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बरेलीः पांच घंटे में ही मिल रही रिपोर्ट,40 घंटे पहले खाली हुआ कोरोना वार्ड
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आईवीआरआई
- फोटो : सोशल नेटवर्क
आईवीआरआई में कोरोना संदिग्ध संक्रमितों के सैंपल जांच शुरू होने से मिल रही काफी राहत
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बरेली। आईवीआरआईमें सैंपल की जांच शुरू होने से स्वास्थ्य विभाग के साथ ही कोरोना के संदिग्ध संक्रमितों को भी बड़ी राहत मिली है। एक ओर जहां लखनऊ केजीएमयू भेजे जाने वाले सैंपल की रिपोर्ट 48 घंटे में मिल रही थी, वहीं अब यही रिपोर्ट पांच से छह घंटे में ही मिल रहीहै। इसी का नतीजा है कि सुभाषनगर के कोरोना संक्रमित आखिरी तीन मरीज करीब 40 घंटे पहले अपने घर पहुंचे और जिला कोरोना संक्रमितों से फिलहाल मुक्त है।
सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल के मुताबिक कोरोना के सैंपल की जांच की सुविधा जिले में होने से काफी राहत मिली है। पहले सैंपल को लाने ले जाने और सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी थी। लखनऊ तक का सफर तय करने के दौरान कोई अनहोनी का भी डर था। वहीं, हर दिन सैंपल भेजे जा रहे थे। इसमें अधिक खर्च भी हो रहा था और स्टाफ की व्यवस्तता भी रहती थी। अब आईवीआरआई में जांच होने से यह समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। आईवीआरआई विश्वसनीय संस्थान है और इसकी रिपोर्ट पर प्रमाणित है। जिस पर संदेश की कोई गुंजाइश नहीं है। आईडीएसपी प्रभारी डॉ. मीसम के मुताबिक कुछ किलोमीटर दूर लैब होने से सैंपल जल्दी पहुंचते हैं और शाम तक रिपोर्ट आ जाती है। इससे स्वास्थ्य विभाग के अफसरों समेत मरीजों को भी मानसिक रूप से काफी राहत मिलती है। बताया कि सैंपल लेने के बाद क्वारंटीन मरीज को रिपोर्ट का इंतजार रहता है। पहले 48 घंटे लगते थे, वहीं सैंपल डिस्ट्रैक्ट होने पर अगले 48 घंटे भी लग जाते थे। ऐसे में मरीज मानसिक तनाव में रहता था। जिससे अब उसे कुछ ही घंटो में निजात मिल जाती है।
बरेली मंडल के ही सैंपल की हो रही जांच
आईवीआरआई के निदेशक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि अभी बरेली मंडल के सभी जिलों के सैंपल की जांच की जा रही है। जांच के बाद सैंपल की रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी जाती है। बताया कि कितने सैंपल की जांच की जाए इसपर कोई पाबंदी नहीं है। जितने भी सैंपल आएंगे सभी की जांच की जानी है। अभी एक दिन में 50 सैंपल की जांच की जा सकती है। शनिवार को 29 सैंपल की जांच की गई और उसकी रिपोर्ट सीएमओ को दे दी गई है।
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सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल के मुताबिक कोरोना के सैंपल की जांच की सुविधा जिले में होने से काफी राहत मिली है। पहले सैंपल को लाने ले जाने और सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी थी। लखनऊ तक का सफर तय करने के दौरान कोई अनहोनी का भी डर था। वहीं, हर दिन सैंपल भेजे जा रहे थे। इसमें अधिक खर्च भी हो रहा था और स्टाफ की व्यवस्तता भी रहती थी। अब आईवीआरआई में जांच होने से यह समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। आईवीआरआई विश्वसनीय संस्थान है और इसकी रिपोर्ट पर प्रमाणित है। जिस पर संदेश की कोई गुंजाइश नहीं है। आईडीएसपी प्रभारी डॉ. मीसम के मुताबिक कुछ किलोमीटर दूर लैब होने से सैंपल जल्दी पहुंचते हैं और शाम तक रिपोर्ट आ जाती है। इससे स्वास्थ्य विभाग के अफसरों समेत मरीजों को भी मानसिक रूप से काफी राहत मिलती है। बताया कि सैंपल लेने के बाद क्वारंटीन मरीज को रिपोर्ट का इंतजार रहता है। पहले 48 घंटे लगते थे, वहीं सैंपल डिस्ट्रैक्ट होने पर अगले 48 घंटे भी लग जाते थे। ऐसे में मरीज मानसिक तनाव में रहता था। जिससे अब उसे कुछ ही घंटो में निजात मिल जाती है।
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बरेली मंडल के ही सैंपल की हो रही जांच
आईवीआरआई के निदेशक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि अभी बरेली मंडल के सभी जिलों के सैंपल की जांच की जा रही है। जांच के बाद सैंपल की रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी जाती है। बताया कि कितने सैंपल की जांच की जाए इसपर कोई पाबंदी नहीं है। जितने भी सैंपल आएंगे सभी की जांच की जानी है। अभी एक दिन में 50 सैंपल की जांच की जा सकती है। शनिवार को 29 सैंपल की जांच की गई और उसकी रिपोर्ट सीएमओ को दे दी गई है।
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