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Bareilly News: शाम ढली तो डग्गामारी बढ़ी, वसूलते हैं दोगुना किराया
Sun, 21 Jul 2024 05:34 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sun, 21 Jul 2024 05:34 AM IST
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बरेली। परिवहन विभाग के अधिकारी डग्गामारी का तिलिस्म तोड़ने में नाकाम साबित हो रहे हैं। कई मार्ग ऐसे हैं, जहां शाम ढलते ही डग्गामारी और तेज हो जाती है। इसके पीछे वजह यह है कि रात में इन मार्गों पर रोडवेज बसें नहीं चलतीं। ऐसे में डग्गामार वाहन संचालक सवारियों से दोगुना तक किराया वसूलते हैं।
बरेली से बीसलपुर की दूरी करीब 50 किलोमीटर है। बीसलपुर व आस-पास क्षेत्र के व्यापारी व अन्य हजारों लोग रोजाना बरेली आते-जाते है। परिवहन सेवाएं लचर होने से इस मार्ग पर डग्गामार वाहन चालक हावी रहते हैं। शाम सात बजे के बाद बीसलपुर मार्ग पर रोडवेज व निजी बसों का संचालन नहीं होता। ऐसे में इस मार्ग पर ऑटो, वैन व अन्य डग्गामार वाहन हावी हो जाते है। तमाम मजदूर पेशा लोग दिल्ली, जयपुर, हरियाणा, पानीपत आदि जगहों से आकर सेटेलाइट बस अड्डे पर बसों का इंतजार करते हैं। घंटों इंतजार के बाद मजबूरन उनको डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। वहां उनसे दोगुना किराया वसूला जाता है।
बरेली से बीसलुपर के लिए रोडवेज बसों का किराया 67 रुपये है। इस मार्ग पर दिन में निजी बस, ऑटो, टैंपो व वैन संचालक 50 रुपये प्रति सवारी किराया वसूलते हैं पर शाम को जैसे ही रोडवेज बसें के पहिये थम जाते हैं, यह किराया 100 रुपये तक पहुंच जाता है। ई-रिक्शा वाले भी इसमें पीछे नहीं रहते। दोगुने किराये के लालच में वह भी यात्रियों को 50 किमी का सफर करा रहे हैं। ऑटो चालक भी तीन की जगह आठ-दस सवारियां भरकर यात्रियों को जोखिम भरा सफर करा रहे हैं।
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चौराहे पर मौजूद ट्रैफिक पुलिस कर्मियों के सामने ही यह खेल होता है। पूरी सड़क घेरकर सवारियों को आवाज दी जाती है। जब जाम की स्थिति होती है तो यह लोग सीटी बजाते हुए खानापूर्ति करते नजर आते है।
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बरेली से बीसलपुर की दूरी करीब 50 किलोमीटर है। बीसलपुर व आस-पास क्षेत्र के व्यापारी व अन्य हजारों लोग रोजाना बरेली आते-जाते है। परिवहन सेवाएं लचर होने से इस मार्ग पर डग्गामार वाहन चालक हावी रहते हैं। शाम सात बजे के बाद बीसलपुर मार्ग पर रोडवेज व निजी बसों का संचालन नहीं होता। ऐसे में इस मार्ग पर ऑटो, वैन व अन्य डग्गामार वाहन हावी हो जाते है। तमाम मजदूर पेशा लोग दिल्ली, जयपुर, हरियाणा, पानीपत आदि जगहों से आकर सेटेलाइट बस अड्डे पर बसों का इंतजार करते हैं। घंटों इंतजार के बाद मजबूरन उनको डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। वहां उनसे दोगुना किराया वसूला जाता है।
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बरेली से बीसलुपर के लिए रोडवेज बसों का किराया 67 रुपये है। इस मार्ग पर दिन में निजी बस, ऑटो, टैंपो व वैन संचालक 50 रुपये प्रति सवारी किराया वसूलते हैं पर शाम को जैसे ही रोडवेज बसें के पहिये थम जाते हैं, यह किराया 100 रुपये तक पहुंच जाता है। ई-रिक्शा वाले भी इसमें पीछे नहीं रहते। दोगुने किराये के लालच में वह भी यात्रियों को 50 किमी का सफर करा रहे हैं। ऑटो चालक भी तीन की जगह आठ-दस सवारियां भरकर यात्रियों को जोखिम भरा सफर करा रहे हैं।
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चौराहे पर मौजूद ट्रैफिक पुलिस कर्मियों के सामने ही यह खेल होता है। पूरी सड़क घेरकर सवारियों को आवाज दी जाती है। जब जाम की स्थिति होती है तो यह लोग सीटी बजाते हुए खानापूर्ति करते नजर आते है।