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आरोप : सीएनडीएस को 12.85 करोड़ में दिया था काम, फिर निजी कंपनी को 18 करोड़ का ठेका क्यों
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बरेली। पूर्व महापौर डॉ. आईएस तोमर ने नगर निगम के नए भवन की खराब गुणवत्ता और बढ़ी लागत की विजिलेंस से जांच कराने की मांग मंडलायुक्त और शासन से की है। उन्होंने कहा कि पहले यह काम सरकारी एजेंसी को दिया गया था। निकाय चुनाव के तुरंत बाद मनमाने तरीके से डेढ़ गुना महंगी दरों पर इसे निजी कंपनी को दे दिया गया।
रामपुर गार्डन स्थित आवास पर मंगलवार को मीडिया से मुखातिब डॉ. तोमर ने बताया कि उनके कार्यकाल में 30 मार्च 2016 को नगर निगम की नई बिल्डिंग का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया था। 18 जुलाई 2016 को तत्कालीन नगर आयुक्त शीलधर यादव ने अनुमोदन के लिए शासन को पत्र भेजा था। इसके बाद जल निगम की इकाई कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विस (सीएंडडीएस) को 12.85 करोड़ रुपये में काम दिया गया था। तत्कालीन नगर आयुक्त ने वर्कऑर्डर भी जारी कर दिया था।
डॉ. तोमर के मुताबिक, इसके बाद नगर निकाय चुनाव हुए। नए महापौर उमेश गाैतम ने शासन से अनुमोदित निर्माण एजेंसी की जगह प्राइवेट फर्म को टेंडर देकर कार्यालय भवन का निर्माण शुरू करा दिया। इस बिल्डिंग पर 12.85 करोड़ की जगह 18 करोड़ खर्च भी चुके हैं। निर्माण आज तक अधूरा है। इसमें गुणवत्ता को ताक पर रखकर करोड़ों का घोटाला किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय तक साक्ष्य भेजने की बात कहकर निर्माण में खर्च हुए 18 करोड़ रुपये की वसूली किए जाने की मांग उठाई। संवाद
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इन बिंदुओं पर जांच की उठाई मांग
- किस कारण से सरकारी एजेंसी को नकार निजी ठेकेदार को काम दिया गया?
- इतनी बड़ी रकम से किसी भी निर्माण का अनुभव नगर निगम के किसी अभियंता पर नहीं था, फिर निर्माण कार्य का पर्यवेक्षण किसने किया?
- आठ वर्ष बाद भी बिल्डिंग अधूरी क्यों है?
- निर्माण कार्य प्रारंभ होने के बाद अलग-अलग नगर आयुक्त कई बार में लाखों रुपये का जुर्माना लगा चुके हैं। क्या जुर्माना वसूला भी गया?
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आरोप निराधार हैं : महापौर
महापौर उमेश गौतम का कहना है कि आरोप निराधार हैं। पूर्व महापौर आईएस तोमर जो तारीख बता रहे हैं, उसके बाद भी डेढ़ साल तक वह खुद महापौर की कुर्सी पर विराजमान रहे। वह मंडलायुक्त और शासन को पत्र भेज दें। जांच में सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। पूर्व महापौर अपने ही बुने जाल में फंस जाएंगे। काम समय से शुरू हो जाता और एजेंसी भी काम करने में तेजी दिखाती तो दूसरा टेंडर नहीं होता। वर्कऑर्डर जारी होने के बाद कब तक इंतजार में बैठेंगे? काम तो कराना ही था। इसलिए दोबारा टेंडर हुआ। मंडलायुक्त के निर्देश पर गुणवत्ता की जांच शुरू हो गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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रामपुर गार्डन स्थित आवास पर मंगलवार को मीडिया से मुखातिब डॉ. तोमर ने बताया कि उनके कार्यकाल में 30 मार्च 2016 को नगर निगम की नई बिल्डिंग का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया था। 18 जुलाई 2016 को तत्कालीन नगर आयुक्त शीलधर यादव ने अनुमोदन के लिए शासन को पत्र भेजा था। इसके बाद जल निगम की इकाई कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विस (सीएंडडीएस) को 12.85 करोड़ रुपये में काम दिया गया था। तत्कालीन नगर आयुक्त ने वर्कऑर्डर भी जारी कर दिया था।
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डॉ. तोमर के मुताबिक, इसके बाद नगर निकाय चुनाव हुए। नए महापौर उमेश गाैतम ने शासन से अनुमोदित निर्माण एजेंसी की जगह प्राइवेट फर्म को टेंडर देकर कार्यालय भवन का निर्माण शुरू करा दिया। इस बिल्डिंग पर 12.85 करोड़ की जगह 18 करोड़ खर्च भी चुके हैं। निर्माण आज तक अधूरा है। इसमें गुणवत्ता को ताक पर रखकर करोड़ों का घोटाला किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय तक साक्ष्य भेजने की बात कहकर निर्माण में खर्च हुए 18 करोड़ रुपये की वसूली किए जाने की मांग उठाई। संवाद
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इन बिंदुओं पर जांच की उठाई मांग
- किस कारण से सरकारी एजेंसी को नकार निजी ठेकेदार को काम दिया गया?
- इतनी बड़ी रकम से किसी भी निर्माण का अनुभव नगर निगम के किसी अभियंता पर नहीं था, फिर निर्माण कार्य का पर्यवेक्षण किसने किया?
- आठ वर्ष बाद भी बिल्डिंग अधूरी क्यों है?
- निर्माण कार्य प्रारंभ होने के बाद अलग-अलग नगर आयुक्त कई बार में लाखों रुपये का जुर्माना लगा चुके हैं। क्या जुर्माना वसूला भी गया?
आरोप निराधार हैं : महापौर
महापौर उमेश गौतम का कहना है कि आरोप निराधार हैं। पूर्व महापौर आईएस तोमर जो तारीख बता रहे हैं, उसके बाद भी डेढ़ साल तक वह खुद महापौर की कुर्सी पर विराजमान रहे। वह मंडलायुक्त और शासन को पत्र भेज दें। जांच में सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। पूर्व महापौर अपने ही बुने जाल में फंस जाएंगे। काम समय से शुरू हो जाता और एजेंसी भी काम करने में तेजी दिखाती तो दूसरा टेंडर नहीं होता। वर्कऑर्डर जारी होने के बाद कब तक इंतजार में बैठेंगे? काम तो कराना ही था। इसलिए दोबारा टेंडर हुआ। मंडलायुक्त के निर्देश पर गुणवत्ता की जांच शुरू हो गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।