फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Bank NPA may double

दोगुने से ज्यादा हो सकता है बैंकों का एनपीए

Wed, 14 Mar 2018 06:16 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Wed, 14 Mar 2018 06:16 PM IST
विज्ञापन
Bank NPA may double
पीएनबी में बड़े घोटाले के बाद बैंकों की स्थिति को लेकर हर कोई चिंतित है। ग्राहक और कर्मचारी दोनों। जहां ग्राहकों में थोड़ी असुरक्षा की भावना है वहीं बैंक के कर्मचारी भी चिंतित हैं। उन्हें बैंक के एनपीए (नान परफार्मिंग एसेस्ट्स) को लेकर चिंता है। उनकी चिंता जायज भी है। बैंकों का एनपीए जो बताया जा रहा है, उसके सापेक्ष यह दोगुना हो सकता है। 
विज्ञापन

बैंकों द्वारा दिए गए ऋण की रिकवरी न होने से उनका एनपीए बढ़ता जा रहा है। मगर बैंक इसे छिपा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि यह आंकड़ा घोषित तौर पर 6-7 फीसदी है, मगर यह दोगुने से भी ज्यादा हो सकता है। माना जा रहा है यह 15-20 फीसदी तक हो सकता है। जबकि बैंकों की तरफ से निर्धारित मानक एनपीए 3-4 फीसदी ही होता है। बढ़ रहे एनपीए के पीछे कारण है कि बड़े किसानों और घरानों को दिया गए ऋण की वसूली नहीं हो पाना। एनपीए छिपाने का सबसे बड़ा खेल केसीसी किसानों के साथ होता है। किसानों द्वारा लिया गया लोन पलटी करके नए लोन के रूप में बढ़ाकर दे दिया जाता है। काश्तकार को जानकारी न होने के कारण उन्हें नए लोन के रूप में बढ़ा हुआ पैसा दे दिया जाता है। इससे उस खाते पर एनपीए उस वर्ष के लिए शून्य हो जाता है। जबकि बड़े किसान और घराने लोन वापस ही नहीं करते हैं। यही सबसे बड़ा कारण है एनपीए बढ़ने का। सूत्रों का यह भी कहना है कि एनपीए कम दिखाने और कम करने का दबाव ऊपर से ही होता है। एनपीए के आंकड़े उनके अपने-अपने होते हैं। लीड बैंक की कोई भूमिका नहीं होती है। 
विज्ञापन

जिले में 700 करोड़ से अधिक एनपीए
विभिन्न बैंकों की मिलीभगत से बड़े बकायेदार नियमित किस्त जमा नहीं करते हैं, उन्हें ऊपर के इशारे पर पूरी छूट मिली हुई है। बैंक प्रबंधन उन्हें डिफाल्टर सूची में न लाने के लिए भरसक प्रयास रत रहता है। कहीं बीच में कुछ पेमेंट दिखा दिया जाता है। जबकि मानकों के विपरीत खातों में यह भुगतान होता है। यही वजह है कि जिले में एनपीए सात सौ करोड़ से ऊपर पहुंच गया है। बैंक अपनी गोपनीयता के नाम पर इसे छिपाए बैठे हैं। साथ ही लीड बैंक को भी यह आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं। नियमानुसार सभी शाखाओं और क्षेत्रीय कार्यालयों पर डिफाल्टर अथवा नियमित भुगतान न करने वाले बड़े बकायादारों की सूची प्रदर्शित होनी चाहिए। देश का सबसे बड़ा पीएनबी घोटाला सामने आने पर भी बैंकों की चालढाल आज भी मदमस्त है। 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed