नशे के सौदागर: बरेली में बरामद प्रतिबंधित दवाओं की कीमत थी तीन करोड़, आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक को भेजा जेल
पुलिस ने मंगलवार को आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक मुन्ने को जेल भेजा गया। उसने अपने भाई बबलू को इस धंधे का सरगना बताया। प्रतिबंधित दवाओं की कीमत तीन करोड़ रुपये बताई गई है।
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बरेली में एएनटीएफ (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने सोमवार रात किला मेडिकल स्टोर व सीबीगंज स्थित गोदाम में छापा मारकर प्रतिबंधित दवाओं का जखीरा पकड़ा था। मंगलवार को आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक मुन्ने को जेल भेजा गया। उसने अपने भाई बबलू को इस धंधे का सरगना बताया। प्रतिबंधित दवाओं की कीमत तीन करोड़ रुपये बताई जा रही है। मौके से 1.6 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं।
एएनटीएफ के विकास यादव के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने पहले किला मेडिकल स्टोर और फिर सीबीगंज के महेशपुर गांव में गली नंबर एक के मकान में बने गोदाम में छापा मारा था। आरोपी मुन्ने की निशानदेही पर 233 पेटी में 23,276 बोतल कोडीन फॉस्फेट कफ सिरप, आठ पेटी में 1,09584 ट्रामाडॉल कैप्सूल, पांच पेटी में 2,20200 अल्प्राजोलम टेबलेट, दो डिब्बों में 1800 नाइट्राजेपाम टेबलेट, एक मोबाइल फोन और 1,66,630 रुपये बरामद किए गए हैं।
छापा पड़ा तो दूसरा स्टोर बंद कर भागा
मुन्ने ने बताया कि वह गांव महेशपुर का निवासी है। वह किला क्रॉसिंग के पास किला मेडिकल स्टोर चलाता है। वह नशीली दवाइयों को सीबीगंज स्थित गोदाम में रखता है। यहीं से किला मेडिकल स्टोर पर रखकर बेचता है। आरोप लगाया कि उसका भाई बबलू उर्फ कमर अली इस धंधे का सरगना है। बबलू के संपर्क में कुछ लोग हैं जो उसे नशे की दवाइयों की खेप लाकर देते हैं। बबलू की उसके स्टोर के पीछे वाली गली में अपना मेडिकल स्टोर नाम से दुकान है। जैसे ही उसके मेडिकल स्टोर पर छापा पड़ा तो बबलू अपना स्टोर बंद करके फरार हो गया।
किडनी, लिवर भी हो सकते हैं खराब
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि नाइट्राजेपाम, अल्प्राजोलम दवाएं बेंजोडायजेपाइन समूह की हैं जो दर्द निवारक होती हैं। ट्रामाडॉल, कोडीन फॉस्फेट दवाएं ओपियोइड समूह की हैं, जो तंत्रिका तंत्र का संतुलन बनाकर अनिद्रा व चिंता से निजात दिलाती हैं। लंबे समय तक इन दवाओं के सेवन से इन्हें छोड़ना मुश्किल है। अगर अचानक छोड़ते हैं तो कई शारीरिक समस्याएं होती हैं। नहीं छोड़ते हैं तो किडनी, लिवर में परेशानी, मतिभ्रम, मानसिक विक्षिप्तता व अन्य दिक्कतें होती हैं। व्यक्ति आत्मघाती कदम उठा सकता है।
फुटकर दवा विक्रेता उठा चुके हैं मुद्दा
तीन सप्ताह पहले बरेली रिटेल केमिस्ट वेलफेयर सोसायटी ने सहायक आयुक्त औषधि से मुलाकात कर पंजीकरण के बिना संचालित दुकानों पर दवाओं के अवैध भंडारण, प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पर अंकुश लगाने की मांग की थी। उन्होंने ग्रामीण इलाकों में बड़ी तादाद में झोलाछाप के जरिये नारकोटिक्स दवाओं की बिक्री की आशंका भी जताई थी। अध्यक्ष विजय श्रीवास्तव ने अवैध कारोबार पर कार्रवाई की मांग की है।
दवाओं का दुष्प्रभाव
ट्रामाडॉल : चक्कर, मितली, कब्ज है। लगातार सेवन से लिवर, किडनी खराब हो सकती हैं।
अल्प्राजोलम : भूलना, चक्कर, शारीरिक परेशानी होती है। लगातार सेवन निराशा व आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ती है।
कोडीन फॉस्फेट : सुस्ती, सांस फूलना, पसीना आना है। ज्यादा सेवन से लिवर, किडनी खराब होती है।
नाइट्राजेपम : मतिभ्रम, सिरदर्द, उबासी हैं। ज्यादा सेवन से ग्लूकोमा, किडनी, लिवर रोग हो सकते हैं।
एसएसपी घुले सुशील चंद्रभान ने बताया कि नशे व प्रतिबंधित दवाओं को बेचने वाले मेडिकल स्टोर मालिक को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। उसका भाई भी आरोपी है, दोनों के खिलाफ सीबीगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। अन्य आरोपी प्रकाश में आए तो गिरफ्तारी की जाएगी।