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बरेली: कमजोर हुआ बीएसएनएल, 177 कर्मियों की हुई विदाई
सार
- आधे से ज्यादा कर्मचारियों के वीआरएस लेने से बीएसएनएल की सेवाएं बाधित होने की आशंका
- 342 के स्टाफ में से 177 ने लिया वीआरएस, सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों ने सरकार को माना दोषी
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वीआरएस लेने वाले बीएसएनएल के कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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विस्तार
बरेली। ‘कनेक्टिंग इंडिया’ टैगलाइन के साथ देशवासियों को विशाल सूचना तंत्र मुहैया कराने वाला बीएसएनएल (भारत दूर संचार निगम लिमिटेड) अपने ही कर्मचारियों को जोड़ने में असफल हो रहा है। शुक्रवार को बरेली बीएसएनएल के मुख्यालय और उपकेंद्रों से आधे से ज्यादा अफसर और कर्मचारियों ने सामूहिक वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) ले लिया। पहले से ही जर्जर हालत में चल रही बीएसएनएल की सेवाएं और बाधित होने से बरेली के लाखों उपभोक्ताओं को खासी समस्या का सामना करना पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
दरअसल, पिछले कई साल से बीएसएनएल घाटे में चल रहा था। इसकी एक बड़ी वजह थी, कमाई कम और खर्च ज्यादा। अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन पर भारी भरकम राशि खर्च होती थी। इस घाटे से उबरने के लिए 50 साल से अधिक उम्र वालों की छंटनी के लिए वीआरएस योजना लाई गई, जिसमें बरेली में तैनात 342 में 177 अफसर और कर्मचारियों ने वीआरएस ले लिया। शुक्रवार को रिटायरमेंट लेने के लिए सुबह से ही कार्यालय में कर्मचारियों की आवाजाही जारी रही। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी अपने संगठन से पंजीकृत कर्मचारियों को नई चुनौतियों के बाबत तैयार करने के लिए ढांढस बंधाने में जुटे थे। कैंट स्थित बीएसएनएल कार्यालय में नेशनल फेडरेशन ऑफ टेलीकॉम एम्प्लाई के बैनर तले 42 कर्मचारियों ने सेवानिवृत्ति ली। इन सभी को फूल माला पहनाकर अंग वस्त्र भेंट किए गए। सामूहिक रूप से बड़ी संख्या में कर्मचारियों की सेवानिवृत्त प्रक्रिया के चलते सभी कार्यालयों में कामकाज लगभग ठप सा रहा। एक ओर एकाउंट में सैलरी और अन्य बकायों का भुगतान, नो ड्यूज संबंधी प्रक्रिया चल रही थी, तो वहीं अफसर वीआरएस के लेटर जारी करने में जुटे थे। इस दौरान शहर भर से आ रही तमाम शिकायतें नोट की जा रहीं थीं, लेकिन उनके निस्तारण की कोई पहल नहीं की गई।
31 मार्च तक होगा पूरा भुगतान
वीआरएस लिए अफसरों और कर्मियों को देयकों के भुगतान के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। निगम के अफसरों ने बताया कि 15 फरवरी तक लीव इनकैशमेंट का भुगतान होगा। उसके बाद 31 मार्च तक वीआरएस पैकेज दिया जाएगा, जबकि साठ वर्ष पूरा होने पर ग्रेच्युटी उनके खाते में भेजी जाएगी।
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काम बंद, दुरुस्त करा रहे रिकॉर्ड
करीब हफ्ते भर से बीएसएनएल में उपभोक्ताओं से जुड़े काम लगभग ठप हैं। किसी का लैंडलाइन नंबर बंद है या टॉवर में गड़बड़ी है वह ठीक नहीं हो पा रही हैं क्योंकि इस काम को करने वाले कर्मचारियों ने पहले ही वीआरएस के लिए आवेदन किया हुआ था। ऐसे में वह रिटायरमेंट से जुड़े अपने कागजात दुरुस्त करवाने में व्यस्त रहे।
दो साल से नहीं मिल रहीं सुविधाएं
वीआरएस लेने वाले कर्मचारियों के मुताबिक शासनादेश के तहत कर्मचारियों को मिलने वाली लीव ट्रैवलिंग अलाउंस (एलटीए), मेडिकल क्लेम, ट्रैवल अलाउंस समेत ड्यूज आदि के भुगतान दो साल से नहीं मिल रहे हैं। साथ ही पिछले दो माह से वीआरएस की सूची में दर्ज कर्मचारियों और अफसरों का वेतन भी रोक दिया गया है।
कार्य की अधिकता भी बनी वजह
50 साल से अधिक उम्र की बाध्यता के बाद भी कई कर्मचारी वीआरएस नहीं लेना चाहते थे। मगर, कार्यालय में दस में आठ कर्मचारियों के वीआरएस लेने के चलते दो पर पूरा कार्यभार होने से कार्य को संभालने में असमर्थता और कार्रवाई के खौफ की वजह से भी कई कर्मचारियों ने वीआरएस लेने में ही भलाई समझी।
सरकार ही कमजोर बना रही बीएसएनएल
वीआरएस लेने के बाद कर्मचारी केंद्र सरकार के रवैए पर जमकर बरसे। उनके मुताबिक बीएसएनएल आर्थिक मंदी का शिकार नहीं ह,ै लेकिन केंद्र सरकार उसे कमजोर बना रही है। सरकार का मकसद बीएसएनएल की संपत्तियों को बेचकर निजी कंपनियों को बढ़ावा देने का है। इसी वजह से पिछले दो सालों से सुविधाएं देना बंद कीं और स्टाफ कम करने लगी। 50 साल से अधिक के कर्मचारियों छंटनी की ताकि बड़ा नेटवर्क ध्वस्त हो और उपभोक्ता कम होने के बाद बीएसएनएल की कार्यशैली को दोषी बताकर उसे बंद कर देने की मंशा है।
आउटसोर्सिंग से लिया जाएगा काम
अफसरों का दावा है कि स्टाफ आधा होने के बाद भी सेवाओं पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। तकनीकी कार्यों की टीम अभी पर्याप्त है। हालांकि, उन्होंने फील्ड वर्क में समस्या आने की आशंका जताई है। उनके मुताबिक ऑपरेटर और लाइनमैन के वीआरएस के बाद फाल्ट, लाइन बिछाने या जोड़ने संबंधी ब्राडबैंड, लैंडलाइन सुविधा प्रभावित होगी। ऐसे में आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों की भर्ती होगी। हालांकि संविदाकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया कब शुरू होगी, इस बाबत अभी कोई निर्णय न होने से उपभोक्ताओं को लंबे समय तक समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।
बीएसएनएल: किस सेवा के कितने उपभोक्ता
- 7169 लैंडलाइन
- 3178 ब्राडबैंड
- 321726 प्रीपेड
- 4329 पोस्टपेड
सरकार की मंशा बीएसएनएल को निजी हाथों में सौंपने या फिर बंद करने की है। इसलिए काफी संख्या में कर्मचारियों को सेवानिवृत्त कर रही है ताकि कमजोर बताकर निगम को ही बंद किया जा सके। - रामचंद्र, लाइनमैन
बीएसएनएल कब ठप हो जाए इसका कोई भरोसा नहीं। वीआरएस लेने से गाइडलाइन के मुताबिक धनराशि मिल रही है, बाद में पता नहीं क्या हो। इसलिए वीआरएस लेना पड़ा। - सोमपाल सिंह, कार्यालय अधीक्षक
