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Bareilly News: ऑटो रेस्क्यू डिवाइस बनी मददगार
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लिफ्ट में लगी ऑटो रेस्क्यू डिवाइस मददगार बनी। इस डिवाइस के कारण ही बिजली गुल होने पर लिफ्ट फ्लोर पर आकर रुकी। उप्र लिफ्ट और एस्केलेटर अधिनियम के तहत सभी लिफ्टों में ऑटो रेस्क्यू डिवाइस अनिवार्य की गई है।
इनका रखें ध्यान
- यदि लिफ्ट बीच में फंस जाएं तो घबराए नहीं। आपात स्थिति हो तो ही अलार्म या कॉल बटन का उपयोग करें। आपातकालीन नंबर पर भी संपर्क कर सकते हैं।
- लिफ्ट में लिखी हुई अधिकतम यात्री क्षमता या वजन सीमा का पालन करें। यदि अलार्म बजता है तो अतिरिक्त लोगों या सामान को तुरंत बाहर निकाल देना चाहिए।
- बुजुर्गों, गर्भवतियों, दिव्यांगों और बच्चों के साथ चल रहे लोगों को लिफ्ट का उपयोग करने में प्राथमिकता दें।
- लिफ्ट के दरवाजे के पास न खड़े हों। उन्हें अपने हाथ, पैर या शरीर के किसी हिस्से से जबरन रोकने या खोलने की कोशिश न करें।
- लिफ्ट में आते-जाते समय कतार का पालन करें। प्रवेश करने से पहले अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने दें।
- बच्चों को लिफ्ट में अकेला न छोड़ें। उन्हें अपने पास रखें और बटन या दरवाजे के साथ खेलने न दें।
- लिफ्ट के अंदर धूम्रपान करना, खाना-पीना या कचरा फैलाना मना होता है। मॉल में भीड़भाड़ के दौरान सीढ़ियों या एस्केलेटर का उपयोग करें, ताकि लिफ्ट उन लोगों के लिए खाली रहे जिन्हें उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
- लिफ्ट का दरवाज़ा खुलने पर देखें कि अंदर उसका केबिन मौजूद है या नहीं। अंधेरी लिफ्ट में कभी पैर न रखें।
- लिफ्ट से उतरते समय ध्यान दें कि उसका फर्श और इमारत का फ्लोर बराबर हो।
- ऊपर जाने के लिए हमेशा अप एरो और नीचे आने के लिए डाउन एरो वाला बटन दबाएं।
पहले हुए हादसे
- इसी साल नौ फरवरी को प्रेमनगर स्थित फ्लैशबैक रेस्टोरेंट में एक लिफ्ट फेल होने से उसमें छह बच्चों सहित दस लोग फंस गए थे। लिफ्ट तीसरी मंजिल से सीधे भूतल पर आकर टकराई थी। दरवाजा तोड़कर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया था।
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- एक सितंबर 2019 को जिला महिला अस्पताल में सौ बेड वाले मैटरनिटी हॉस्पिटल में लगी पांच लोगों की क्षमता वाली लिफ्ट में स्वास्थ्य विभाग के ही 19 कर्मचारी जबरन घुस गए थे। तब लिफ्ट रास्ते में ही खराब हो गई थी। ऑपरेटर समेत सभी 20 लोग लिफ्ट में फंस गए थे। दो घंटे बाद लिफ्ट का गेट तोड़कर उनको बाहर निकाला गया था। गेट तोड़ने के दौरान लिफ्ट ऑपरेटर घायल हो गया था।
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इनका रखें ध्यान
- यदि लिफ्ट बीच में फंस जाएं तो घबराए नहीं। आपात स्थिति हो तो ही अलार्म या कॉल बटन का उपयोग करें। आपातकालीन नंबर पर भी संपर्क कर सकते हैं।
- लिफ्ट में लिखी हुई अधिकतम यात्री क्षमता या वजन सीमा का पालन करें। यदि अलार्म बजता है तो अतिरिक्त लोगों या सामान को तुरंत बाहर निकाल देना चाहिए।
- बुजुर्गों, गर्भवतियों, दिव्यांगों और बच्चों के साथ चल रहे लोगों को लिफ्ट का उपयोग करने में प्राथमिकता दें।
- लिफ्ट के दरवाजे के पास न खड़े हों। उन्हें अपने हाथ, पैर या शरीर के किसी हिस्से से जबरन रोकने या खोलने की कोशिश न करें।
- लिफ्ट में आते-जाते समय कतार का पालन करें। प्रवेश करने से पहले अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने दें।
- बच्चों को लिफ्ट में अकेला न छोड़ें। उन्हें अपने पास रखें और बटन या दरवाजे के साथ खेलने न दें।
- लिफ्ट के अंदर धूम्रपान करना, खाना-पीना या कचरा फैलाना मना होता है। मॉल में भीड़भाड़ के दौरान सीढ़ियों या एस्केलेटर का उपयोग करें, ताकि लिफ्ट उन लोगों के लिए खाली रहे जिन्हें उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
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- लिफ्ट का दरवाज़ा खुलने पर देखें कि अंदर उसका केबिन मौजूद है या नहीं। अंधेरी लिफ्ट में कभी पैर न रखें।
- लिफ्ट से उतरते समय ध्यान दें कि उसका फर्श और इमारत का फ्लोर बराबर हो।
- ऊपर जाने के लिए हमेशा अप एरो और नीचे आने के लिए डाउन एरो वाला बटन दबाएं।
पहले हुए हादसे
- इसी साल नौ फरवरी को प्रेमनगर स्थित फ्लैशबैक रेस्टोरेंट में एक लिफ्ट फेल होने से उसमें छह बच्चों सहित दस लोग फंस गए थे। लिफ्ट तीसरी मंजिल से सीधे भूतल पर आकर टकराई थी। दरवाजा तोड़कर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया था।
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- एक सितंबर 2019 को जिला महिला अस्पताल में सौ बेड वाले मैटरनिटी हॉस्पिटल में लगी पांच लोगों की क्षमता वाली लिफ्ट में स्वास्थ्य विभाग के ही 19 कर्मचारी जबरन घुस गए थे। तब लिफ्ट रास्ते में ही खराब हो गई थी। ऑपरेटर समेत सभी 20 लोग लिफ्ट में फंस गए थे। दो घंटे बाद लिफ्ट का गेट तोड़कर उनको बाहर निकाला गया था। गेट तोड़ने के दौरान लिफ्ट ऑपरेटर घायल हो गया था।