Bareilly News: रामगंगानगर सेक्टर-तीन का हाल... पार्क बने चरागाह, खौफ और असुविधाओं के बीच घिसट रही जिंदगी
बीडीए की आवासीय योजनाओं की पड़ताल के दौरान नागरिक सुविधाओं का अकाल सामने आया। रामगंगानगर सेक्टर-एक, तीन,चार और नौ के बाशिंदों ने कहा कि वह यहां मकान बनवाकर फंस गए हैं। वह यहां असुविधाओं के बीच रहने को मजबूर हैं।
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बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) की रामगंगानगर आवासीय योजना के सेक्टर-तीन के पार्क चरागाह बन गए हैं। यहां घोड़े व अन्य मवेशी घास चरते हैं। आंतरिक मार्ग झाड़ियों की गिरफ्त में हैं। अधिकतर खंभों पर स्ट्रीट लाइटें नहीं हैं। जिन पर लगी भी हैं, वे जलती नहीं हैं।
सुरक्षा इंतजाम भी नहीं हैं। कई बार चोरियां हो चुकी हैं। सीवर लाइन चालू नहीं है, इसके खुले होल खतरे को दावत दे रहे हैं। वर्षों पहले बनाई गई पानी की टंकी शोपीस बनी हुई है। किसी भी घर में जलापूर्ति नहीं होती। खौफ और असुविधाओं के बीच यहां जिंदगी घिसट रही है।
बीडीए की आवासीय योजनाओं की पड़ताल के दौरान नागरिक सुविधाओं का अकाल सामने आया। रामगंगानगर सेक्टर-एक, चार और नौ के बाशिंदों ने वहां मकान बनवाकर फंसने की बात कही। रविवार को सेक्टर-तीन की पड़ताल की गई। बाशिंदों ने बीडीए पर सुविधाएं नहीं देने और शिकायतों की सुनवाई नहीं करने का आरोप लगाया। बच्चे भी कॉलोनी में फैली बदइंतजामी से व्यथित दिखे।
बच्चों को हर वक्त रहता है डर
सात साल की मासूम ईशानी सागर ने कहा कि कॉलोनी में बहुत मवेशी आते हैं। गटर भी खुला है। इससे साइकिल चलाने में खतरा रहता है। छह साल के स्पर्श गंगवार ने बताया कि कॉलोनी में झाड़ियां अधिक हैं। इसमें सांप घूमते हैं। इससे डर बना रहता है। पार्कों में झूले, बेंच, रोशनी के इंतजाम नहीं हैं। वहां मवेशी चरते रहते हैं। इस वजह से हम वहां खेल भी नहीं पाते।
लेखराज बताते हैं कि उनके घर के सामने सीवर लाइन का होल दो साल से खुला है। शिकायत के बावजूद समस्या निस्तारित नहीं हुई। धर्मेंद्र सागर ने भी घर के सामने सीवर लाइन का होल खुला होने की बात कही। कॉलोनी में व्याप्त अनियमितताओं के संबंध में बीडीए उपाध्यक्ष का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इन्कर कर दिया।
यहां के निवासी डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि कॉलोनीवासियों के साथ वह कम से कम 10 बार बीडीए उपाध्यक्ष को शिकायती पत्र दे चुके हैं, पर कोई नतीजा नहीं निकला। सेक्टर-तीन में 15 साल पहले बनी पानी की टंकी अब तक निष्प्रयोज्य है। पार्क विकसित नहीं है, न ही उसमें गेट लगा है।
सफाई भी नहीं होती है। पूरी कॉलोनी में झाड़ियां हैं। इसमें सांप, नेवले, शाही जैसे जीव घूमते हैं। कई बार वे घर में घुस आते हैं। डर के कारण बच्चे घर से बाहर नहीं निकलते हैं। कॉलोनी में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। कई बार थाने जाकर लोगों ने कॉलोनी में डॉयल 112 के आवागमन की मांग की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
मैं यहां परिवार समेत 15 अप्रैल से निवास कर रहा हूं। यहां अधिकतर खंभों की स्ट्रीट लाइटें नहीं जलती हैं। कॉलोनी की न तो बाउंड्री है, न ही किसी सुरक्षा गार्ड की तैनाती। अंधेरे और झाड़ियों के बीच चोरों का खौफ बना रहता है। - धर्मेंद्र सिंह
चोरों ने मेरा केबल चुरा लिया। बीडीए भी गए, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। मार्ग पर झाड़ियां बहुत हैं। बीडीए जाकर बताया तो थोड़ी-बहुत झाड़ियां काटी गई हैं। यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। बीडीए उपाध्यक्ष को लिखित शिकायत दे चुके हैं। - धीरेंद्र कुमार
हमारी मांग है कि सेक्टर-तीन में पानी की टंकी और सीवर लाइन चालू कराई जाए। झाड़ियां साफ करवाकर पार्कों को विकसित किया जाए। रोशनी के इंतजाम हों और सुरक्षा दी जाए। बीडीए व्यवस्था दुरुस्त करने का केवल आश्वासन देता है। - आरपी सिंह