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बरेली सपा संगठन में भी भारी फेरबदल संभव
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Thu, 22 Sep 2016 01:53 AM IST
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटने के बाद बरेली में भी सपा के अंदर माहौल बदल चुका है। सपा की जिला और महानगर कार्यकारिणी के अलावा फ्रंटल संगठनों में भी भारी फेरबदल की अटकलें लगने लगी हैं। शिवपाल सिंह के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद वीरपाल समर्थक जोश में हैं, वहीं सीएम समर्थक पदाधिकारियों पर गाज गिरने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
चार साल से प्रदेश अध्यक्ष पद मुख्यमंत्री के ही पास था। इस दौरान निवर्तमान जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव की मर्जी न होने के बाद भी सपा के अंदर अरविंद यादव, संदेश कनौजिया जिला उपाध्यक्ष और हरीशंकर यादव जिला उपाध्यक्ष के साथ प्रवक्ता का पद भी हासिल कर लाए थे। सूरज यादव पहले सपा युवजन सभा के प्रदेश कोषाध्यक्ष बने और हाल ही में उनको मुलायम यूथ ब्रिगेड का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था। हालांकि दो दिन पहले मुख्यमंत्री के समर्थन में वह अपने इस पद से इस्तीफा दे चुके हैं। इनके अलावा अन्य वीरपाल विरोधी नेता भी सपा और उसके फ्रंटल संगठनों में विभिन्न पद पाने में कामयाब रहे।
बिथरी ब्लाक प्रमुख चुनाव में ऑडियो बम में जिला उपाध्यक्ष का पद गवांने वाले संदेश कनौजिया दोबारा जिला उपाध्यक्ष बन गए। इससे नाराज होकर जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव ने विधानसभा चुनाव की व्यस्तता का हवाला देकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उच्च स्तर पर पार्टी की आंतरिक कलह के चलते उनका इस्तीफा स्वीकार या अस्वीकार करने का निर्णय नहीं हो पाया। शिवपाल सिंह के प्रदेश अध्यक्ष बनते ही वीरपाल समर्थक जोश में आ गए हैं। अंदरूनी तौर पर अखिलेश समर्थकों की व्हाट्सएप, फेस बुक, ट्वीटर समेत सोशल मीडिया पर की जा रही टिप्पणी की रिपोर्ट भी शिवपाल सिंह को भेजी जा रही है। इससे वीरपाल विरोधियों पर कार्रवाई के आसार बढ़ गए हैं।
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मेरे राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हैं। जो पदाधिकारी इस्तीफे दे रहे हैं या बड़े नेताओं पर टिप्पणी कर रहे हैं। उनकी हैसियत अपना बूथ जिताने की नहीं है। नए प्रदेश अध्यक्ष जिस तरह के फैसले ले रहे हैं, वह चौंकाने वाले हैँ। बरेली के बारे में भी फैसला चौंकाने वाला होगा। वीरपाल सिंह यादव, निवर्तमान जिलाध्यक्ष सपा
सूरज ने खोला मोर्चा
मुलायम यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले सूरज यादव ने जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जिलाध्यक्ष का बिना नाम लिए प्रेस को जारी विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि जो लोग बूथ जिताने की बात कहते हैं वह ऐसे नेता है जो पार्टी और नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के नाम पर तमाम तरह के आर्थिक और राजनीतिक फायदे उठाते रहे। खुद आज तक एक भी चुनाव नहीं जीते। उन्होंने पार्टी प्रत्याशियों को हमेशा चुनाव हराने का काम किया। ऐसे नेताओं को सोच समझकर बयान देना चाहिए। ऐसे नेता केवल दिमाग से मुलायम अखिलेश जिंदाबाद करते हैं, दिल से नहीं।
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चार साल से प्रदेश अध्यक्ष पद मुख्यमंत्री के ही पास था। इस दौरान निवर्तमान जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव की मर्जी न होने के बाद भी सपा के अंदर अरविंद यादव, संदेश कनौजिया जिला उपाध्यक्ष और हरीशंकर यादव जिला उपाध्यक्ष के साथ प्रवक्ता का पद भी हासिल कर लाए थे। सूरज यादव पहले सपा युवजन सभा के प्रदेश कोषाध्यक्ष बने और हाल ही में उनको मुलायम यूथ ब्रिगेड का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था। हालांकि दो दिन पहले मुख्यमंत्री के समर्थन में वह अपने इस पद से इस्तीफा दे चुके हैं। इनके अलावा अन्य वीरपाल विरोधी नेता भी सपा और उसके फ्रंटल संगठनों में विभिन्न पद पाने में कामयाब रहे।
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बिथरी ब्लाक प्रमुख चुनाव में ऑडियो बम में जिला उपाध्यक्ष का पद गवांने वाले संदेश कनौजिया दोबारा जिला उपाध्यक्ष बन गए। इससे नाराज होकर जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव ने विधानसभा चुनाव की व्यस्तता का हवाला देकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उच्च स्तर पर पार्टी की आंतरिक कलह के चलते उनका इस्तीफा स्वीकार या अस्वीकार करने का निर्णय नहीं हो पाया। शिवपाल सिंह के प्रदेश अध्यक्ष बनते ही वीरपाल समर्थक जोश में आ गए हैं। अंदरूनी तौर पर अखिलेश समर्थकों की व्हाट्सएप, फेस बुक, ट्वीटर समेत सोशल मीडिया पर की जा रही टिप्पणी की रिपोर्ट भी शिवपाल सिंह को भेजी जा रही है। इससे वीरपाल विरोधियों पर कार्रवाई के आसार बढ़ गए हैं।
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सूरज ने खोला मोर्चा
मुलायम यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले सूरज यादव ने जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जिलाध्यक्ष का बिना नाम लिए प्रेस को जारी विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि जो लोग बूथ जिताने की बात कहते हैं वह ऐसे नेता है जो पार्टी और नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के नाम पर तमाम तरह के आर्थिक और राजनीतिक फायदे उठाते रहे। खुद आज तक एक भी चुनाव नहीं जीते। उन्होंने पार्टी प्रत्याशियों को हमेशा चुनाव हराने का काम किया। ऐसे नेताओं को सोच समझकर बयान देना चाहिए। ऐसे नेता केवल दिमाग से मुलायम अखिलेश जिंदाबाद करते हैं, दिल से नहीं।