निजी कंपनी को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ही बीएसएनएल को बंद कराना चाहती है। दो माह से सैलरी नहीं मिली और सुविधाएं बंद करना सरकार की मंशा साफ कर रही है। - रामनारायण भारद्वाज, कार्यालय अधीक्षक
एक साथ काफी संख्या में कर्मचारियों के वीआरएस लेने से शिकायतों की निस्तारण प्रक्रिया बाधित हो सकती है। तकनीकी संबंधी कार्यों के लिए इंजीनियर्स भी भी मौजूद हैं, लेकिन फील्डवर्क प्रभावित होगा। आउटसोर्सिंग से स्टाफ भरा जाएगा, लेकिन प्रक्रिया कब शुरू होगी, यह बाद में निर्णय होगा।
- अश्वनी सक्सेना, डीजीएम, बीएसएनएल
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दरअसल, पिछले कई साल से बीएसएनएल घाटे में चल रहा था। इसकी एक बड़ी वजह थी, कमाई कम और खर्च ज्यादा। अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन पर भारी भरकम राशि खर्च होती थी। इस घाटे से उबरने के लिए 50 साल से अधिक उम्र वालों की छंटनी के लिए वीआरएस योजना लाई गई, जिसमें बरेली में तैनात 342 में 177 अफसर और कर्मचारियों ने वीआरएस ले लिया। शुक्रवार को रिटायरमेंट लेने के लिए सुबह से ही कार्यालय में कर्मचारियों की आवाजाही जारी रही। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी अपने संगठन से पंजीकृत कर्मचारियों को नई चुनौतियों के बाबत तैयार करने के लिए ढांढस बंधाने में जुटे थे। कैंट स्थित बीएसएनएल कार्यालय में नेशनल फेडरेशन ऑफ टेलीकॉम एम्प्लाई के बैनर तले 42 कर्मचारियों ने सेवानिवृत्ति ली। इन सभी को फूल माला पहनाकर अंग वस्त्र भेंट किए गए। सामूहिक रूप से बड़ी संख्या में कर्मचारियों की सेवानिवृत्त प्रक्रिया के चलते सभी कार्यालयों में कामकाज लगभग ठप सा रहा। एक ओर एकाउंट में सैलरी और अन्य बकायों का भुगतान, नो ड्यूज संबंधी प्रक्रिया चल रही थी, तो वहीं अफसर वीआरएस के लेटर जारी करने में जुटे थे। इस दौरान शहर भर से आ रही तमाम शिकायतें नोट की जा रहीं थीं, लेकिन उनके निस्तारण की कोई पहल नहीं की गई।
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31 मार्च तक होगा पूरा भुगतान
वीआरएस लिए अफसरों और कर्मियों को देयकों के भुगतान के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। निगम के अफसरों ने बताया कि 15 फरवरी तक लीव इनकैशमेंट का भुगतान होगा। उसके बाद 31 मार्च तक वीआरएस पैकेज दिया जाएगा, जबकि साठ वर्ष पूरा होने पर ग्रेच्युटी उनके खाते में भेजी जाएगी।
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काम बंद, दुरुस्त करा रहे रिकॉर्ड
करीब हफ्ते भर से बीएसएनएल में उपभोक्ताओं से जुड़े काम लगभग ठप हैं। किसी का लैंडलाइन नंबर बंद है या टॉवर में गड़बड़ी है वह ठीक नहीं हो पा रही हैं क्योंकि इस काम को करने वाले कर्मचारियों ने पहले ही वीआरएस के लिए आवेदन किया हुआ था। ऐसे में वह रिटायरमेंट से जुड़े अपने कागजात दुरुस्त करवाने में व्यस्त रहे।
दो साल से नहीं मिल रहीं सुविधाएं
वीआरएस लेने वाले कर्मचारियों के मुताबिक शासनादेश के तहत कर्मचारियों को मिलने वाली लीव ट्रैवलिंग अलाउंस (एलटीए), मेडिकल क्लेम, ट्रैवल अलाउंस समेत ड्यूज आदि के भुगतान दो साल से नहीं मिल रहे हैं। साथ ही पिछले दो माह से वीआरएस की सूची में दर्ज कर्मचारियों और अफसरों का वेतन भी रोक दिया गया है।
कार्य की अधिकता भी बनी वजह
50 साल से अधिक उम्र की बाध्यता के बाद भी कई कर्मचारी वीआरएस नहीं लेना चाहते थे। मगर, कार्यालय में दस में आठ कर्मचारियों के वीआरएस लेने के चलते दो पर पूरा कार्यभार होने से कार्य को संभालने में असमर्थता और कार्रवाई के खौफ की वजह से भी कई कर्मचारियों ने वीआरएस लेने में ही भलाई समझी।
सरकार ही कमजोर बना रही बीएसएनएल
वीआरएस लेने के बाद कर्मचारी केंद्र सरकार के रवैए पर जमकर बरसे। उनके मुताबिक बीएसएनएल आर्थिक मंदी का शिकार नहीं ह,ै लेकिन केंद्र सरकार उसे कमजोर बना रही है। सरकार का मकसद बीएसएनएल की संपत्तियों को बेचकर निजी कंपनियों को बढ़ावा देने का है। इसी वजह से पिछले दो सालों से सुविधाएं देना बंद कीं और स्टाफ कम करने लगी। 50 साल से अधिक के कर्मचारियों छंटनी की ताकि बड़ा नेटवर्क ध्वस्त हो और उपभोक्ता कम होने के बाद बीएसएनएल की कार्यशैली को दोषी बताकर उसे बंद कर देने की मंशा है।
आउटसोर्सिंग से लिया जाएगा काम
अफसरों का दावा है कि स्टाफ आधा होने के बाद भी सेवाओं पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। तकनीकी कार्यों की टीम अभी पर्याप्त है। हालांकि, उन्होंने फील्ड वर्क में समस्या आने की आशंका जताई है। उनके मुताबिक ऑपरेटर और लाइनमैन के वीआरएस के बाद फाल्ट, लाइन बिछाने या जोड़ने संबंधी ब्राडबैंड, लैंडलाइन सुविधा प्रभावित होगी। ऐसे में आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों की भर्ती होगी। हालांकि संविदाकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया कब शुरू होगी, इस बाबत अभी कोई निर्णय न होने से उपभोक्ताओं को लंबे समय तक समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।
बीएसएनएल: किस सेवा के कितने उपभोक्ता
- 7169 लैंडलाइन
- 3178 ब्राडबैंड
- 321726 प्रीपेड
- 4329 पोस्टपेड
सरकार की मंशा बीएसएनएल को निजी हाथों में सौंपने या फिर बंद करने की है। इसलिए काफी संख्या में कर्मचारियों को सेवानिवृत्त कर रही है ताकि कमजोर बताकर निगम को ही बंद किया जा सके। - रामचंद्र, लाइनमैन
बीएसएनएल कब ठप हो जाए इसका कोई भरोसा नहीं। वीआरएस लेने से गाइडलाइन के मुताबिक धनराशि मिल रही है, बाद में पता नहीं क्या हो। इसलिए वीआरएस लेना पड़ा। - सोमपाल सिंह, कार्यालय अधीक्षक
निजी कंपनी को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ही बीएसएनएल को बंद कराना चाहती है। दो माह से सैलरी नहीं मिली और सुविधाएं बंद करना सरकार की मंशा साफ कर रही है। - रामनारायण भारद्वाज, कार्यालय अधीक्षक
एक साथ काफी संख्या में कर्मचारियों के वीआरएस लेने से शिकायतों की निस्तारण प्रक्रिया बाधित हो सकती है। तकनीकी संबंधी कार्यों के लिए इंजीनियर्स भी भी मौजूद हैं, लेकिन फील्डवर्क प्रभावित होगा। आउटसोर्सिंग से स्टाफ भरा जाएगा, लेकिन प्रक्रिया कब शुरू होगी, यह बाद में निर्णय होगा।
- अश्वनी सक्सेना, डीजीएम, बीएसएनएल