{"_id":"5dc1d2d48ebc3e5b4319d7ae","slug":"bda-bareilly-news-bly382867324","type":"story","status":"publish","title_hn":"योगी जी! अवैध कॉलोनियों पर शिकंजा सके बगैर नहीं उबर पाएगा रियल एस्टेट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
योगी जी! अवैध कॉलोनियों पर शिकंजा सके बगैर नहीं उबर पाएगा रियल एस्टेट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। सीएम योगी जी! जब तक अवैध कालोनियों पर शिकंजा नहीं सकेगा, रियल स्टेट को उबार पाना मुमकिन नहीं है। दिक्कत यह है कि रियल एस्टेट रेग्यूलेटिंग अथॉरिटी (रेरा) का डंडा नियम शर्तों पर काम करने वाले कॉलोनाइजर्स पर है। कमजोर नियमों का खामियाजा इन्हें ही भुगतान पड़ रहा है। बिल्डरों का कहना है कि रेरा की गाइडलाइंस के अनुसार काम करने पर कॉलोनी विकसित करने में काफी खर्च आता है। स्थानीय विकास प्राधिकरण से नक्शा पास कराने सहित दूसरी औपचारिकताएं पूरी करने पर मकानों की लागत भी बढ़ जाती है, जबकि अवैध कॉलोनियों को मनमाने तरीके से बसाया जाता है। लागत कम होने से इनके खरीदार स्वीकृत कॉलोनियों के मुकाबले कई गुना ज्यादा होते हैं।
आवासीय कॉलोनियों को नियमानुसार विकसित करने के लिए और खरीदारों को समय पर घर बनाकर देने के लिए रेरा के कड़े नियम लागू हैं। रेरा की गाइडलाइंस को पूरा करने के लिए किसी भी बिल्डर को पहले स्थानीय विकास प्राधिकरण से नक्शा मंजूर कराना होता है। इसके बाद कॉलोनियों का पूरा डिजाइन तैयार करने के साथ उसमें पब्लिक के लिए पार्क, पार्किंग, सड़क सहित दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करानी होती हैं। इसमें कड़ा प्रावधान यह भी है कि कॉलोनाइजर्स को हर तीन माह में रेरा को प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट देनी होती है। इसमें भी बताना होता है कि किस ग्राहक से कितनी रकम ली गई है और कितना काम हुआ है। कब तक कब्जा देंगे। कॉलोनाइजर्स का कहना है कि इन नियमों का अनुपालन करने के लिए आवासों का काफी कीमत बढ़ जाती है। जरा की चूक से रेरा से जुर्माना लगने का डर बना रहता है, जबकि अवैध कॉलोनियों पर कोई नियम लागू नहीं होता। विकास प्राधिकरण से अनुमति सहित दूसरी सुविधाओं पर कोई खर्च न होने से यहां आवासों की कीमत काफी कम होती है। इससे स्वीकृत के मुकाबले इन कॉलोनियों में आवासों की डिमांड कई गुना ज्यादा है।
रेरा के पास कार्रवाई का अधिकार नहीं, शिकायत करो तो 1000 जमा करो
अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई के लिए रेरा के पास अभी कोई अधिकारी नहीं है। अगर कोई शिकायत करना भी चाहे तो उसे रेरा की नियमावली के अनुसार 1000 रुपये जमा करने होंगे। इसके बार रेरा कार्रवाई के लिए स्थानीय विकास प्राधिकरण को निर्देशित करेगा। ऐसे में आमतौर पर रेरा के पास शिकायतें भी कम पहुंच रही है।
विज्ञापन
468 चिह्नित, बाकी सैकड़ों की संख्या में और भी अवैध कॉलोनियां
शहर में करीब 468 अवैध कॉलोनियां तो चिह्नित हैं। इन पर बीडीए कार्रवाई नहीं कर रहा, जबकि सैकड़ों अवैध कॉलोनियां भी विकसित हो रही हैं। इतना ही नहीं, बड़ा बाईपास पर दोनों ओर 100-100 मीटर ग्रीन बेल्ट है लेकिन वहां भी तमाम अवैध कॉलोनियां बन चुकी है तो कुछ विकसित की जा रही हैं।
बैंक अवैध कॉलोनियों में आवासीय ऋण नहीं देते हैं, जबकि शहर में करीब 70 फीसदी अवैध कॉलोनियां ही बनी हुई हैं। इससे होम लोन भी काफी कम हो पाते हैं, जबकि स्वीकृत कॉलोनियां की संख्या बढ़ जाए तो होम लोन की डिमांड खुद ब खुद बढ़ जाएगी। - ओपी बढ़ेरा, लीड बैंक मैनेजर
