बरेली: शिव मंदिर की 100 बीघा जमीन दूसरे समुदाय के लोगों को बेचने का आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश
नवाबगंज थाना क्षेत्र के महेशपुरा गांव के प्राचीन शिव मंदिर की 100 बीघा भूमि एक करोड़ 85 लाख रुपये में बेची गई। आरोप है कि इस जमीन का सौदा दूसरे समुदाय के लोगों से किया गया। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है।
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बरेली के नवाबगंज तहसील क्षेत्र के गांव महेशपुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर की 100 बीघा भूमि कथित तौर पर दूसरे समुदाय के व्यक्ति को बेचे जाने का आरोप लगा है। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत अधिकारियों और मुख्यमंत्री पोर्टल पर की है। उप जिलाधिकारी सचिन कुमार यादव ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। वहीं मंगलवार को नवाबगंज विधायक अपने समर्थकों के साथ गांव पहुंचे और विरोध जताया।
सोमवार को उप जिलाधिकारी सचिन कुमार यादव ने तहसीलदार सत्येंद्र कटियार के साथ महेशपुर गांव का दौरा किया। उन्होंने राजस्व टीम को साथ ले जाकर जमीन की पैमाइश कराई। ग्रामीणों का आरोप है कि मंदिर की देखरेख करने वाले पुजारी के वंशजों ने राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी की। उन्होंने स्वामित्व अपने नाम दर्ज कराकर भूमि का बैनामा कर दिया।
नाथू गिरी ने बताया कि मंदिर के नाम अब केवल छह बीघा जमीन बची है। शेष सारी जमीन बेच दी गई है। 26 सितंबर को 70 बीघा भूमि नन्हे अली और रुखसार के नाम बेची गई। 30 बीघा जमीन का बैनामा दो वर्ष पूर्व ही हो चुका था। इस जानकारी से ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने उच्च अधिकारियों से जांच की मांग की।
मंदिर का इतिहास
महेशपुर स्थित शिव मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। वर्ष 1938 में बरेली के गुलाब नगर निवासी रानी लक्ष्मीबाई ने मंदिर को 105 बीघा भूमि दान दी थी। विक्रम गिरी नामक पुजारी इसकी व्यवस्था देख रहे थे। बाद में उनके चेले छेदागिरी का नाम इंतजामिया के तौर पर दर्ज हुआ। छेदागिरी के भाई हीरा गिरी ने राजस्व रिकॉर्ड में अपना नाम जुड़वा लिया।
अधिकारियों का आश्वासन
यह महेशपुर मंदिर प्राचीन होने के साथ एक सिद्ध मंदिर भी माना जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक सावन माह में पचास हजार से अधिक कांवड़िये यहां जलाभिषेक करते हैं। शिवरात्रि पर श्रद्धालुओं का मेला लगता है। उप जिलाधिकारी सचिन कुमार यादव ने ग्रामीणों को न्याय संगत कार्रवाई का भरोसा दिया। इस दौरान तहसीलदार सत्येंद्र कटियार सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे।