फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Ayurvedic antibiotic drug Septilin, FIFA Troll found substandard

Bareilly News: आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक औषधि सेप्टिलिन, फीफा ट्रोल मिलीं अधोमानक

Mon, 28 Aug 2023 01:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 28 Aug 2023 01:45 AM IST
विज्ञापन
Ayurvedic antibiotic drug Septilin, FIFA Troll found substandard
बरेली। आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक का सेवन कर स्वास्थ्य लाभ की उम्मीद बेमानी है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के प्रकाशित शोधपत्र में सेप्टिलिन, फीफा ट्रोल दवाएं अधोमानक मिलीं। इनकी तुलना में तुलसी का तेल ज्यादा रोगाणुनाशक साबित हुआ।
विज्ञापन

जनपदिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रधान वैज्ञानिक डॉ. भोजराज सिंह के मुताबिक एलोपैथ की एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम होने और दुष्प्रभाव के बारे में ज्यादातर लोग जानते हैं। लिहाजा, आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक दवा सेप्टिलिन और फीफा ट्रोल की मांग बढ़ी। ये आयुर्वेदिक दवा जीवाणुओं का संक्रमण रोकने में कितनी कारगर है, इसकी जानकारी के लिए साल 2020-21 में शोध शुरू हुआ। इसमें विभाग के दो वैज्ञानिक डॉ. सिन्हा और डॉ. विनोद कुमार समेत शोध छात्रा हिमानी, आकांक्षा, कार्तिकेयन, शिववरण का सहयोग रहा।
विज्ञापन

शोध में 22 प्रजाति के 80 रोगाणुओं पर परीक्षण हुआ। पता चला कि दवा सिर्फ 33 फीसदी कारगर हैं। जलीय अर्क में जीवाणु को मारने की क्षमता नहीं थी, थोड़ी बहुत क्षमता एल्कोहालिक अर्क में थी। जबकि तुलसी का तेल जीवाणुओं का संक्रमण रोकने में 86 फीसदी कारगर मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन


वैकल्पिक आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक के नाम पर खेल
शोधपत्र के मुताबिक एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन से सुपरबग का खतरा बढ़ा है। लिहाजा, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कई साल पहले एंटीबायोटिक दवा के विकल्प तलाशने के लिए कहा था। ऐसे में आयुर्वेदिक और प्राचीन उपचार के तरीकों से संक्रमण रोकने के बारे में शोध शुरू हुए। आधी-अधूरी जानकारी का नतीजा रहा कि कंपनियां वैकल्पिक आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक्स के नाम पर उत्पाद बनाकर मुनाफा कमाने लगीं।

एलोपैथ विधि से जांची आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक दवा
डॉ. भोजराज के मुताबिक आयुर्वेदिक औषधि को एलोपैथिक दवा के जांचने के तरीके से जांचा गया। यह शोधपत्र की कमी है, क्योंकि दोनों विधा में रोग की उत्पत्ति और इलाज में सैद्धांतिक भिन्नता होने से दवा का प्रभाव जांचने का तरीका भी अलग होना चाहिए। मगर आयुर्वेदिक औषधियों की गुणवत्ता जांचने का तरीका विकसित नहीं है। इसलिए शोधपत्र में औषधियों की गुणवत्ता जांचने के तरीकों के विकास का सुझाव दिया गया है।


गिर और हैदराबाद के जंगलों में सुपरबग का प्रकोप
शोधपत्र के अनुसार एंटीबायोटिक के प्रति जीवाणुओं में प्रतिरोधक क्षमता (सुपरबग) विकसित करने की बड़ी वजह एंटीबायोटिक, डिसइंफेक्टेंट, एंटीसेप्टिक बनाने वाले संस्थान/फार्मा कंपनियां हैं। ये अपशिष्ट का बगैर शोधन किए नदियों, नालों व झीलों में बहा रहे हैं। वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार गिर और हैदराबाद के जंगलों जहां फार्मा-कंपनियों के बड़े केंद्र हैं, वहां सुपरबग का संक्रमण वन्यजीवों की मौत की वजह बन रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed