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Bareilly News: नवोदय अस्पताल पर फिर जांच के लिए पहुंची बीडीए की टीम
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बरेली। मिनी बाइपास क्षेत्र में स्थित नवोदय अस्पताल की चौथी मंजिल को सील करने के चौथे दिन बुधवार को बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) की टीम फिर जांच करने पहुंची। इस बार अभिलेख खंगाले गए। एक ही प्रवेश-निकास द्वार होने के कारण अस्पताल के संचालन पर संकट खड़ा हो गया है। सवाल उठ रहा है कि आखिर किस आधार पर बीडीए की तरफ से नक्शा पास किया गया?
मानचित्र स्वीकृत कराए बिना ही नवोदय अस्पताल की चौथी मंजिल पर निर्माण कराया जा रहा था। शनिवार की रात अग्निकांड के बाद बीडीए की टीम ने जांच की तो पता चला कि चौथी मंजिल के निर्माण के लिए नक्शा पास नहीं है। इस पर अस्पताल को सील कर दिया गया। अमर उजाला की टीम ने बुधवार को पड़ताल की तो वहां ओपीडी हॉल मरीजों व तीमारदारों से भरा मिला। अंदर बरामदे में हर कमरे के बाहर लगी कुर्सियों पर मरीज व तीमारदार बैठे थे।
वहां एक ही गलियारे से अंदर जाने का रास्ता है। कभी भी आग लगने पर वहां बड़ा हादसा हो सकता है। बाहर ट्रांसफार्मर से सटाकर कैंटीन चलाई जा रही है। टीम ने जब चिकित्सक से बात करने का प्रयास किया तो उन्होंने बीडीए टीम के निरीक्षण और व्यस्तता का हवाला देकर मना कर दिया।
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निशाने पर बगैर नक्शे वाले भवन, 70 को नोटिस
बारादरी, मिनी बाइपास, प्रेमनगर, सीबीगंज, कोतवाली, बिथरी चैनपुर इलाकों में काफी संख्या में बगैर नक्शे के अस्पताल, व्यावसायिक व घरेलू भवनों का निर्माण कराया गया गया है। ये इमारतें बीडीए के निशाने पर हैं। एक माह में ऐसे 70 अस्पतालों व भवनों को नोटिस दिए जा चुके हैं। इसके लिए बीडीए ने एक सहायक अभियंता, चार अवर अभियंताओं व कर्मचारियों की टीम बनाई है जो ऐसे मामलों की निगरानी करेगी। टीम किला, कैंट, कोतवाली, सुभाषनगर, भमौरा, बिशारतगंज, हाफिजगंज, फतेहगंज पश्चिमी, सीबीगंज, प्रेमनगर, बारादरी, बिथरी चैनपुर, इज्जतनगर, भोजीपुरा समेत दो अन्य थाना क्षेत्रों में भ्रमण कर भवनों के नक्शे जांचेगी। प्राधिकरण की ओर से एक साल में 14 अवैध कॉलोनियों को जमींदोज किया जा चुका है। 76 की कंपाउंडिंग भी की गई है।
विद्युत सुरक्षा विभाग की जांच में खुलेगी पोल
विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता शहरी ललित कुमार ने बताया कि आग लगने के बाद जांच विद्युत सुरक्षा विभाग करता है। इसमें यह खुलासा होगा कि अस्पताल प्रबंधन ने निर्माण से पहले विद्युत सुरक्षा विभाग की एनओसी ली है या नहीं। आग लगने का कारण क्या है।
वर्जन
मानक के विपरीत जो भी भवन बने हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुराने व नए भवनों की समय-समय पर जांच कराई जाती है। इसमें अग्निशमन से लेकर विद्युत सुरक्षा विभाग के सभी मानकों का ध्यान रखा जाता है। - सौम्या पांडेय, उपाध्यक्ष, बीडीए
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मानचित्र स्वीकृत कराए बिना ही नवोदय अस्पताल की चौथी मंजिल पर निर्माण कराया जा रहा था। शनिवार की रात अग्निकांड के बाद बीडीए की टीम ने जांच की तो पता चला कि चौथी मंजिल के निर्माण के लिए नक्शा पास नहीं है। इस पर अस्पताल को सील कर दिया गया। अमर उजाला की टीम ने बुधवार को पड़ताल की तो वहां ओपीडी हॉल मरीजों व तीमारदारों से भरा मिला। अंदर बरामदे में हर कमरे के बाहर लगी कुर्सियों पर मरीज व तीमारदार बैठे थे।
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वहां एक ही गलियारे से अंदर जाने का रास्ता है। कभी भी आग लगने पर वहां बड़ा हादसा हो सकता है। बाहर ट्रांसफार्मर से सटाकर कैंटीन चलाई जा रही है। टीम ने जब चिकित्सक से बात करने का प्रयास किया तो उन्होंने बीडीए टीम के निरीक्षण और व्यस्तता का हवाला देकर मना कर दिया।
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निशाने पर बगैर नक्शे वाले भवन, 70 को नोटिस
बारादरी, मिनी बाइपास, प्रेमनगर, सीबीगंज, कोतवाली, बिथरी चैनपुर इलाकों में काफी संख्या में बगैर नक्शे के अस्पताल, व्यावसायिक व घरेलू भवनों का निर्माण कराया गया गया है। ये इमारतें बीडीए के निशाने पर हैं। एक माह में ऐसे 70 अस्पतालों व भवनों को नोटिस दिए जा चुके हैं। इसके लिए बीडीए ने एक सहायक अभियंता, चार अवर अभियंताओं व कर्मचारियों की टीम बनाई है जो ऐसे मामलों की निगरानी करेगी। टीम किला, कैंट, कोतवाली, सुभाषनगर, भमौरा, बिशारतगंज, हाफिजगंज, फतेहगंज पश्चिमी, सीबीगंज, प्रेमनगर, बारादरी, बिथरी चैनपुर, इज्जतनगर, भोजीपुरा समेत दो अन्य थाना क्षेत्रों में भ्रमण कर भवनों के नक्शे जांचेगी। प्राधिकरण की ओर से एक साल में 14 अवैध कॉलोनियों को जमींदोज किया जा चुका है। 76 की कंपाउंडिंग भी की गई है।
विद्युत सुरक्षा विभाग की जांच में खुलेगी पोल
विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता शहरी ललित कुमार ने बताया कि आग लगने के बाद जांच विद्युत सुरक्षा विभाग करता है। इसमें यह खुलासा होगा कि अस्पताल प्रबंधन ने निर्माण से पहले विद्युत सुरक्षा विभाग की एनओसी ली है या नहीं। आग लगने का कारण क्या है।
वर्जन
मानक के विपरीत जो भी भवन बने हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुराने व नए भवनों की समय-समय पर जांच कराई जाती है। इसमें अग्निशमन से लेकर विद्युत सुरक्षा विभाग के सभी मानकों का ध्यान रखा जाता है। - सौम्या पांडेय, उपाध्यक्ष, बीडीए