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बोलीं अपराजिताएं, दरिंदों को सबके सामने गोली से उड़ाओ
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बोलीं अपराजिताएं, दरिंदों को सबके सामने गोली से उड़ाओ
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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साहू राम स्वरूप महिला महाविद्यालय में हुआ अपराजिता कार्यक्रम
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बरेली। हैदराबाद में महिला डॉक्टर का अपहरण, दुष्कर्म और जलाकर हत्या करने के मामले ने शहर के लोगों को भी झकझोर दिया है। समाज को शर्मसार कर देने वाली इस दरिंदगी के खिलाफ बेहद आक्रोश है। इस घटना के बीच महिला सुरक्षा पर सोमवार को आयोजित अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम में साहू राम स्वरूप महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। कहा कि उन्हें समाज से हमदर्दी नहीं चाहिए, कैंडल मार्च निकालना बंद करिए। आरोपियों का सीधा एनकाउंटर करिए।
छात्राओं ने कहा कि कैंडल मार्च निकालने और घटना पर रोष जताने से कुछ नहीं होने वाला। ऐसे दरिंदों का सीधा एनकाउंटर करिए। जब ऐसे दरिंदों में मौत का खौफ होगा तो भविष्य में इस तरह की दरिंदगी करने का कोई दुस्साहस नहीं कर सकेगा। शामिल अन्य छात्राओं ने कहा कि बेटियों को लेकर समाज की मानसिकता बदलने की जरूरत है और इसकी शुरूआत घर से ही होनी चाहिए।
शिक्षिका डॉ. गीता अग्रवाल ने कहा कि न्याय के लिए सामाजिक, पुलिस व न्यायिक व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता है। पुलिस और न्यायिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास बढ़े, इसके लिए कदम उठाए जाने चाहिए। स्कूली शिक्षा में नैतिक शिक्षा के साथ सेल्फ डिफेंस को बढ़ावा दिया जाए। ऐसी तकनीकी विकसित करनी चाहिए, जिससे इमरजेंसी में बेटियों को तत्काल मदद मिले।
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देरी से मिलने वाला न्याय, न्याय नहीं होता
किसी भी मामले में यदि देरी से न्याय मिलता है तो फिर वह न्याय नहीं होता। निर्भया कांड में हम सभी ने देखा कि न्याय मिलने में देरी हुई। क्या यही महिला डॉक्टर के मामले में होगा। यदि इस तरह से न्याय होता रहेगा तो घटनाएं बढ़ेंगी। सरकार से मांग है कि जल्द से जल्द न्याय हो।
- राकेश अरोरा, प्राचार्य, साहू राम स्वरुप महिला महाविद्यालय।
कानून का डर खत्म हो चुका
सजा देरी से मिलने से कानून का डर खत्म हो चुका होता है। समाज में लोगों की मानसिकता को बदलने की जरूरत है। दुष्कर्मियों को तत्काल जान से मार देना चाहिए। सजा में देरी से दरिंदों का मनोबल बढ़ता है।
- पूजा वाजपेयी, छात्रा
बेटा पढ़ाओ, बेटी बचाओ
दुष्कर्म करने वालों के दिलों में कानून का डर पैदा होना ही चाहिए। युवकों को महिलाओं को सम्मान की निगाह से देखने का संस्कार घर से डालना होगा। आज समाज में बेटा पढ़ाओ, बेटी बचाओ की स्थिति कायम हो गई है।
- अंशिका गुप्ता, छात्रा
बच्चों में अभी से संस्कार डालें
निर्भया कांड में अभियुक्तों को सात साल बाद भी फांसी नहीं होना चिंता का विषय है। अपराधियों के खिलाफ जल्द सजा नहीं होने से अपराध बढ़ता है। समाज को ठीक करने के लिए बच्चों में संस्कार डालना चाहिए।
- सिमरन खान, छात्रा
कानून लचीला है
कानून लचीला है। इस कारण अपराधियों का मनोबल बढ़ रहा है। हैदराबाद की घटना में अपराधियों को तत्काल फ ांसी की सजा होनी चाहिए। अपराधियों के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं होनी चाहिए। कैंडल मार्च निकालने की जरूरत नहीं है।
-प्रियम शंखधार, छात्रा
छात्राओं ने कहा कि कैंडल मार्च निकालने और घटना पर रोष जताने से कुछ नहीं होने वाला। ऐसे दरिंदों का सीधा एनकाउंटर करिए। जब ऐसे दरिंदों में मौत का खौफ होगा तो भविष्य में इस तरह की दरिंदगी करने का कोई दुस्साहस नहीं कर सकेगा। शामिल अन्य छात्राओं ने कहा कि बेटियों को लेकर समाज की मानसिकता बदलने की जरूरत है और इसकी शुरूआत घर से ही होनी चाहिए।
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शिक्षिका डॉ. गीता अग्रवाल ने कहा कि न्याय के लिए सामाजिक, पुलिस व न्यायिक व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता है। पुलिस और न्यायिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास बढ़े, इसके लिए कदम उठाए जाने चाहिए। स्कूली शिक्षा में नैतिक शिक्षा के साथ सेल्फ डिफेंस को बढ़ावा दिया जाए। ऐसी तकनीकी विकसित करनी चाहिए, जिससे इमरजेंसी में बेटियों को तत्काल मदद मिले।
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देरी से मिलने वाला न्याय, न्याय नहीं होता
किसी भी मामले में यदि देरी से न्याय मिलता है तो फिर वह न्याय नहीं होता। निर्भया कांड में हम सभी ने देखा कि न्याय मिलने में देरी हुई। क्या यही महिला डॉक्टर के मामले में होगा। यदि इस तरह से न्याय होता रहेगा तो घटनाएं बढ़ेंगी। सरकार से मांग है कि जल्द से जल्द न्याय हो।
- राकेश अरोरा, प्राचार्य, साहू राम स्वरुप महिला महाविद्यालय।
कानून का डर खत्म हो चुका
सजा देरी से मिलने से कानून का डर खत्म हो चुका होता है। समाज में लोगों की मानसिकता को बदलने की जरूरत है। दुष्कर्मियों को तत्काल जान से मार देना चाहिए। सजा में देरी से दरिंदों का मनोबल बढ़ता है।
- पूजा वाजपेयी, छात्रा
बेटा पढ़ाओ, बेटी बचाओ
दुष्कर्म करने वालों के दिलों में कानून का डर पैदा होना ही चाहिए। युवकों को महिलाओं को सम्मान की निगाह से देखने का संस्कार घर से डालना होगा। आज समाज में बेटा पढ़ाओ, बेटी बचाओ की स्थिति कायम हो गई है।
- अंशिका गुप्ता, छात्रा
बच्चों में अभी से संस्कार डालें
निर्भया कांड में अभियुक्तों को सात साल बाद भी फांसी नहीं होना चिंता का विषय है। अपराधियों के खिलाफ जल्द सजा नहीं होने से अपराध बढ़ता है। समाज को ठीक करने के लिए बच्चों में संस्कार डालना चाहिए।
- सिमरन खान, छात्रा
कानून लचीला है
कानून लचीला है। इस कारण अपराधियों का मनोबल बढ़ रहा है। हैदराबाद की घटना में अपराधियों को तत्काल फ ांसी की सजा होनी चाहिए। अपराधियों के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं होनी चाहिए। कैंडल मार्च निकालने की जरूरत नहीं है।
-प्रियम शंखधार, छात्रा