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खाला का घर है तो किस बात का डर है: नाराज होकर घर से भागे बच्चे, मौसी के यहां पहुंचे; पढ़ें ये रिपोर्ट
Fri, 02 Jun 2023 11:29 AM IST
मुकेश कुमार
सोनम शुक्ला, संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
सोनम शुक्ला, संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 02 Jun 2023 11:29 AM IST
सार
बाल कल्याण समिति के आंकड़ों के मुताबिक प्रतिमाह ऐसे 60-65 मामले सामने आ रहे हैं। इनमें 35-40 मामलों में बच्चे माता-पिता से नाराज होकर घर से भाग रहे हैं। कई मामलों की पुलिस की जांच में बच्चों को मौसी के घर में पाया गया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : istock
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विस्तार
मौसी का ज्यादा लाड़ प्यार बच्चों को बिगाड़ भी सकता है। यह हम नहीं कह रहे, आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। बरेली में बाल कल्याण समिति के समक्ष घर से भागकर आने वाले बच्चों की काउंसलिंग में चौंकाने वाली बात सामने आई है। काउंसलिंग में पता लगा है कि ज्यादातर बच्चे घर से भागकर मौसी (खाला) के यहां पहुंचे हैं। ऐसे कई मामलों के तार मौसी के घर से जुड़े पाए गए हैं।
समिति के आंकड़ों के मुताबिक प्रतिमाह ऐसे 60-65 मामले सामने आ रहे हैं। इनमें 35-40 मामलों में बच्चे माता-पिता से नाराज होकर घर से भाग रहे हैं। उनके घर नहीं लौटने पर खोजबीन में या पुलिस की जांच में बच्चों को मौसी के घर में पाया गया। बाल कल्याण समिति की सदस्य डॉ. राखी चौहान और मोनिका गुप्ता ने बताया कि बच्चों के घरों से भागने के ज्यादातर मामलों में तार मौसी के घर से जुड़े होते हैं।
- पसंद के कपड़े न दिलाना।
- दोस्तों से बात करने से रोकना।
- सबके सामने डांटना।
- रिश्तेदारों के बच्चों से तुलना करना।
- बाहर घूमने की ललक।
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समिति के आंकड़ों के मुताबिक प्रतिमाह ऐसे 60-65 मामले सामने आ रहे हैं। इनमें 35-40 मामलों में बच्चे माता-पिता से नाराज होकर घर से भाग रहे हैं। उनके घर नहीं लौटने पर खोजबीन में या पुलिस की जांच में बच्चों को मौसी के घर में पाया गया। बाल कल्याण समिति की सदस्य डॉ. राखी चौहान और मोनिका गुप्ता ने बताया कि बच्चों के घरों से भागने के ज्यादातर मामलों में तार मौसी के घर से जुड़े होते हैं।
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इन वजहों से घर से भागते हैं बच्चे
- 70 फीसदी बच्चे गुस्से के कारण छोड़ते हैं घर।- पसंद के कपड़े न दिलाना।
- दोस्तों से बात करने से रोकना।
- सबके सामने डांटना।
- रिश्तेदारों के बच्चों से तुलना करना।
- बाहर घूमने की ललक।
क्या करना चाहिए
- बच्चे को समझें।- उसके साथ संवाद बढ़ाएं।
- दूसरे बच्चों से तुलना न करें।
- भावनात्मक रूप से उसे समझें।
- अनावश्यक दबाव न बनाएं।
केस- 1
बुधवार को पुराना शहर का 12 साल का छात्र बंटी (बदला हुआ नाम) घर से 50 रुपये लेकर चला गया। उसके घर न लौटने पर परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। काफी खोजबीन के बाद जब बेटा नहीं मिला तो परिजनों ने रिश्तेदारों को फोन करके पूछना शुरू किया।
अगले दिन शाम को पता लगा कि बंटी खाला के घर में है। समिति के सामने बंटी ने बताया कि वह घर से चीज खाने के लिए 50 रुपये मांग कर ले गया था। असल में यह पैसे उसने खाला के घर जाने के दौरान किराए के लिए मांगे थे। समिति ने बंटी को परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
केस- 2
हजियापुर के कक्षा छह के छात्र तुषार (बदला हुआ नाम) को माता-पिता ने सबके सामने डांटा तो उसने धमकी भरे स्वर में कहा कि मैं आपके पास नहीं रहूंगा। मां ने भी गुस्से में कह दिया कि जहां जाना है जा...। इसके बाद तुषार ने गुल्लक से पैसे निकाले और कर्मचारी नगर में रहने वाली मौसी के घर चला गया।
हजियापुर के कक्षा छह के छात्र तुषार (बदला हुआ नाम) को माता-पिता ने सबके सामने डांटा तो उसने धमकी भरे स्वर में कहा कि मैं आपके पास नहीं रहूंगा। मां ने भी गुस्से में कह दिया कि जहां जाना है जा...। इसके बाद तुषार ने गुल्लक से पैसे निकाले और कर्मचारी नगर में रहने वाली मौसी के घर चला गया।
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तुषार के अकेले आने पर मौसी ने फोन करके उसकी मां को सूचना दी तो उसके घर से जाने का पता चला। माता-पिता उसे लेने पहुंचे तो उसने इनकार कर दिया। बाल कल्याण समिति के समझाने पर वह साथ जाने को तैयार हुआ।
केस- 3
सुभाषनगर की कक्षा पांच की छात्रा श्रेया (बदला हुआ नाम) को माता-पिता ने पसंद के कपड़े नहीं दिलाए। जिद करने पर डांट भी दिया। इस पर छात्रा ने स्कूल से घर न लौटने का मन बना लिया। वह सीधे मौसी के घर चली गई।
उस दिन स्कूल के रिक्शाचालक ने जब घर पर फोन करके यह बताया कि श्रेया बाकी बच्चों के साथ नहीं है। क्या घर का कोई व्यक्ति उसे लेकर गया है। तब परिजनों ने स्कूल पहुंचकर पूछताछ की। मामला पुलिस तक पहुंच गया। छात्रा ने वापस घर जाने से मना कर दिया तो मौसी ने फोन करके परिजनों को सूचना दी।
सुभाषनगर की कक्षा पांच की छात्रा श्रेया (बदला हुआ नाम) को माता-पिता ने पसंद के कपड़े नहीं दिलाए। जिद करने पर डांट भी दिया। इस पर छात्रा ने स्कूल से घर न लौटने का मन बना लिया। वह सीधे मौसी के घर चली गई।
उस दिन स्कूल के रिक्शाचालक ने जब घर पर फोन करके यह बताया कि श्रेया बाकी बच्चों के साथ नहीं है। क्या घर का कोई व्यक्ति उसे लेकर गया है। तब परिजनों ने स्कूल पहुंचकर पूछताछ की। मामला पुलिस तक पहुंच गया। छात्रा ने वापस घर जाने से मना कर दिया तो मौसी ने फोन करके परिजनों को सूचना दी।