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नए कानून में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था लाएगी पारदर्शिता: न्यायाधीश अरुण कुमार
Sun, 28 Jul 2024 06:07 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sun, 28 Jul 2024 06:07 AM IST
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बरेली। नए कानून में इन्वेस्टिगेशन और जब्ती के समय ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था पारदर्शिता लाएगी। साथ ही नए कानून मेडिकल जांच, साक्ष्य संकलन व निर्णय देने आदि में समय की बाध्यता को सुनिश्चित करेंगे। यह बातें विशिष्ट अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अरुण कुमार सिंह देशवाल ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय के अटल सभागार में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में कहीं।
न्यायाधीश अरुण कुमार सिंह देशवाल ने फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के बारे में बताया। कहा कि आम आदमी में यह धारणा है कि न्याय मिलने में अधिक समय लगता है। इसमें देरी दो वजह से होती है। इन्वेस्टिगेशन में देरी और शेष ट्रायल में। इसी दिशा में काम करने के लिए नए तीन कानून बनाए गए हैं।
मुख्य अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सिद्धार्थ वर्मा ने सामाजिक परिवर्तन के साथ कानून को लागू करने और आने वाली कठिनाइयों के बारे में बताया। कहा कि एक जुलाई से देशभर में तीन नए कानून, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) लागू किए गए हैं।
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वहीं, जिला व सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार ने शून्य प्राथमिकी, त्वरित न्याय व नए कानूनों में जोड़े गए नए अपराधों के बारे में बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. केपी सिंह ने की। समारोह में डॉ. अमित सिंह व शोधार्थी निधि शंकर की पुस्तक ''''''''एक्सप्लोरिंग लीगल सेफगार्ड फॉर पर्सनैलिटी राइट्स इन द एरा ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस'''''''' का मुख्य अतिथि ने विमोचन किया। संचालन डॉ. ज्योति पांडे ने किया। कुलसचिव संजीव कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. भीमराव अंबेडकर पुलिस अकादमी मुरादाबाद के सहयोग से किया गया।
नए कानून हैं पीड़ित केंद्रित
मुख्य वक्ता एडीजी रमित शर्मा ने कहा कि एक जुलाई से लागू हुए तीनों नए कानूनों की संरचना दंड देने पर नहीं, बल्कि पीड़ित को न्याय दिलाने पर केंद्रित है। पुराने कानूनों के तहत जघन्य मामलों में दोषसिद्धि अत्यंत ही कम रही है। नए कानूनों के तहत यह संख्या सुधरेगी। नए कानूनों में लैंगिक समानता का पूरा ध्यान रखा गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से एक बेहतर कल में योगदान करने की अपील की। विधि विभागाध्यक्ष डॉ. अमित सिंह ने कहा कि नए कानून अव्यावहारिक विधियों को बदलने की ठोस प्रक्रिया का एक हिस्सा हैं।
विश्वविद्यालय का रहा हूं छात्र
न्यायाधीश अरुण कुमार सिंह देशवाल ने सभागार में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वह रुहेलखंड विश्वविद्यालय के छात्र हैं। यहां आकर विद्यार्थियों से बात करके अच्छा लग रहा है।
नए कानून से जुड़े पूछे सवाल
कॉन्फ्रेंस में सभागार में उपस्थित विद्यार्थियों से नए कानून से जुड़े धाराओं, कस्टडी के दिन, नया कानून कब से लागू हुआ आदि सवाल पूछे गए। इसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सही जवाब दिए, जिन्हें पुरस्कृत किया गया। इसके बाद ''''''''नेविगेटिंग क्रिमिनल लॉ रिफॉर्म्स इन इंडिया-2023'''''''' विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता में विधि विभाग का पहला पुरस्कार मोहित सिंह, दूसरा प्रिया गोयल और तीसरा पुरस्कार मोहित सागर को दिया गया। सामाजिक विज्ञान विभाग से श्रद्धा ने पहला, दीपांशी उपाध्याय ने दूसरा और अक्षिता ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
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न्यायाधीश अरुण कुमार सिंह देशवाल ने फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के बारे में बताया। कहा कि आम आदमी में यह धारणा है कि न्याय मिलने में अधिक समय लगता है। इसमें देरी दो वजह से होती है। इन्वेस्टिगेशन में देरी और शेष ट्रायल में। इसी दिशा में काम करने के लिए नए तीन कानून बनाए गए हैं।
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मुख्य अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सिद्धार्थ वर्मा ने सामाजिक परिवर्तन के साथ कानून को लागू करने और आने वाली कठिनाइयों के बारे में बताया। कहा कि एक जुलाई से देशभर में तीन नए कानून, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) लागू किए गए हैं।
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वहीं, जिला व सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार ने शून्य प्राथमिकी, त्वरित न्याय व नए कानूनों में जोड़े गए नए अपराधों के बारे में बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. केपी सिंह ने की। समारोह में डॉ. अमित सिंह व शोधार्थी निधि शंकर की पुस्तक ''''''''एक्सप्लोरिंग लीगल सेफगार्ड फॉर पर्सनैलिटी राइट्स इन द एरा ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस'''''''' का मुख्य अतिथि ने विमोचन किया। संचालन डॉ. ज्योति पांडे ने किया। कुलसचिव संजीव कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. भीमराव अंबेडकर पुलिस अकादमी मुरादाबाद के सहयोग से किया गया।
नए कानून हैं पीड़ित केंद्रित
मुख्य वक्ता एडीजी रमित शर्मा ने कहा कि एक जुलाई से लागू हुए तीनों नए कानूनों की संरचना दंड देने पर नहीं, बल्कि पीड़ित को न्याय दिलाने पर केंद्रित है। पुराने कानूनों के तहत जघन्य मामलों में दोषसिद्धि अत्यंत ही कम रही है। नए कानूनों के तहत यह संख्या सुधरेगी। नए कानूनों में लैंगिक समानता का पूरा ध्यान रखा गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से एक बेहतर कल में योगदान करने की अपील की। विधि विभागाध्यक्ष डॉ. अमित सिंह ने कहा कि नए कानून अव्यावहारिक विधियों को बदलने की ठोस प्रक्रिया का एक हिस्सा हैं।
विश्वविद्यालय का रहा हूं छात्र
न्यायाधीश अरुण कुमार सिंह देशवाल ने सभागार में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वह रुहेलखंड विश्वविद्यालय के छात्र हैं। यहां आकर विद्यार्थियों से बात करके अच्छा लग रहा है।
नए कानून से जुड़े पूछे सवाल
कॉन्फ्रेंस में सभागार में उपस्थित विद्यार्थियों से नए कानून से जुड़े धाराओं, कस्टडी के दिन, नया कानून कब से लागू हुआ आदि सवाल पूछे गए। इसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सही जवाब दिए, जिन्हें पुरस्कृत किया गया। इसके बाद ''''''''नेविगेटिंग क्रिमिनल लॉ रिफॉर्म्स इन इंडिया-2023'''''''' विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता में विधि विभाग का पहला पुरस्कार मोहित सिंह, दूसरा प्रिया गोयल और तीसरा पुरस्कार मोहित सागर को दिया गया। सामाजिक विज्ञान विभाग से श्रद्धा ने पहला, दीपांशी उपाध्याय ने दूसरा और अक्षिता ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।