रियल एस्टेट की बड़ी दिक्कत यह है कि स्वीकृत कॉलोनियां महंगी होने की वजह से उनकी मांग कम है, जबकि अवैध कॉलोनियों से विकास का स्ट्रक्चर कमजोर हो रहा है। पब्लिक को सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। आने वाले समय में नियम बदलने से उन्हें और समस्याएं होंगी। रेरा को इस पर शिकंजा कसना चाहिए। - रमनदीप, अध्यक्ष, क्रेडाई
अवैध कॉलोनियों से नियमानुसार काम करने वाले बिल्डरों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। रेरा को इस पर शिकंजा कसने की जरूरत है, तभी स्वीकृत कॉलोनियों को बसाया जा सकता है। रेरा के नियमों में भी कुछ संशोधन होने चाहिए। -धर्मेंद्र गुप्ता, बिल्डर
विज्ञापन
आवासीय कॉलोनियों को नियमानुसार विकसित करने के लिए और खरीदारों को समय पर घर बनाकर देने के लिए रेरा के कड़े नियम लागू हैं। रेरा की गाइडलाइंस को पूरा करने के लिए किसी भी बिल्डर को पहले स्थानीय विकास प्राधिकरण से नक्शा मंजूर कराना होता है। इसके बाद कॉलोनियों का पूरा डिजाइन तैयार करने के साथ उसमें पब्लिक के लिए पार्क, पार्किंग, सड़क सहित दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करानी होती हैं। इसमें कड़ा प्रावधान यह भी है कि कॉलोनाइजर्स को हर तीन माह में रेरा को प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट देनी होती है। इसमें भी बताना होता है कि किस ग्राहक से कितनी रकम ली गई है और कितना काम हुआ है। कब तक कब्जा देंगे। कॉलोनाइजर्स का कहना है कि इन नियमों का अनुपालन करने के लिए आवासों का काफी कीमत बढ़ जाती है। जरा की चूक से रेरा से जुर्माना लगने का डर बना रहता है, जबकि अवैध कॉलोनियों पर कोई नियम लागू नहीं होता। विकास प्राधिकरण से अनुमति सहित दूसरी सुविधाओं पर कोई खर्च न होने से यहां आवासों की कीमत काफी कम होती है। इससे स्वीकृत के मुकाबले इन कॉलोनियों में आवासों की डिमांड कई गुना ज्यादा है।
विज्ञापन
रेरा के पास कार्रवाई का अधिकार नहीं, शिकायत करो तो 1000 जमा करो
अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई के लिए रेरा के पास अभी कोई अधिकारी नहीं है। अगर कोई शिकायत करना भी चाहे तो उसे रेरा की नियमावली के अनुसार 1000 रुपये जमा करने होंगे। इसके बार रेरा कार्रवाई के लिए स्थानीय विकास प्राधिकरण को निर्देशित करेगा। ऐसे में आमतौर पर रेरा के पास शिकायतें भी कम पहुंच रही है।
विज्ञापन
468 चिह्नित, बाकी सैकड़ों की संख्या में और भी अवैध कॉलोनियां
शहर में करीब 468 अवैध कॉलोनियां तो चिह्नित हैं। इन पर बीडीए कार्रवाई नहीं कर रहा, जबकि सैकड़ों अवैध कॉलोनियां भी विकसित हो रही हैं। इतना ही नहीं, बड़ा बाईपास पर दोनों ओर 100-100 मीटर ग्रीन बेल्ट है लेकिन वहां भी तमाम अवैध कॉलोनियां बन चुकी है तो कुछ विकसित की जा रही हैं।
बैंक अवैध कॉलोनियों में आवासीय ऋण नहीं देते हैं, जबकि शहर में करीब 70 फीसदी अवैध कॉलोनियां ही बनी हुई हैं। इससे होम लोन भी काफी कम हो पाते हैं, जबकि स्वीकृत कॉलोनियां की संख्या बढ़ जाए तो होम लोन की डिमांड खुद ब खुद बढ़ जाएगी। - ओपी बढ़ेरा, लीड बैंक मैनेजर
रियल एस्टेट की बड़ी दिक्कत यह है कि स्वीकृत कॉलोनियां महंगी होने की वजह से उनकी मांग कम है, जबकि अवैध कॉलोनियों से विकास का स्ट्रक्चर कमजोर हो रहा है। पब्लिक को सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। आने वाले समय में नियम बदलने से उन्हें और समस्याएं होंगी। रेरा को इस पर शिकंजा कसना चाहिए। - रमनदीप, अध्यक्ष, क्रेडाई
अवैध कॉलोनियों से नियमानुसार काम करने वाले बिल्डरों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। रेरा को इस पर शिकंजा कसने की जरूरत है, तभी स्वीकृत कॉलोनियों को बसाया जा सकता है। रेरा के नियमों में भी कुछ संशोधन होने चाहिए। -धर्मेंद्र गुप्ता, बिल्डर