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Bareilly News: फोन से दूर होने का डर सताए तो सावधान हो जाएं

Mon, 17 Jul 2023 01:39 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 17 Jul 2023 01:39 AM IST
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Be careful if you are afraid of being away from the phone
बरेली। आभासी दुनिया में मोबाइल फोन के बिना जीना मुश्किल है। कहते हैं कि हर समस्या का समाधान फोन में छिपा है, लेकिन, अब युवाओं को इस फोन के दूर हो जाने का डर सता रहा है। इस मनोस्थिति को नोमोफोबिया (नो मोबाइल फोबिया) कहते हैं। यह ऐसा मानसिक विकार है जिसमें फोन की बैटरी कम होने, नेटवर्क चले जाने व फोन के इधर-उधर हो जाने से व्यक्ति को बेचैनी होने लगती है। एक अध्ययन के मुताबिक 53 फीसदी स्मार्टफोन यूजर इससे पीड़ित हैं। इसमें युवाओं की संख्या ज्यादा है।
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केस-1
21 साल की युवती छुट्टियों में घर आई थी। वह दिनभर फोन का इस्तेमाल करती थी। कॉलेज की पढ़ाई भी फोन के जरिये ही होती थी। अभिभावकों ने उसकी आदत देखकर उसे टोकना शुरू किया। कभी-कभी अभिभावक उसे डांट भी देते थे। इसके बाद उसने घर आना ही छोड़ दिया। वह कॉलेज में भी फोन ले जाने लगी। एक दिन शिक्षिका ने उसे फोन चलाते पकड़ा और एक हफ्ते के लिए उसे फोन नहीं दिया तो उसे अपनी लत का आभास हुआ।
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केस-2
17 साल का किशोर स्कूल जाते वक्त फोन स्कूटी में रखता था, ताकि स्कूल के बाद कोचिंग में वह अपने दोस्तों के साथ उस पर खेल सके। उसकी बहन ने भी बताया कि वह देर रात तक फोन का इस्तेमाल करता है। एक दिन वह फोन स्कूटी में रखना भूल गया। स्कूल की छुट्टी के बाद उसे फोन नहीं मिला तो वह काफी घबरा गया। घबराहट में वह बेहोश होने लगा। दोस्तों की मदद से उसे घर ले जाया गया। फोन मिलने के बाद उसकी तबीयत में सुधार हुआ।
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यह भी हो सकता है कारण
लोग धीरे-धीरे फोन में सबकुछ सेव करते जा रहे हैं। जरूरी दस्तावेज, बैंक अकाउंट संबंधित जानकारी आदि भी फोन में होती है। इसलिए वह अपना फोन किसी अन्य को देने से झिझकते हैं। आधुनिकता बढ़ने से इसका दुरुपयोग भी आसान हो गया है।

ये हैं प्रमुख लक्षण
- फोन में कोई समस्या होने पर घबराहट होना।
- फोन के इस्तेमाल से सिर भारी होना।
-हर समय फोन को अपने हाथों में रखना।
-फोन इधर-उधर होने पर पसीना आना।
-फोन के न मिलने पर धड़कन का तेज हो जाना।
इस तरह करें बचाव
बरेली कॉलेज के साइकोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष सुविधा शर्मा बताती हैं कि आज कल हर चौथा व्यक्ति नोमोफोबिया का शिकार है। इसमें इंसान इतना संवेदनशील हो जाता है कि बार-बार फोन की नोटिफिकेशन को ही चेक करता है। चार्जिंग के समय भी फोन इस्तेमाल करता है। शुरुआती दौर में कुछ आदतों में बदलाव कर इससे बचा जा सकता है। आगे जाकर साइकोलॉजिस्ट की मदद लेनी पड़ सकती है।
इन बातों का रखें ध्यान
-रात को सोते समय मोबाइल फोन को पास न रखें।
-किताबें पढ़ने की आदत डालें। फोन में किताबें न पढ़ें।
- सुबह उठते ही फोन को चेक करने से बचें।
- खेलकूद और व्यायाम करें।
- अलार्म व समय देखने के लिए फोन का प्रयोग न करें।
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