यावसायिक इमारत के मालिक
दस करोड़ रुपये हर माह होता है किराया लेनदेनए पिछले माह नहीं किया भुगतान बरेली। लॉकडाउन में कारोबार के पहिये क्या थमे, व्यापारी तबके में व्यावसायिक हितों का भारी टकराव शुरू हो गया है। हाल ही में शहर के महंगे और प्रमुख बाजारों की आलीशान इमारतों में अपने शोरूम चला रही कंपनियों और बतौर फ्रेंचाइजी शोरूम चला रहे कारोबारियों के उनका किराया देने से इनकार कर देने के बाद नया विवाद शहर के व्यापारिक हल्कों को अंदर ही अंदर गरम करने लगा है। बताया जा रहा है कि इन फ्रेंचाइजी और इमारतों के मालिकों के बीच हर महीने दस करोड़ रुपये से ज्यादा रकम का किराये के तौर पर लेनदेन होता है। अब इस मामले को अदालत में ले जाने की भी तैयारी की जा रही है।
पिछले पांच सालों में रेडिमेड गारमेंट, फुटवियर, ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और फास्ट फूड के बड़े ब्रांड के तौर पर जाने जानी वाली कंपनियों के शोरूम की तादाद शहर में लगातार बढ़ रही है और अब इनकी हर भरमार हो चुकी है। पटेल चौक, पीलीभीत रोड पर मॉल, राजेंद्रनगर और डीडीपुरम जैसे शहर के सबसे महंगे इलाकों में राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सैकड़ों शोरूम किराये की इमारतों में चल रहे हैं। करीब 50 दिन पहले लॉकडाउन होने के बाद से तमाम दूसरे कारोबार की तरह इन शोरूम में पड़ा ताला भी अब तक नहीं खुला है। इस बीच कंपनियों और बतौर फ्रेंचाइजी ये शोरूम चलाने वाले कारोबारियों के उसका किराया देने से इनकार कर दिए जाने के बाद विवाद शुरू हो गए हैं। जिन लोगों की इमारतें हैं, वे लगातार उन पर किराया अदा करने का दबाव बना रहे हैं और उनका सीधा सा जवाब है कि जब शोरूम खुल ही नहीं रहा तो वे किराया कहां से दें।
20 लाख तक के किराये की इमारत में चल रहे हैं शोरूम
ब्रांड के नाम पर आम लोग जमकर पैसा लुटाते हैं लिहाजा शहर में बड़ी कंपनियों के शोरूम भी एक लाख से 20 लाख रुपये तक के मासिक किराये वाली महंगी इमारतों में चल रहे हैं। बताया जाता है कि लॉकडाउन लागू होने से पहले इन शोरूम का महीने भर का ही कारोबार करोड़ों में था लेकिन अब लॉकडाउन में उनमें ताला पड़ने के बाद ज्यादातर फ्रेंचाइजी के आगे शोरूम में लगाई गई अपनी रकम बचाना तक मुश्किल हो गया है। आम तौर पर मोटा मुनाफा कमाने वाले इन कारोबारियों ने इमारतों का किराया देने से इनकार करने के साथ अपने स्टाफ को अप्रैल का वेतन तक नहीं दिया है।सरकार ने कहा है.. तीन महीने का किराया नहीं देंगे
लॉकडाउन लागू होने के बाद सरकार की ओर से मकान मालिकों से अपील की थी कि अगर उनके किरायेदार किराया न दे पाएं तो वे उन्हें घर से न निकालें। करोड़ों का कारोबार करने वाले फ्रेंचाइजी ने इसे अपने शोरूम का किराया न देने के लिए बहाना बना लिया है। उनका कहना है कि वे लॉकडाउन लागू होने के बाद से तीन महीने का किराया दे पाने की स्थिति में नहीं हैं।आमना-सामना नहीं, फोन और मेल
लॉकडाउन में फ्रेंचाइजी को शोरूम का किराया मांगने वालों से बचने का भी एक बहाना मिल गया है। इमारतों के मालिक को वे आमने-सामने बात करने का मौका तक नहीं दे रहे हैं। ज्यादातर कंपनियों के प्रतिनिधि और इमारतों के मालिक उनसे सिर्फ फोन पर बात कर पा रहे हैं या ईमेल भेजकर किराया न अदा करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दे रहे हैं। चूंकि अदालतें भी बंद हैं लिहाजा फ्रेंचाइजी उनकी इस चेतावनी पर भी निश्चिंत हैं। इमारतों के मालिकों का यह जरूर कहना है कि उन्होंने अपनी इमारत का किरायानामा रजिस्टर्ड करा रखा है। अगर उन्हें किराया नहीं मिला तो वे कानूनी मदद लेने से हिचकेंगे नहीं।किराया नहीं मिलेगा तो बैंक को क्या देंगे
इमारतों के मालिकों का कहना है कि उन पर बैंकों का कर्ज है। शोरूम चलाने वाले फ्रेंचाइजी अगर उन्हें किराया नहीं देंगे तो वे बैंक का कर्ज कैसे चुकाएंगे। उनका कहना है कि उन्होंने किरायानामे के आधार पर ही बैंकों से लोन लिया है। लॉकडाउन में बैंक की किस्त जमा नहीं हो पा रही हैं लेकिन उन पर कर्ज तो है ही। किराया नहीं मिलेगा तो बैंक की देनदारी भी अटकी रहेगी।हमें मार्च और अप्रैल का किराया अब तक नहीं मिला है। कई बार कंपनी और फ्रेंचाइजी किरायेदारों से आग्रह कर चुके हैं। इस किराये से हम अपने बैंक से लोन लेकर दूसरी जगह निवेश किया है। किराया न मिलने से बैंक की किस्तें नहीं दे पा रहे हैं और हम पर देनदारियां बढ़ने लगी हैं। -विवेक भारती, पटेल चौक बाजार में एक व्यावसायिक इमारत के मालिक
इमारत को किराए पर लेने वाली नामी कंपनियां लॉकडाउन में किराये का भुगतान नहीं कर रही हैं। इससे समस्या आ रही है क्योंकि हमने भी संपत्ति से मिलने वाले किराये के आधार पर बैंकों से लोन लिया है। इसलिए किराया नहीं मिलने से बैंक की किस्त जमा नहीं कर पा रहे। दूसरी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। - हरीश विग, डीडीपुरम में व्यावसायिक इमारत के मालिक