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गोकुल नगरी के लिए आठ साल बाद भी बीडीए को नहीं मिली जमीन
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दूध
- फोटो : PTI
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बरेली। हाईकोर्ट के आदेश पर रिहायशी इलाकों से डेयरियों को शहर से बाहर शिफ्ट किया जाना है। इसके तहत बीडीए को भी डेयरियों के लिए गोकुलनगरी विकसित करनी है। नगर निगम बोर्ड में गोकुलनगरी बसाने के लिए परसाखेड़ा गौंटिया में 4.906 हेक्टेयर जमीन का प्रस्ताव वर्ष 2012 में पास किया गया, लेकिन संबंधित भूमि अब तक बीडीए को ट्रांसफर नहीं की जा सकी है, जबकि शासन बार-बार इसकी अनुपालन रिपोर्ट बीडीए से मांग रहा है। बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल ने इस मामले में नगर आयुक्त को चिट्ठी भेजकर जमीन के हस्तांतरण की कार्रवाई यथाशीघ्र पूरी कराने को कहा है।
हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद रिहाइशी इलाकों से डेयरियों को हटाने का आदेश दिया था। इस पर बीडीए को भी अपनी सीमा में डेयरियों के लिए एक गोकुलनगरी विकसित करनी है। नगर निगम बोर्ड की दिसंबर, 2012 की बैठक में यह प्रस्ताव पारित हुआ था कि परसाखेड़ा गौंटिया के खसरा नंबर-1176 के रकबा 4.906 हेक्टेयर भूमि पर गोकुलनगरी विकसित करने के लिए बीडीए को हस्तांतरित कर दी जाए। इसके बाद प्राधिकरण ने नवंबर 2016, मई 2017 और जुलाई 2018 में नगर निगम के अधिकारियों को पत्र भेजकर संबंधित जमीन ट्रांसफर करने का अनुरोध किया था लेकिन यह कार्रवाई अब तक पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद बीडीए अब तक गोकुलनगरी प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर सका है। इसकी वजह से शहर में आबादी के बीच चल रहीं डेयरियों को गोकुलनगरी में स्थापित नहीं किया जा सका है। बीडीए के अफसर हलाकान हैं, क्योंकि उनसे बार-बार इसके अनुपालन की रिपोर्ट मांगी जा रही है। इसे लेकर बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल ने कुछ दिन पहले नगर आयुक्त अभिषेक आनंद को नगर निगम बोर्ड से स्वीकृत जमीन को जल्द बीडीए को सौंपने का आग्रह किया है। दिव्या मित्तल ने इस बाबत डीएम नितीश कुमार को भी पत्र भेजा है।
स्मार्ट सिटी में भी गोकुलनगरी का प्रस्ताव होने की वजह से संशय में बीडीए
गोकुलनगरी बसाने का प्रस्ताव स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट में भी शामिल किया गया है। ऐसे में बीडीए के अधिकारी भी संशय में है कि शहर की सीमा में क्या दो जगहों पर गोकुलनगरी विकसित होंगी। बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल का कहना है कि इसे लेकर वह जल्द नगर निगम के अधिकारियों और कमिश्नर के साथ बैठक करेंगी, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
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लेखपाल न होने से बीडीए नहीं कर पा रहा भूमि अधिग्रहण
19 दिसंबर को बीडीए बोर्ड की बैठक में यह दिक्कत सामने आई थी कि बीडीए में लेखपालों की तैनाती न होने से भूमि अर्जन करने में दिक्कत आ रही है। बीडीए उपाध्यक्ष ने डीएम से भू-अर्जन संबंधित कार्यों के लिए लेखपालों की प्रति नियुक्ति करने का आग्रह किया है।
हाईकोर्ट के आदेश पर बीडीए को गोकुलनगरी का विकास होना है। नगर निगम बोर्ड इसके लिए जमीन का प्रस्ताव पारित कर सका है लेकिन यह जमीन अब तक बीडीए को नहीं मिल सकी है। -दिव्या मित्तल, बीडीए उपाध्यक्ष
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हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद रिहाइशी इलाकों से डेयरियों को हटाने का आदेश दिया था। इस पर बीडीए को भी अपनी सीमा में डेयरियों के लिए एक गोकुलनगरी विकसित करनी है। नगर निगम बोर्ड की दिसंबर, 2012 की बैठक में यह प्रस्ताव पारित हुआ था कि परसाखेड़ा गौंटिया के खसरा नंबर-1176 के रकबा 4.906 हेक्टेयर भूमि पर गोकुलनगरी विकसित करने के लिए बीडीए को हस्तांतरित कर दी जाए। इसके बाद प्राधिकरण ने नवंबर 2016, मई 2017 और जुलाई 2018 में नगर निगम के अधिकारियों को पत्र भेजकर संबंधित जमीन ट्रांसफर करने का अनुरोध किया था लेकिन यह कार्रवाई अब तक पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद बीडीए अब तक गोकुलनगरी प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर सका है। इसकी वजह से शहर में आबादी के बीच चल रहीं डेयरियों को गोकुलनगरी में स्थापित नहीं किया जा सका है। बीडीए के अफसर हलाकान हैं, क्योंकि उनसे बार-बार इसके अनुपालन की रिपोर्ट मांगी जा रही है। इसे लेकर बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल ने कुछ दिन पहले नगर आयुक्त अभिषेक आनंद को नगर निगम बोर्ड से स्वीकृत जमीन को जल्द बीडीए को सौंपने का आग्रह किया है। दिव्या मित्तल ने इस बाबत डीएम नितीश कुमार को भी पत्र भेजा है।
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स्मार्ट सिटी में भी गोकुलनगरी का प्रस्ताव होने की वजह से संशय में बीडीए
गोकुलनगरी बसाने का प्रस्ताव स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट में भी शामिल किया गया है। ऐसे में बीडीए के अधिकारी भी संशय में है कि शहर की सीमा में क्या दो जगहों पर गोकुलनगरी विकसित होंगी। बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल का कहना है कि इसे लेकर वह जल्द नगर निगम के अधिकारियों और कमिश्नर के साथ बैठक करेंगी, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
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लेखपाल न होने से बीडीए नहीं कर पा रहा भूमि अधिग्रहण
19 दिसंबर को बीडीए बोर्ड की बैठक में यह दिक्कत सामने आई थी कि बीडीए में लेखपालों की तैनाती न होने से भूमि अर्जन करने में दिक्कत आ रही है। बीडीए उपाध्यक्ष ने डीएम से भू-अर्जन संबंधित कार्यों के लिए लेखपालों की प्रति नियुक्ति करने का आग्रह किया है।
हाईकोर्ट के आदेश पर बीडीए को गोकुलनगरी का विकास होना है। नगर निगम बोर्ड इसके लिए जमीन का प्रस्ताव पारित कर सका है लेकिन यह जमीन अब तक बीडीए को नहीं मिल सकी है। -दिव्या मित्तल, बीडीए उपाध्यक्ष