Bareilly: यूपी में सख्ती, इसलिए बिहार-बंगाल में फैलाया पशु तस्करी का जाल, मुठभेड़ में पकड़े गए तस्कर
इज्जतनगर थाना क्षेत्र में शुक्रवार आधी विलय धाम के पास रात पुलिस और गो तस्करों के बीच मुठभेड़ हो गई थी। इस दौरान पुलिस ने दो तस्करों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की पूछताछ में दोनों ने चौंकाने वाली बातें बताई हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बरेली के इज्जतनगर इलाके में शुक्रवार रात मुठभेड़ में पकड़े गए पशु तस्करों ने पुलिस को बताया कि वह छुट्टा पशुओं की तस्करी करते थे। यूपी में गो तस्करी पर सख्ती की वजह से यहां खरीदफरोख्त नहीं करते। यहां से पशुओं को पकड़कर बंगाल और बिहार ले जाकर बेच देते थे। कानूनी कार्रवाई के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया है।
एक सप्ताह पहले बड़ा बाइपास स्थित लालपुर चौराहे पर चेकिंग के दौरान आरटीओ ने गोवंशीय पशुओं से भरा ट्रक पकड़ा था। चालक कूदकर भाग गया था। इज्जतनगर थाने में पशु क्रूरता की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस के मुताबिक शुक्रवार को इसी ट्रक को छुड़ाने बिजनौर निवासी अंतरराज्यीय तस्कर कादिर और मुजफ्फनगर का नाजिम बरेली आए थे। ट्रक नहीं छूटा तो आरोपी बड़ा बाइपास पर चले गए। वहां काफी संख्या में गोवंशीय पशु देखकर तस्करों के मन में लालच आ गया।
ये भी पढ़ें- UP News: मुस्लिम से हिंदू बनी खुशबू को अगवा कर ले गए मायके वाले, बरेली के युवक से किया था प्रेम विवाह
तस्करों ने विलयधाम के पास पशुओं को इकट्ठा कर साथी कुलदीप सिंह को ट्रक का इंतजाम करने के लिए कहा। इस बीच वहां पुलिस पहुंच गई। कदीर ने पुलिस पार्टी पर फायर झोंक दिया। इससे इंस्पेक्टर इज्जतनगर जयशंकर सिंह और सिपाही विशाल घायल हो गए। पुलिस ने जवाबी फायरिंग की तो पैर में गोली लगने से कदीर घायल हो गया। पुलिस ने कदीर और नाजिम को गिरफ्तार कर लिया। तस्करों का साथी पंजाब का कुलदीप सिंह उर्फ सागर मौका पाकर भाग गया।
फर्जी पते पर ट्रक खरीदकर करते थे तस्करी
तस्कर कदीर के खिलाफ यूपी, जम्मू कश्मीर, पंजाब और हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में मुकदमे दर्ज हैं। कदीर के साथी पंजाब के अमृतसर निवासी कुलदीप सिंह उर्फ सागर और तरनतारन के गुरप्रीत सिंह उर्फ गौरा के पास फर्जी पते पर खरीदे गए ट्रक हैं। इन ट्रकों पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर कदीर विभिन्न राज्यों में गो तस्करी करता है।
राज्यों के हिसाब से तस्कर नंबर प्लेट का इस्तेमाल करते थे और टोल प्लाजा आने पर नंबर प्लेट बदल लेते थे। ट्रक का इंजन और चेसिस नंबर भी मिटा दिया जाता था। ट्रक के आगे एक कार में तस्करों के साथी चलते थे और खतरा होने पर ट्रक चालक को सूचित करते थे। पकड़े गए पशु तस्करों पर पुलिस धोखाधड़ी की धारा भी लगाएगी।
साथियों को देता था मोटा कमीशन
कदीर अपने साथी सागर और गौरा को एक बार पशु पहुंचाने के बदले एक लाख रुपये देता था। ट्रक चालक नाजिम को प्रति चक्कर दस हजार रुपये दिए जाते थे। आरोपी 40 हजार रुपये प्रति गोवंश के हिसाब से पशुओं को बेच देते थे। छुट्टा पशुओं को तस्करों से बचाना मुश्किल होता है। छुट्टा पशुओं को रखने की उचित व्यवस्था न होने से तस्करों को आसान शिकार मिल जाता है।