फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Bats have been making friends with farmers for hundreds of years, China made enemies

सैकड़ों सालों से किसानों से दोस्ती निभा रहे हैं चमगादड़, चीन ने बना दिया दुश्मन

Sun, 19 Apr 2020 11:16 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Sun, 19 Apr 2020 11:16 AM IST
विज्ञापन
Bats have been making friends with farmers for hundreds of years, China made enemies
पेड़ों पर लटके चिमगादड़। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

रोस्टस और पेट्रोपस प्रजाति के जिन चमगादड़ों के शरीर से निकला कोरोना वायरस दुनिया भर में कहर ढा रहा है, बरेली में भी उनकी तादाद हजारों में है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेशक इन चमगादड़ों के शरीर में कई तरह के वायरस होते हैं लेकिन देश में ऐसी कोई मिसाल नहीं है जब उन्होंने इंसानों को कोई बड़ा नुकसान पहुंचाया हो। उल्टे फसलों में लगने वाले कीड़ों को खाकर वे सैकड़ों सालों से किसानों से दोस्ती निभाते आ रहे हैं।

विज्ञापन


प्रगतिशील किसान अनिल साहनी के मुताबिक रोस्टस यानी ओल्ड वर्ल्ड फ्रूट बैट यानी फल खाने वाला चमगादड़ बरेली में कैंट, आईवीआरआई, सीबीगंज और उनके आसपास पेड़ों की अधिकता वाले इलाकों में आसानी से देखे जा सकते हैं। कब्रिस्तान और श्मशान भूमि के पेड़ों पर भी सालों से इन चमगादड़ों का बसेरा है। साहनी कहते हैं कि अब तक इन चमगादड़ों का मनुष्यों पर कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है। दोनों प्रजातियों के चमगादड़ों में रोस्टस प्रजाति का चमगादड़ बहुतायत में हैं और पेट्रोपस यानी इंडियन फ्लाइंग फॉक्स प्रजाति के चमगादड़ अपेक्षाकृत काफी कम।
विज्ञापन


रोस्टस को किसानों का सबसे अच्छे मित्र माना जाता है। रात के अंधेरे में पेड़ों से उतरकर वे खेतों में तमाम तरह के कीड़े खाकर उन्हें फसलों को नुकसान पहुंचाने से रोकते हैं। ये चील व कौओं की तरह मांसाहारी भी नहीं होते। फलों को खाकर जीवित रहते हैं। आम जैसी फसलों के सीजन में किसानों को नुकसान भी होता है मगर कुल मिलाकर इन्हें दुश्मन मानने के बजाय दोस्त के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

भारत में चमगादड़ नहीं खाए जाते इसलिए खतरा नहीं पर शोध हो जाए तो बेहतर

आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रवीश अग्रवाल कहते हैं कि चीन में चमगादड़ों को खाए जाने की वजह से यह वायरस मनुष्य के शरीर में पहुंचकर संक्रमण की वजह बना लेकिन भारत में कहीं चमगादड़ नहीं खाए जाते हैं। ऐसे में इस चमगादड़ से भारत में कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका भी नहीं है। हालांकि अगर एहतियातन भ्रम दूर करने के लिए बरेली में पाए जाने वाले चमगादड़ों पर शोध करा लिया जाना बेहतर रहेगा।

चमगादड़ों के शरीर में हजारों सालों से है कोरोना वायरस

आईएमए उपाध्यक्ष डॉ. विनोद पागरानी का कहना है कि चमगादड़ों में कोरोना वायरस हजारों सालों से है मगर कभी मनुष्यों में ट्रांसफार्म नहीं हुआ। आईसीएमआर की कहती है कि करीब एक हजार सालों में एक बार ही ऐसा होने की आशंका है। देखा जाए तो मनुष्यों में जो संक्रमण फैला है वह नोवल कोरोना वायरस का है जो लोगों को गंभीर बीमार बनाता है और उनके संपर्क में आने वालों को भी चपेट में ले सकता है। बरेली में मिलने वाले चमगादड़ खतरनाक नहीं हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed