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Bareilly News: विंडरमेयर थिएटर फेस्टिवल को यादगार बना गया बिदेसिया
Mon, 16 Feb 2026 12:14 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Mon, 16 Feb 2026 12:14 AM IST
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ग्रांट के तहत युवा कलाकारों को दिया जाएगा प्रोत्साहन, देश भर में कर सकेंगे नाटकों का मंचन
बरेली। विंडरमेयर थिएटर फेस्टिवल के सातवें और अंतिम दिन देशज भोजपुरी संगीत से सजे नाटक ‘बिदेसिया’ की प्रस्तुति ने दर्शकों को गाने-गुनगुनाने, हंसने-हंसाने और रोने-सुबकने के लिए मजबूर कर दिया। पटना से आए निर्माण कला मंच के कलाकारों ने विंडरमेयर में अपनी तरह के इस अनूठे संगीतमयी नाटक की 783वीं प्रस्तुति दी।
भोजपुरी के मशहूर लोककलाकार भिखारी ठाकुर के लिखे इस नाटक का संगीत, परिकल्पना और निर्देशन संजय उपाध्याय ने किया है। नाटक में दर्शाया गया कि दोस्त की सलाह पर रोजी-रोटी की तलाश में कलकत्ता पहुंचा नायक गांव में अपने पीछे नायिका को अकेला छोड़ गया है। नायिका परेशान होकर नायक की याद रोया करती है।
जैसे-तैसे बटोही परदेस पहुंचा तो पता चला कि नायक को कोई और मिल गई है। उसने दूसरा ब्याह रचा लिया है। दो बच्चे भी हैं। किसी तरह वो घर वापस आया है। कुछ ही दिन बाद दरवाजे पर दस्तक होती है। देखा तो दूसरी वाली आ पहुंची है। अब पहली और दूसरी आमने-सामने।
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रोजी-रोटी के लिए पलायन की मजबूरी, विरह की तड़प, सौतनों का आमना-सामना..., ‘बिदेसिया’ के कलाकारों ने लोक शैली के माध्यम से विंडरमेयर के मंच पर अपनी यादें बिखेर दीं। इस संगीतमयी प्रस्तुति में हारमोनियम पर रोहित चंद्र, ढोलक पर राजेश रंजन, झाल और इफेक्ट पर अभिषेक राज ड्रामेबाज, क्लैरिनेट पर मोहम्मद नूर ने समां बांध दिया। हरिशंकर रवि ने प्रकाश संयोजन किया।
अंतिम दिन मंचन के बाद दया दृष्टि चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. ब्रजेश्वर सिंह ने कलाकारों और दर्शकों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि विंडरमेयर थिएटर ग्रांट के तहत युवा कलाकारों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। वे विंडरमेयर थिएटर के साथ मिलकर नाटक बना सकेंगे और देशभर में मंचन कर सकेंगे।
बरेली। विंडरमेयर थिएटर फेस्टिवल के सातवें और अंतिम दिन देशज भोजपुरी संगीत से सजे नाटक ‘बिदेसिया’ की प्रस्तुति ने दर्शकों को गाने-गुनगुनाने, हंसने-हंसाने और रोने-सुबकने के लिए मजबूर कर दिया। पटना से आए निर्माण कला मंच के कलाकारों ने विंडरमेयर में अपनी तरह के इस अनूठे संगीतमयी नाटक की 783वीं प्रस्तुति दी।
भोजपुरी के मशहूर लोककलाकार भिखारी ठाकुर के लिखे इस नाटक का संगीत, परिकल्पना और निर्देशन संजय उपाध्याय ने किया है। नाटक में दर्शाया गया कि दोस्त की सलाह पर रोजी-रोटी की तलाश में कलकत्ता पहुंचा नायक गांव में अपने पीछे नायिका को अकेला छोड़ गया है। नायिका परेशान होकर नायक की याद रोया करती है।
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जैसे-तैसे बटोही परदेस पहुंचा तो पता चला कि नायक को कोई और मिल गई है। उसने दूसरा ब्याह रचा लिया है। दो बच्चे भी हैं। किसी तरह वो घर वापस आया है। कुछ ही दिन बाद दरवाजे पर दस्तक होती है। देखा तो दूसरी वाली आ पहुंची है। अब पहली और दूसरी आमने-सामने।
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रोजी-रोटी के लिए पलायन की मजबूरी, विरह की तड़प, सौतनों का आमना-सामना..., ‘बिदेसिया’ के कलाकारों ने लोक शैली के माध्यम से विंडरमेयर के मंच पर अपनी यादें बिखेर दीं। इस संगीतमयी प्रस्तुति में हारमोनियम पर रोहित चंद्र, ढोलक पर राजेश रंजन, झाल और इफेक्ट पर अभिषेक राज ड्रामेबाज, क्लैरिनेट पर मोहम्मद नूर ने समां बांध दिया। हरिशंकर रवि ने प्रकाश संयोजन किया।
अंतिम दिन मंचन के बाद दया दृष्टि चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. ब्रजेश्वर सिंह ने कलाकारों और दर्शकों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि विंडरमेयर थिएटर ग्रांट के तहत युवा कलाकारों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। वे विंडरमेयर थिएटर के साथ मिलकर नाटक बना सकेंगे और देशभर में मंचन कर सकेंगे।