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एक्यूआई 122, बारिश ने धो डाला हवा में घुला जहर, साफ हुआ वातावरण
Tue, 17 Nov 2020 12:57 AM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 17 Nov 2020 12:57 AM IST
सार
- तीन माह बाद एक बार फिर लॉकडाउन जैसी स्थिति में बरेली का एक्यूआई
- 14 नवंबर को दर्ज हुआ था 465 एक्यूआई, बारिश के बाद पहुंचा 122.5
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बरेली। लॉकडाउन में स्वच्छ हुआ बरेली का वायुमंडल सिस्टम की अनदेखी से तीन माह में प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था। वहीं, पराली और दिवाली पर चले पटाखों ने इसे और घातक बना दिया। रविवार की देर शाम शुरू हुई बारिश ने देर रात में ही प्रदूषण काफी हद तक धो डाला है। जो एक्यूआई 465 दर्ज हो रहा था वह 122.5 तक पहुंच गया। जिसे बरकरार रखने की अपील अफसरों ने की है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक दिवाली पर चले पटाखों से मॉडल टाउन सर्वाधिक प्रदूषित हुआ था। यहां पीएम 10 पांच सौ के करीब पहुंच रहा था। इसके बाद चौपुला पर 488, यूनिवर्सिटी रोड पर 470, डेलापीर पर 401 दर्ज हुआ था। यह स्थिति 15 नवंबर की सुबह छह बजे तक दर्ज हुआ था। जिसके बाद रविवार की देर रात करीब दो से तीन घंटे तक रहरह कर बारिश का दौर जारी रहा। 16 नवंबर की सुबह छह बजे इन इलाकों में पीएम 10 क्रमश: 140, 138, 104 और 118 दर्ज हुआ। जो महज 24 घंटे पहले करीब चार से पांच गुना तक दर्ज हो रहा था। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदूषण का स्तर सामान्य स्थिति में 80 से सौ एक्यूआई तक दर्ज होता है। मगर, बारिश से यह लगभग सामान्य स्थिति में आ गया है। हवा में घुले धूल के कण, वाहनों से निकला धुआं और पराली और कूड़ा जलने के बाद उत्सर्जित गैसों को बारिश ने वायुमंडल से लगभग साफ कर दिया है।
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नोट: आंकड़े पीसीबी से प्राप्त, सुबह छह बजे तक
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निर्माण कार्य, जर्जर सड़कें बन रही वजह
बरेली कॉलेज के एमिरेट प्रोफेसर डॉ. डीके सक्सेना के मुताबिक शहर में लाखों की तादाद में मौजूद डग्गामार वाहन, अव्यवस्थित तरीके से हो रहे निर्माण, जर्जर सड़कों से उड़ रही धूल, रेंगता हुआ ट्रैफिक प्रदूषण की मुख्य वजह है। बताया कि पटाखा चलाने या पराली जलाने की घटनाएं साल में बेहद कम होती हैं। जिससे प्रदूषण का स्तर पचास से सौ एक्यूआई तक बढ़ जाता है। मगर, साल भर तीन सौ के करीब रहने वाले एक्यूआई की जो वजहें हैं सिस्टम को उन्हें जल्द दूर करनी चाहिए। विकास के लिए निर्माण जरूरी है मगर मानकों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
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सिस्टम की लापरवाही सेहत पर भारी
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एके चौहान के मुताबिक अबकी बार जहां भी प्रदूषण का स्तर तीन सौ के पार था वहां पर पटाखे बैन करने का निर्णय शासन ने लिया था। हालांकि, वहां भी पटाखों के शोर थम नहीं सके। बरेली में तीन सौ एक्यूआई के पास ही प्रदूषण का स्तर रहता है ऐसे में अगर 20-25 प्वॉइंट एक्यूआई कम भी था तब भी यहां पटाखों को चलाने पर रोक लगाने का आदेश प्रशासन को करना चाहिए था। वहीं, शासन को भी राजस्व बढ़ाने के बजाय पर्यावरण सुधार के लिए पहल करते हुए पटाखे बनाने वाली फैक्ट्रियों पर अंकुश लगाने का निर्णय लेना चाहिए।हेवी मेटल्स और बारूद बेहद घातक
प्रकृति से लगाव रखने वाले अनिल साहनी के मुताबिक शुक्रवार से रविवार की शाम तक चले पटाखों से एक्यूआई में जबरदस्त बढ़त हुई। मगर, देर रात हुई बारिश ने इसे पूरी तरह साफ कर दिया है। अगर बारिश न होती तो करीब 15 से 20 दिनों तक पटाखों में मिले बारूद और हेवी मेटल्स सांस के साथ शरीर में प्रवेश करते और नुकसान पहुंचाते। सब कुछ सिस्टम के भरोसे छोड़ देने से ही सुधार नहीं होगा। लोगों को भी अपना भला-बुरा समझना होगा और इसके लिए खुद से ही पहल करनी होगी। पटाखे की दुकान लगवाई प्रशासन ने मगर पटाखे चलाए जनता ने।खूब चले पटाखे तेजी से बढ़ा प्रदूषण
पटाखे चलने के बाद आमतौर पर मॉडल टाउन में डेढ़ से दो सौ के बीच एक्यूआई दर्ज होता है। जो दिवाली के बाद पांच सौ के करीब दर्ज हुआ। करीब दो गुना से ज्यादा प्रदूषण बढ़ने पर क्षेत्र के रहने वाले हरि मंदिर के सचिव रवि छाबड़ा का कहना है कि कई पटाखा कारोबारी मॉडल टाउन में ही रहते हैं। जिन्होंने बचे हुए तमाम पटाखों को चलाया। जिससे एकबारगी प्रदूषण का स्तर बढ़ा। उन्होंने लोगों से हुए प्रदूषण का जवाब देने के लिए पौधरोपण और वाहनों का जरूरत पड़ने पर ही प्रयोग करने का सुझाव दिया है। ताकि सेहत पर विपरीत असर न पड़ सके।| इलाका | 15 नवंबर | 16 नवंबर |
| मॉडल टाउन | 498 | 140 |
| यूनिवर्सिटी रोड | 470 | 104 |
| चौपुला | 488 | 138 |
| डेलापीर | 401 | 118 |
| एक्यूआई औसत | 465 | 122.5 |
नोट: आंकड़े पीसीबी से प्राप्त, सुबह छह बजे तक