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ट्रिपल मर्डर: कुमार टाकीज में पिक्चर देखने के बाद डाली थी डकैती, पुलिस अफसर ने छैमारों की खासियत पर लिखी किताब
Fri, 08 Mar 2024 10:40 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 08 Mar 2024 10:40 AM IST
सार
बरेली में आयकर इंस्पेक्टर की मां और भाई-भाभी के हत्यारे आठ डकैतों को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) रवि कुमार दिवाकर ने डकैती का माल खरीदने वाले शाहजहांपुर के सराफ राजू वर्मा को उम्रकैद और पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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bareilly murder case
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बरेली की पॉश कॉलोनी सुरेश शर्मा नगर में हुए तिहरे हत्याकांड से सनसनी फैल गई थी। मुकदमे विवेचक गजेंद्र त्यागी ने बताया कि मुरादाबाद से बदमाश ट्रेन से डकैती डालने आए थे। इससे पहले गिरोह के सदस्य घर की रेकी कर चुके थे। मुरादाबाद से ये लोग उमरिया गांव में पहुंचे। वहां खाया-पिया और नकटिया नदी किनारे-किनारे पैदल चलकर शहर में आए थे।
यहां कुमार टाकीज में रात का शो देखा और अंधेरी रात में पैदल ही कॉलोनी में आ गए। रविकांत मिश्रा के घर के बगल में नया मकान बन रहा था। उसमें होकर जीने के सहारे नीचे उतरे और वारदात को अंजाम दिया।
इस दौरान गिरोह का एक सदस्य दरवाजे पर पहरा देता रहा। घटना के बाद ये लोग मुरादाबाद के रास्ते कुढ़का नगरिया के अपने डेरे पर चले गए थे। वहीं इन्होंने रकम का बंटवारा कर अपने-अपने डेरों की राह पकड़ ली थी।
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सराफ की डायरी से मिले बदमाशों के नाम-पते
पुलिस को पहली सफलता सराफ राजू वर्मा को पकड़ने से मिली। शाहजहांपुर निवासी सराफ राजू ने कैंट के मोहनपुर में दुकान खोल रखी थी और चोरी व लूट के जेवर खरीदता था। इन बदमाशों का काफी माल राजू ने ही खरीदा था। राजू के पास डकैती के जेवर व एक डायरी मिली थी। इस डायरी में गिरोह के सदस्यों के असली नाम व पते पुलिस को मिल गए। इसके बाद वाजिद को उठाया गया और फिर हसीन समेत बाकी आरोपी मिल गए।
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यहां कुमार टाकीज में रात का शो देखा और अंधेरी रात में पैदल ही कॉलोनी में आ गए। रविकांत मिश्रा के घर के बगल में नया मकान बन रहा था। उसमें होकर जीने के सहारे नीचे उतरे और वारदात को अंजाम दिया।
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इस दौरान गिरोह का एक सदस्य दरवाजे पर पहरा देता रहा। घटना के बाद ये लोग मुरादाबाद के रास्ते कुढ़का नगरिया के अपने डेरे पर चले गए थे। वहीं इन्होंने रकम का बंटवारा कर अपने-अपने डेरों की राह पकड़ ली थी।
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सराफ की डायरी से मिले बदमाशों के नाम-पते
पुलिस को पहली सफलता सराफ राजू वर्मा को पकड़ने से मिली। शाहजहांपुर निवासी सराफ राजू ने कैंट के मोहनपुर में दुकान खोल रखी थी और चोरी व लूट के जेवर खरीदता था। इन बदमाशों का काफी माल राजू ने ही खरीदा था। राजू के पास डकैती के जेवर व एक डायरी मिली थी। इस डायरी में गिरोह के सदस्यों के असली नाम व पते पुलिस को मिल गए। इसके बाद वाजिद को उठाया गया और फिर हसीन समेत बाकी आरोपी मिल गए।
त्यागी पर हमला किया, बदायूं के मुखबिर को मार डाला
तिहरे हत्याकांड के खुलासे में त्यागी के खास मुखबिर बदायूं के कादरचौक निवासी मुशर्रफ की बड़ी भूमिका थी। मुशर्रफ इसी छैमार प्रजाति से था और हसीन से उसकी रिश्तेदारी थी। त्यागी के मुताबिक एक साल बाद हसीन के चचेरे भाई कालिया ने सोते वक्त मुशर्रफ और उसकी पत्नी पर हमला किया। उन्हें पता लगा तो मुशर्रफ को बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया पर चौथे दिन उसने दम तोड़ दिया। उसकी पत्नी की जान बच गई थी।
तिहरे हत्याकांड के खुलासे में त्यागी के खास मुखबिर बदायूं के कादरचौक निवासी मुशर्रफ की बड़ी भूमिका थी। मुशर्रफ इसी छैमार प्रजाति से था और हसीन से उसकी रिश्तेदारी थी। त्यागी के मुताबिक एक साल बाद हसीन के चचेरे भाई कालिया ने सोते वक्त मुशर्रफ और उसकी पत्नी पर हमला किया। उन्हें पता लगा तो मुशर्रफ को बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया पर चौथे दिन उसने दम तोड़ दिया। उसकी पत्नी की जान बच गई थी।
त्यागी आज भी मुशर्रफ को याद करके रो देते हैं। उन्होंने बताया कि दूसरे मामले में छैमार पठान को पकड़ने के लिए उन्होंने मेरठ के शेखूपुरा में दबिश दी तो वहां शोर मच गया कि त्यागी आया है, इसे मार दो। छैमारों के हमले में उनके सारे दांत टूट गए। टीम के 27 सिपाही उन्हें छोड़कर भाग गए। वह कई दिन अस्पताल में भर्ती रहे। वहां जानलेवा हमले की रिपोर्ट कराई। छैमारों ने जेल से त्यागी को धमकी भरा जो पत्र लिखा, वह भी उनके पास सुरक्षित रखा है।
छैमारों की खासियत पर लिखी किताब
त्यागी और तत्कालीन सीओ तृतीय असित श्रीवास्तव ने कई घटनाओं पर काम के बाद संयुक्त रूप से छैमारों पर एक किताब लिखी है जो नए पुलिसकर्मियों के लिए बेहद काम आ सकती है। इसमें छैमारों के अलावा कंजड़ प्रजाति के अन्य वर्गों की खासियत और अपराध के तरीके बताए गए हैं। बताया है कि छैमार गिरोह के लोग आसानी से लूट नहीं करते हैं। वे सोते हुए लोगों के सिर पर वार करते हैं जिससे उनके बचने की गुंजाइश ही खत्म हो जाती है। ये जानवरों व पक्षियों की भाषा निकालना जानते हैं और ऐसा करके एक-दूसरे को संकेत देते हैं। हमला करते वक्त कम से कम छह वार करते हैं या घर में कम से कम छह लोगों को मारते हैं।
त्यागी और तत्कालीन सीओ तृतीय असित श्रीवास्तव ने कई घटनाओं पर काम के बाद संयुक्त रूप से छैमारों पर एक किताब लिखी है जो नए पुलिसकर्मियों के लिए बेहद काम आ सकती है। इसमें छैमारों के अलावा कंजड़ प्रजाति के अन्य वर्गों की खासियत और अपराध के तरीके बताए गए हैं। बताया है कि छैमार गिरोह के लोग आसानी से लूट नहीं करते हैं। वे सोते हुए लोगों के सिर पर वार करते हैं जिससे उनके बचने की गुंजाइश ही खत्म हो जाती है। ये जानवरों व पक्षियों की भाषा निकालना जानते हैं और ऐसा करके एक-दूसरे को संकेत देते हैं। हमला करते वक्त कम से कम छह वार करते हैं या घर में कम से कम छह लोगों को मारते हैं।
इसलिए नाम छैमार गिरोह
यह गैंग मूल रूप से पंजाब का छैमार गिरोह है। खानाबदोश घुमंतू डकैतों के गिरोह में छैमार सबसे खतरनाक हैं। आपराधिक प्रवृत्ति का यह गिरोह लोगों को बेरहमी से मारने के लिए सिर पर छह वार करता है। इसीलिए इस गैंग का नाम छैमार गिरोह है। इस गिरोह की महिलाएं भिखारी बनकर कॉलोनियों में रेकी करती हैं।
यह गैंग मूल रूप से पंजाब का छैमार गिरोह है। खानाबदोश घुमंतू डकैतों के गिरोह में छैमार सबसे खतरनाक हैं। आपराधिक प्रवृत्ति का यह गिरोह लोगों को बेरहमी से मारने के लिए सिर पर छह वार करता है। इसीलिए इस गैंग का नाम छैमार गिरोह है। इस गिरोह की महिलाएं भिखारी बनकर कॉलोनियों में रेकी करती हैं।
दोषी बोले- रहम किया जाए, डीजीसी बोले- मौत की सजा मिले
कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोषियों की ओर से उनके वकील ने कहा कि ये लोग गरीब है। इनमें दो महिलाएं भी हैं। एक दोषी पेशे से सराफ है। सराफ राजू वर्मा की एक छोटी बच्ची है। पत्नी के सिवाय परिवार में और कोई नहीं है। उसका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है। इसलिए इन पर रहम किया जाए और कम से कम सजा दी जाए।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोषियों की ओर से उनके वकील ने कहा कि ये लोग गरीब है। इनमें दो महिलाएं भी हैं। एक दोषी पेशे से सराफ है। सराफ राजू वर्मा की एक छोटी बच्ची है। पत्नी के सिवाय परिवार में और कोई नहीं है। उसका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है। इसलिए इन पर रहम किया जाए और कम से कम सजा दी जाए।
इसके जवाब में जिला शासकीय अधिवक्ता सुनीति कुमार पाठक, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दिगंबर पटेल की ओर से कहा गया कि तीन लोगों की हत्या पाशविक तरीके से की गई थी। इनमें से दो लोगों की उम्र काफी कम थी। उनके सामने पूरी जिंदगी पड़ी थी। तीनों हत्याएं डकैती डालने के उद्देश्य से शौकिया की गईं। इसलिए इन सभी को मौत की सजा दी जाए, जिससे समाज में सही संदेश जाए।
सरकारी वकील ने जताई खुशी, बोले- न्याय मिला
तिहरे हत्याकांड में फैसले पर सरकारी वकीलों से लेकर पीड़ित पक्ष के वकील काफी खुश दिखे। वहीं, दोषियों ने कहा कि मुसलमान होने की वजह से उनको जानबूझकर फंसाया गया। मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाते वक्त महिलाओं समेत अन्य दोषियों ने चेहरे ढंक रखे थे। मीडिया के सवालों से वह बचते दिखे।
तिहरे हत्याकांड में फैसले पर सरकारी वकीलों से लेकर पीड़ित पक्ष के वकील काफी खुश दिखे। वहीं, दोषियों ने कहा कि मुसलमान होने की वजह से उनको जानबूझकर फंसाया गया। मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाते वक्त महिलाओं समेत अन्य दोषियों ने चेहरे ढंक रखे थे। मीडिया के सवालों से वह बचते दिखे।
एक-दो दोषियों ने कहा कि हम जो बोलेंगे उसे मीडिया नहीं दिखाएगी। हम मुस्लिम हैं, इसलिए हमें फंसा दिया गया है। इधर, एडीजीसी दिगंबर पटेल ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि इस मामले में महिलाओं की भी भूमिका रही। पुलिस और वकीलों ने काफी पैरवी की थी। कोर्ट ने शानदार फैसला दिया है। उन्हें खुशी है कि दोषियों को अधिकतम सजा दी गई।