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'धरती के भगवान' का चमत्कार: छाती-पेट से जुड़ी हुईं थीं जुड़वा बहनें, AIIMS में सर्जरी के बाद हुईं अलग

Thu, 27 Jul 2023 01:01 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली / दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली / दिल्ली Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 27 Jul 2023 01:01 PM IST
सार

धरती का भगवान कहे जाने वाले चिकित्सकों ने एक बार फिर कमाल किया है। दिल्ली एम्स के चिकित्सकों ने नौ घंटे की सर्जरी के बाद छाती-पेट से जुड़ी जुड़वा बहनों को अलग कर दिया। दोनों बहनें स्वस्थ हैं। 

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AIIMS doctors separate twin sisters after surgery
जुड़वा बहनें रिद्धि और सिद्धि - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली एम्स में नौ घंटे चली सर्जरी के बाद छाती और पेट से जुडीं जुड़वा बहनें रिद्धि-सिद्धि अलग हुईं। इस सर्जरी के लिए डॉक्टरों को 11 माह इंतजार करना पड़ा। दोनों बच्चियों के लिवर, छाती की हड्डियां, फेफड़ों का डायफ्राम, दिल से जुड़ीं कुछ झिल्लियां आपस में जुड़ी थीं। जन्म के तुरंत बाद सर्जरी करना आसान नहीं था। ऐसे में डॉक्टरों ने दोनों बच्चियों को अपनी निगरानी में एम्स में ही रखा। रोजाना

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स्क्रीनिंग करने के 11 माह बाद जब डॉक्टरों को लगा कि सर्जरी की जा सकती है तो 11 जून को 64 डॉक्टरों व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने सर्जरी की।

बरेली के फरीदपुर के रहने वाले अंकुर गुप्ता एक साल पहले गर्भवती पत्नी दीपिका का उपचार करवाने स्थानीय अस्पताल गए थे। यहां अल्ट्रासाउंड के दौरान पता चला कि दीपिका के गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चे आपस में जुड़े हैं। इसके बाद वह उन्हें सात जुलाई 2022 को एम्स लेकर गए। 
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एम्स के स्त्री रोग विभाग ने मरीज को अपनी निगरानी में रखा। एम्स में ही दीपिका के प्रसव कराने की तैयारी की गई। प्रसव के बाद डॉ. मीनू वाजपेयी के नेतृत्व में बाल शल्य चिकित्सा विभाग की टीम ने बच्चियों की जांच की। जांच के बाद कुछ इंतजार करने का फैसला लिया। अब 11 माह बाद दोनों को सर्जरी से अलग किया गया। सर्जरी के करीब डेढ़ माह बाद बाद दोनों बच्चे स्वस्थ हैं और इसी सप्ताह दोनों को अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है।

AIIMS doctors separate twin sisters after surgery
माता-पिता की गोद में रिद्धि सिद्धि - फोटो : अमर उजाला

बनाना चाहती हूं डॉक्टर

बच्ची की मां दीपिका ने बताया कि पिछले एक साल से वह अपने बच्चों के साथ एम्स में ही हैं। एम्स के डॉक्टरों ने पहले दिन से माता-पिता की तरह बच्चों का ख्याल रखा। यहीं इनका नाम रिद्धि और सिद्धि रखा गया है। मेरे लिए ये डॉक्टर भगवान की तरह हैं और मैं अपनी दोनों बेटियों को डॉक्टर बनाकर एम्स में ही भेजना चाहती हूं ताकि वे भी दूसरों की मदद कर सकें।

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तीन साल में छह सर्जरी

एम्स में पिछले तीन साल में ऐसे छह जुड़वा बच्चों को अलग किया जा चुका है। एम्स के बाल शल्य चिकित्सा विभाग की प्रमुख डॉ. मीनू बाजपेयी ने बताया कि हमने कोरोना काल के बाद छह आपस में जुड़े हुए बच्चों को अलग किया है। इनमें एक बच्चे की सर्जरी तो 24 घंटे चली थी। एम्स ने कूल्हे, छाती और सिर से जुड़े हुए बच्चों को अलग किया है।

50 हजार में एक केस

दुनिया में जन्म लेने वाले हर 50 हजार बच्चों में एक ऐसा मामला आता है, जिनमें बच्चे छाती और पेट से आपस में जुड़े होते हैं। वहीं, एक लाख में ऐसा एक मामला सामने आता है जिसमें बच्चे सिर से आपस में जुड़े हों। ऐसे बच्चों को लेकर उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। एम्स में यह सुविधा उपलब्ध है। ऐसे मरीजों को तुरंत यहां आना चाहिए।

फरीदपुर में फुटवियर व्यापार का करते हैं पिता

बच्चियों के पिता अंकुर गुप्ता की फरीदपुर में ही फुटवियर की दुकान है। बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में करीब पांच लाख रुपये का खर्च आया है। पत्नी इस 11 महीने के दौरान बच्चों के साथ एम्स में ही रहीं। अंकुर भी इस दौरान दिल्ली में ही रहे।

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