Bareilly News: भाजपा की ब्रजेश कुमारी बनी रहेंगी बिथरी चैनपुर की ब्लॉक प्रमुख, विरोधी चारों खाने चित्त
हाईकोर्ट के निर्देश पर जिला प्रशासन ने बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव के लिए बैठक बुलाई थी। इसमें कुल 112 में से 75 सदस्यों को ब्लॉक आकर अविश्वास प्रस्ताव लाना था, लेकिन ऐसा हो न सका। विरोधी पक्ष का कोई भी सदस्य नहीं पहुंचा।
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बरेली में बिथरी चैनपुर ब्लॉक प्रमुख ब्रजेश कुमारी को पद से हटाने के लिए सत्ता पक्ष के ही दूसरे गुट की ओर से की गई कोशिश नाकाम हो गई। बुधवार को विरोधी खेमे का एक भी बीडीसी सदस्य न पहुंचने पर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो सकी। मौजूद पांच सदस्यों की हाजिरी लगाकर कार्रवाई खत्म कर दी गई। ब्लॉक प्रमुख पक्ष में जश्न का माहौल रहा।
विरोधी खेमे ने अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए पूरी ताकत झोंकी थी। बीडीसी सदस्यों की डीएम के यहां परेड कराकर भी असफल रहे ब्रजेंद्र सिंह और दुर्विजय सिंह ने इस बार हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। ब्लॉक प्रमुख को अल्पमत में बताते हुए भ्रष्टाचार व मनमानी जैसे आरोप लगाए थे। हाईकोर्ट के निर्देश पर जिला प्रशासन ने बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव के लिए बैठक बुलाई थी। इसमें कुल 112 में से 75 सदस्यों को ब्लॉक आकर अविश्वास प्रस्ताव लाना था, लेकिन ऐसा हो न सका।
सुबह साढ़े दस बजे एसडीएम सदर रत्निका श्रीवास्तव के नेतृत्व में प्रक्रिया शुरू हुई। दोपहर साढ़े 12 बजे तक इंतजार किया गया, लेकिन एक भी विपक्षी सदस्य और विरोध के झंडाबदारों में से कोई नहीं पहुंचा। सत्ता पक्ष से जुड़े बताए जा रहे पांच सदस्यों ने हाजिरी लगाकर कोरम की औपचारिकता पूरी की। कुल 75 सदस्यों का कोरम पूरा न होने पर अविश्वास प्रस्ताव गिर गया।
सदस्यों को भड़काने वाले हुए बेनकाब
ब्लॉक प्रमुख ब्रजेश कुमारी ने बताया कि कुछ सदस्यों को भड़काकर हमारे खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की गई, ऐसे लोग बेनकाब हो चुके हैं। पार्टी नेतृत्व व वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन में हमने सदस्यों तक अपनी बात पहुंचाई तो वह विरोधियों की चाल समझ गए। नियमानुसार प्रक्रिया में कोई सदस्य विरोध करने नहीं पहुंचा। सभी सदस्य हमारे परिवार का हिस्सा हैं, सबके सहयोग से क्षेत्र में विकास कराने का काम किया जाएगा।
अब एक साल तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं
डीपीआरओ धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि विरोध में करीब 75 सदस्यों की संख्या होने पर ही अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा या मतदान हो सकता था। कोई सदस्य विरोध करने नहीं पहुंचा। मौके पर मौजूद पांच सदस्यों ने ही हाजिरी लगाई। इस तरह अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। इसकी सूचना हाईकोर्ट को भेजी जा रही है, साथ ही गेट पर चस्पा की गई है। अब एक साल तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकेगा।