Bareilly News: आईवीआरआई में पशुओं के लिए बनेगा ब्लड बैंक, जांच के बाद चढ़ाया जाएगा खून
बरेली के भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में अब घायल पशुओं को खून भी चढ़ाया जा सकेगा। इसके लिए परिसर में ब्लड बैंक बनेगा। इसकी कवायद शुरू हो गई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बरेली में दुर्घटनाग्रस्त पशुओं की रक्तस्राव की वजह से मौत हो जाती है। वहीं, दूसरी बार बगैर जांच के रक्त चढ़ाने से संक्रमण का खतरा भी रहता है। इस संकट से निजात के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) इज्जतनगर में पशुओं के लिए रक्तकोष बनाया जाएगा। आईवीआरआई परिसर में स्वीकृत एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर कैनाइन का निर्माण पूरा होने के बाद प्रस्तावित लैब का विस्तार कर उसमें पशुओं के लिए रक्तकोष बनाए जाने पर मंथन किया जा रहा है।
रेफरल वेटरनरी पॉलीक्लीनिक के इंचार्ज डॉ. अमरपाल के मुताबिक प्रत्येक पशु का ब्लड ग्रुप अलग-अलग होता है। आईवीआरआई में पशुओं के रक्त को सुरक्षित रखने के लिए ब्लड बैंक नहीं है। हालांकि, जान जोखिम में होने पर पहली बार बगैर जांच के ही रक्त चढ़ा देते हैं। इसी पशु को दूसरी बार बगैर जांच के रक्त चढ़ा दिया जाए तो 70 फीसदी तक संक्रमण की आशंका रहती है। ऐसे में कैनाइन सेंटर का निर्माण पूरा होने के बाद उसकी लैब में खून की जांच की जाएगी। ब्लड बैंक बनने पर पशुओं का रक्त भी सुरक्षित रखा जा सकेगा।
छोटे-बड़े पशुओं के एक यूनिट ब्लड की मात्रा अलग-अलग
डॉ. अमरपाल के मुताबिक भेड़, बकरी, कुत्ता व बिल्ली में 150 से 200 एमएल का एक यूनिट ब्लड होता है। जबकि, गाय, भैंस, घोड़ा समेत अन्य बड़े पशुओं के रक्त का एक यूनिट 450 से 500 एमएल तक का हो सकता है। जरूरत पर अगर पशुपालक उसी प्रजाति के दूसरे पशु को लेकर पहुंचते हैं तो उसका पॉलीक्लीनिक में रक्तदान करवाने के लिए दो सौ रुपये खर्च होता है।
हर माह आ रहे चार-पांच केस
इंचार्ज के मुताबिक, क्लीनिक में हर माह चार-पांच ऐसे केस पहुंचते हैं, जिसमें रक्त चढ़ाने की जरूरत होती है। ऐसे में उस पशु को सीमित मात्रा में ही खून चढ़ाते हैं। गोवंशीय पशु को गोवंश का, महिषवंशीय पशु का महिषवंश का, घोड़े को अश्व प्रजाति, बकरी को बकरी का रक्त पहली बार बगैर जांच के ही चढ़ा सकते हैं। जरूरत पर पशुपालक रक्तदान के लिए पशु लेकर आते हैं।